खून की समस्या
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इस ब्लीडिंग डिसऑर्डर के बारे में दुनिया भर में जागरूकता फैलाने और लोगों को सावधान करने के लिए हर साल 17 अप्रैल को वर्ल्ड हीमोफीलिया डे मनाया जाता है। इस साल 2026 की थीम है- समय पर समस्या का पता चलना, देखभाल की ओर पहला कदम।
कई बार लोगों में ये बीमारी तो होती है पर इसका तब तक पता नहीं चल पाता जब तक उन्हें कोई चोट न लगी हो या भारी मात्रा में ब्लीडिंग न हुई हो। खास बात यह है कि यह बीमारी ज्यादातर पुरुषों में पाई जाती है, महिलाओं में इसके मामले कम देखे जाते हैं।
हीमोफीलिया की समस्या के बारे में जान लीजिए
सामान्यतः जब शरीर में चोट लगती है, तो खून में मौजूद क्लॉटिंग फैक्टर्स यानी कुछ प्रकार के प्रोटीन मिलकर ज्यादा खून बहने से रोकते हैं। लेकिन हीमोफीलिया में ये फैक्टर्स या तो कम होते हैं या ठीक से काम नहीं करते।
- हीमोफीलिया मुख्य रूप से आनुवंशिक कारणों से होती है। यह बीमारी X-क्रोमोसोम से जुड़ी होती है।
- पुरुषों में केवल एक X-क्रोमोसोम होता है, इसलिए यदि उसमें खराब जीन हो, तो इस बीमारी का खतरा बढ़ जाता है।
- महिलाओं में दो X-क्रोमोसोम होते हैं, इसलिए यदि एक में खराबी हो, तो दूसरा सामान्य जीन उसकी भरपाई कर देता है। इसी कारण महिलाओं में ये दिक्कत कम होती है।
हीमोफीलिया के कारण आपमें इंटरनल ब्लीडिंग का भी खतरा हो सकता है। ऐसी स्थिति में आपके अंगों और ऊतकों को नुकसान पहुच सकता है जिस जानलेवा भी माना जाता है।