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World Hearing Day 2026: ये चार आदतें अनजाने में बढ़ा देती हैं बहरेपन का खतरा, आज से ही बरतें ये सावधानियां

Tue, 03 Mar 2026 08:28 PM IST
Shikhar Baranawal हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Causes of Hearing Loss in Adults: वर्ल्ड हियरिंग डे हर साल 3 मार्च को मनाया जाता है। हमारे देश की एक बड़ी आबादी कान की समस्या से परेशान रहती है। कई बार उनकी परेशानी का कारण उनकी दिनचर्या में की गई कुछ गलतियां होती हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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कम सुनाई देने की समस्या - फोटो : Freepik.com
World Hearing Day 2026: हर साल 3 मार्च को 'विश्व श्रवण दिवस' मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य बहरेपन को रोकने और कानों की देखभाल के प्रति लोगों को जागरूक करना है। आधुनिक जीवनशैली में गैजेट्स का बढ़ता उपयोग और ध्वनि प्रदूषण हमारे कानों नुकसान पहुंचा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सुनने की शक्ति खोना एक ऐसी प्रक्रिया है जो धीरे-धीरे शुरू होती है, इसलिए अक्सर लोग इसे तब तक नजरअंदाज करते हैं जब तक कि स्थिति गंभीर नहीं होती है। 

बता दें कि कानों की नसों का डैमेज होना अक्सर अपरिवर्तनीय होता है, जिसका अर्थ है कि एक बार सुनने की शक्ति चली गई तो उसे पूरी तरह वापस पाना मुश्किल होता है। बहुत से लोग अपनी दिनचर्या में जानें अनजानें में ऐसी कई गलतियां करते हैं जिसका असर उनके कानों पर पड़ता है। आइए इस लेख में चार ऐसी ही आदतों के बारे में जो आपके कानों को दबे पांव नुकसान पहुंचा रही हैं।
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कम सुनाई देने की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या देर तक ईयरफोन का इस्तेमाल नुकसानदायक है?
  • घंटों तक हाई वॉल्यूम पर ईयरफोन या हेडफोन का उपयोग करने से कानों की सूक्ष्म कोशिकाएं मृत हो सकती हैं।
  • विशेषज्ञों के मुताबिक सभी लोगों '60/60 नियम' का पालन करना चाहिए। इसमें आपका वॉल्यूम 60% से अधिक नहीं होना चाहिए और 60 मिनट से अधिक समय तक ईयरफोन नहीं करना चाहिए।
  • ईयरफोन्स को दूसरों के साथ साझा करने से कानों में फंगल इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जो सुनने की क्षमता को प्रभावित करता है।
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कान बंद होना - फोटो : Adobe Stock
क्या कान में नुकीली चीजें डालना चाहिए?
  • कान में माचिस की तीली, हेयरपिन या चाबी डालना पर्दे को हमेशा के लिए स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।
  • कान खुद को साफ करने की क्षमता रखते हैं, इसलिए 'ईयर बड्स' का उपयोग भी वैक्स को अंदर धकेलता है जिससे कान बंद हो सकते हैं।
  • नुकीली चीजों से कान की नाजुक त्वचा छिल सकती है, जिससे गंभीर सूजन और पस बनने की समस्या पैदा होती है।
 
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युवाओं में बढ़ती बहरेपन की समस्या - फोटो : Adobe stock photos
शोर वाले जगह पर देर तक रहने से क्या होता है?
  • 85 डेसिबल (dB) से अधिक का शोर लंबे समय तक सुनने से 'शोर-जनित श्रवण हानि' (NIHL) हो सकती है।
  • कारखानों, ट्रैफिक या लाउड डीजे के पास रहने से 'टिनिटस' (कानों में लगातार घंटी बजना) की समस्या हो जाती है।
  • अत्यधिक शोर मानसिक तनाव, हाई ब्लड प्रेशर और नींद की कमी का भी मुख्य कारण बनता है।
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कान से जुड़ी परेशानी - फोटो : Adobe Stock Images
कौन सी सावधानियां बरतनी जरूरी हैं?
  • शोर वाली जगहों पर ईयरप्लग का इस्तेमाल करें और संगीत सुनते समय 'नॉइज-कैंसलेशन' वाले हेडफोन्स को प्राथमिकता दें।
  • कानों में दर्द, भारीपन या कम सुनाई देने पर तुरंत ईएनटी विशेषज्ञ से अपनी जांच करवाएं।
  • बच्चों के लिए नियमित अंतराल पर हियरिंग स्क्रीनिंग करवाएं ताकि जन्मजात या शुरुआती श्रवण दोष का पता चल सके।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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