World Heart Day: इस लेख में जानें, भारत में दिल की बीमारी के इलाज का खर्च कितना है, एंजियोप्लास्टी-बाईपास पर कितना खर्च आता है और आयुष्मान भारत से कितनी राहत मिलती है।
World Heart Day: आज विश्व हृदय दिवस है। इस मौके पर जब दुनिया भर में लोगों को दिल को स्वस्थ रखने और हृदय रोगों से बचाव के प्रति जागरूक किया जा रहा है। दिल में थोड़ी सी तकलीफ होने पर जान जाने तक की नौबत आ सकती है। ऐसे समय मं हार्ट अटैक के बाद एंजियोप्लास्टी से लेकर बाईपास सर्जरी तक का इलाज कई परिवारों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकता है।
अस्पताल का खर्च खत्म होने के बाद भी दवाइयों, जांच और नियमित डॉक्टर विजिट का खर्च जारी रहता है। इसके अलावा मरीज के काम से दूर रहने पर परिवार की आमदनी भी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में एक गंभीर हृदय रोग परिवार की बचत और आर्थिक स्थिरता दोनों को प्रभावित कर सकता है।
आयुष्मान भारत जैसी सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाएं पात्र परिवारों के लिए महंगे इलाज का बोझ कम करने में मदद करती हैं, लेकिन जागरूकता और समय पर इलाज अब भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। आज के इस लेख में में हम आपको इसी से जुड़ी जानकारी देंगे।
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दिल की बीमारी में कितना खर्च आता है?
- फोटो : AI
हार्ट अटैक से लेकर बाईपास तक, कितना खर्च?
दिल की बीमारी का इलाज मरीज की स्थिति, अस्पताल, शहर और प्रक्रिया के आधार पर अलग-अलग हो सकता है।
एंजियोप्लास्टी: करीब 1 लाख रुपये से कई लाख रुपये तक।
बाईपास सर्जरी: करीब 2 लाख से 5 लाख रुपये या उससे अधिक।
हार्ट अटैक का इमरजेंसी इलाज: ICU, एंजियोग्राफी, दवाइयां और अन्य जांचों के कारण खर्च तेजी से बढ़ सकता है।
इलाज के बाद: नियमित दवाइयां, ब्लड टेस्ट, ECG/अन्य जांच और डॉक्टर की फीस का खर्च जारी रह सकता है।
हार्ट अटैक आया तो कितना आएगा खर्च
आसान भाषा में समझें तो हार्ट अटैक आने के बाद इलाज का खर्च मरीज की स्थिति, अस्पताल, शहर और उपचार की जरूरत पर निर्भर करता है। शुरुआती इमरजेंसी इलाज, ICU, ECG, ब्लड टेस्ट और एंजियोग्राफी से खर्च बढ़ सकता है। अगर एंजियोप्लास्टी की जरूरत पड़ती है तो स्टेंट समेत इलाज पर करीब 1 लाख रुपये से कई लाख रुपये तक खर्च हो सकता है, जबकि बाईपास सर्जरी की स्थिति में खर्च 2 से 5 लाख रुपये या उससे अधिक हो सकता है। निजी अस्पताल में वास्तविक बिल इससे कम या ज्यादा हो सकता है।
( ये खर्च अनुमानित है। मरीज की हालत के हिसाब से खर्च घट या बढ़ भी सकता है)
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आयुष्मान भारत से कितनी राहत?
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पात्र परिवारों को हर साल 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य कवर मिलता है। योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में कई गंभीर बीमारियों और सर्जरी का कैशलेस इलाज उपलब्ध है। कार्डियक उपचार भी योजना के तहत आने वाली प्रमुख सेवाओं में शामिल है। इससे पात्र परिवारों को महंगे इलाज के समय जेब से होने वाले खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि किस परेशानी में आपको सरकार से कितनी मदद मिल सकती है, ये आपकी रिपोर्ट पर निर्भर करता है।
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बीमारी का खर्च सिर्फ अस्पताल के बिल तक सीमित नहीं
विश्व हृदय दिवस पर आर्थिक बोझ को समझते समय सिर्फ ऑपरेशन का खर्च देखना पर्याप्त नहीं है। परिवार को कई अप्रत्यक्ष खर्च भी उठाने पड़ सकते हैं।
अस्पताल और ICU का खर्च
स्टेंट और सर्जरी का खर्च
दवाइयां और जांच
अस्पताल आने-जाने का खर्च
मरीज की देखभाल करने वाले व्यक्ति का खर्च
लंबे समय तक चलने वाली दवाइयों का खर्च
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सबसे बड़ा सवाल: बीमारी से पहले बचाव
हार्ट डिजीज का आर्थिक बोझ कम करने का सबसे प्रभावी तरीका बीमारी के गंभीर होने का इंतजार करने के बजाय समय रहते उसके जोखिमों को पहचानना और नियंत्रित करना है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल कई बार लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे हृदय और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
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- फोटो : AI
इसके अलावा धूम्रपान, तंबाकू का सेवन, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता, ज्यादा नमक और असंतुलित खान-पान, लगातार तनाव, कम नींद और अत्यधिक शराब का सेवन भी हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इसलिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की जांच कराना, वजन और कमर की परिधि पर नजर रखना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी टेस्ट कराना महत्वपूर्ण है।
रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार में फल-सब्जियों और साबुत अनाज को शामिल करना, नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित करना तथा धूम्रपान छोड़ना दिल की सेहत के लिए अहम कदम हैं। परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक या हृदय रोग का इतिहास हो तो नियमित स्वास्थ्य जांच और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
हमेशा याद रखें कि समय पर जोखिम की पहचान होने से न केवल गंभीर बीमारी और इमरजेंसी का खतरा कम करने में मदद मिल सकती है, बल्कि एंजियोप्लास्टी, बाईपास और लंबे समय तक चलने वाले महंगे इलाज से जुड़े आर्थिक बोझ को भी कम किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।