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बड़ी कामयाबी: एआई की नजर से पहली ब्रेन सर्जरी, बचाई मरीज की आंखों की रोशनी

Sat, 29 Aug 2026 05:50 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लंदन में न्यूरोसर्जनों ने पहली बार लाइव आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी की। 48 वर्षीय राइस हिबर्ट के पिट्यूटरी ग्लैंड में 11एमएम का ट्यूमर था, जिससे उनकी आंखों की रोशनी जाने का खतरा था। सर्जरी सफल रही और मरीज की दृष्टि सुरक्षित रही।
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एआई की मदद से दुनिया की पहली ब्रेन सर्जरी - फोटो : Amarujala.com/AI
दुनिया में पहली बार कंप्यूटर-विजन आधारित मशीन इंटेलिजेंस ने लाइव ब्रेन सर्जरी के दौरान न्यूरोसर्जन को महत्वपूर्ण शारीरिक संरचनाओं की पहचान करने में मदद की। लंदन के नेशनल हॉस्पिटल फॉर न्यूरोलॉजी एंड न्यूरोसर्जरी में हुई इस सर्जरी में डॉक्टरों ने पिट्यूटरी ग्रंथि का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकालते हुए मरीज की दृष्टि को नुकसान से बचाया।

यह प्रक्रिया यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) की विकसित तकनीक के क्लिनिकल ट्रायल के तहत हुई।

यूसीएल की प्रणाली ने ऑपरेशन के दौरान एंडोस्कोप से मिल रही लाइव वीडियो फीड का विश्लेषण किया और महत्वपूर्ण शारीरिक संरचनाओं को चिह्नित किया। इनमें ऑप्टिक नर्व और बड़ी रक्त वाहिकाएं भी शामिल थीं। पिट्यूटरी ट्यूमर की सर्जरी बेहद संवेदनशील होती है, क्योंकि ये संरचनाएं ट्यूमर के बेहद करीब होती हैं। छोटी-सी गलती से दृष्टि जाने, स्ट्रोक या मौत तक का खतरा रहता है। इ

स तकनीक की खासियत यह रही कि उसने केवल ऑपरेशन से पहले किए गए स्कैन पर निर्भर रहने के बजाय सर्जरी के दौरान सामने आ रहे वास्तविक दृश्य का विश्लेषण किया। इससे डॉक्टरों को जोखिम वाले हिस्सों की पहचान के लिए अतिरिक्त दृश्य सहायता मिली।
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आंखों की बच गई रोशनी - फोटो : Adobe Stock Photo
48 वर्षीय मरीज की दृष्टि में आया सुधार

48 वर्षीय राइस हिबर्ट के पिट्यूटरी में करीब 11 मिलीमीटर का ट्यूमर था। ट्यूमर के कारण गंभीर हार्मोन संबंधी समस्याएं हुईं और उनकी दृष्टि लगातार कमजोर होती गई। वह अपनी दृष्टि का बड़ा हिस्सा खो चुके थे और चलने के लिए छड़ियों का सहारा लेने लगे थे।
 
  • कंसल्टेंट न्यूरोसर्जन और यूसीएल के प्रोफेसर हानी मार्कस ने सर्जिकल रेजिडेंट दान्याल खान के साथ ऑपरेशन किया।
  • पूरी प्रक्रिया में सर्जन का नियंत्रण बरकरार रहा।
  • ऑपरेशन के बाद हिबर्ट की दृष्टि में उल्लेखनीय सुधार हुआ और एक सप्ताह के भीतर वह बिना चश्मे और छड़ी के स्वतंत्र रूप से चलने लगे।
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सैकड़ों ऑपरेशन के वीडियो से प्रशिक्षित

यूसीएल के हॉक्स इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने इस प्रणाली को पिछले एंडोस्कोपिक पिट्यूटरी ऑपरेशन के सैकड़ों चिह्नित वीडियो से प्रशिक्षित किया है। यह महत्वपूर्ण शारीरिक संरचनाओं के अलावा सर्जिकल उपकरणों और उनके ऊतक के साथ संपर्क को भी पहचान सकती है।

भविष्य में शोधकर्ता ऐसी प्रणाली विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जो ऑपरेशन के दौरान उपकरणों की गतिविधि और ऊतक के साथ उनके संपर्क पर भी वास्तविक समय में नजर रख सके। यह तकनीक एनवीडिया के क्लारा आईजीएक्स प्लेटफॉर्म पर चलती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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