अपना पसंदीदा संगीत सुनना हो या फिर फोन पर बातें करना, सुनने की क्षमता बेहतर होना सबसे आवश्यक माना जाता है। पर दुर्भाग्य से कुछ लोगों को जन्मजात जबकि कुछ को समय के साथ सुनने की क्षमता में कमी आ जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हमारे जीवनशैली और आहार का भी सुनने की शक्ति पर प्रभाव पड़ता है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में बधिर और सुनने में अक्षमता वाले लोगों की संख्या 63 मिलियन के करीब है। इस तरह की समस्याओं से बचाव को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 3 मार्च को 'विश्व श्रवण दिवस' मनाया जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कान बहुत ही नाजुक अंगों में से एक हैं, जिनकी विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है। हालांकि जीवनशैली की कुछ खराब आदतों के चलते पिछले कुछ वर्षों में लोगों की सुनने की क्षमता काफी प्रभावित हुई है। तेज आवाज में हेडफोन से सुनने की आदत इसका प्रमुख कारण मानी जा रही है। कानों के सुनने की क्षमता को बेहतर बनाए रखने के लिए हमें खास ध्यान रखने की आवश्यकता है। आइए आगे की स्लाइडों में उन आदतों के बारे में जानते हैं जो बहरेपन का कारण बन सकती हैं।