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World Environment Day: पर्यावरण प्रदूषण सेहत को पहुंचा रहा गंभीर नुकसान, इन जोखिम कारकों के बारे में जानिए

Mon, 05 Jun 2023 12:06 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विश्व पर्यावरण दिवस 2023 - फोटो : iStock
पिछले कुछ दशकों में जिस तरह से हमारे पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ रहा है, यह न सिर्फ वर्तमान बल्कि भविष्य के लिए भी कई प्रकार से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि पर्यावरणीय चुनौतियां हमारे स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं, विशेष रूप से बुजुर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर, गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर इसके दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं।

वायु-जल, ध्वनि के साथ कई वातावरण में कई प्रकार के प्रदूषण बढ़ रहे हैं जिन्हें अध्ययनों में सीधे तौर पर हृदय रोग, कैंसर, पार्किंसंस डिजीज और कई अन्य गंभीर बीमारियों से संबंधित पाया है।

पर्यावरण में बढ़ रहे प्रदूषण की रोकथाम और इसके कारण बढ़ रही स्वास्थ्य समस्याओं के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 5 जून के विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कई प्रकार के एनवायरमेंटल फैक्टर्स हैं जिनका हमारी सेहत पर सीधा असर देखा जा रहा है। सभी लोगों को इसपर गंभीरता से ध्यान देना और बचाव के उपाय करना बहुत आवश्यक है। आइए सेहत को प्रभावित करने वाले ऐसे ही कारकों के बारे में जानते हैं।
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वायु प्रदूषण ने बढ़ाई मुश्किलें - फोटो : istock
वायु प्रदूषण सबसे खतरनाक

पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ते कार्बन उत्सर्जन के कारण पर्यावरण तेजी से प्रदूषित होता जा रहा है। वायु प्रदूषण का मुख्य कारण ठोस-सूक्ष्म कणों और कुछ गैसों का हवा में मिल जाना होता है। ये कण और गैसें कार और ट्रक से निकलने वाले धुएं, कारखानों, धूल, पराग और जंगल की आग आदि के कारण बढ़ रहे हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि इस प्रकार की प्रदूषित हवा में सांस लेने से अस्थमा और अन्य श्वसन रोगों, हृदय रोग और यहां तक कि फेफड़ों के कैंसर का खतरा काफी बढ़ जाता है।
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जल प्रदूषण के नुकसान - फोटो : Pixabay
जल प्रदूषण के जोखिम

जल उन सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधनों में से एक है जिस पर सभी जीवित चीजें निर्भर करती हैं। जहरीले घरेलू, औद्योगिक और कृषि कचरे को सीधे जल धाराओं में छोड़ने, जनसंख्या वृद्धि, कीटनाशकों, उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग के कारण जल प्रदूषित होता जा रहा है। प्लास्टिक कचरे के कारण महासागर प्रदूषित हो रहे हैं, जो समुद्री जीवों के जीवन पर हानिकारक प्रभाव डालते हैं, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से मनुष्य की सेहत पर भी नकारात्मक असर हो रहा है।

प्रदूषित जल के कारण हैजा, दस्त, पेचिश, हेपेटाइटिस-ए, टाइफाइड आदि जैसी बीमारियां होती हैं।

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पर्यावरण में बढ़ रहे हैं कई रसायन - फोटो : Pixabay
पर्यावरण में रसायनों का बढ़ना खतरनाक

गाड़ी के धुएं या फिर कारखानों से निकलने वाले धुएं में कई प्रकार के हानिकारक रसायन होते हैं, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे है। पारा, लेड, अभ्रक, कीटनाशक जैसे हानिकारक पर्यावरणीय रसायनों के संपर्क में आने से श्वसन और हृदय रोग, एलर्जी और कैंसर सहित गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है।

शोधकर्ताओं ने प्लास्टिक, विशेषतौर पर माइक्रोप्लास्टिक के कारण लोगों में बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर अलर्ट किया है।
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बैक्टीरियों के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Pixels
रोगाणुओं के कारण होने वाले रोग

फ्लू, खसरा, टाइफाइड, डायरिया और हैजा जैसे रोग, कई प्रकार के रोगाणुओं के कारण होते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया कि भोजन के माध्यम से इन रोगाणुओं के प्रभावित करने का जोखिम और अधिक हो सकता है। ऐसा ही एक उदाहरण है ई. कोलाई बैक्टीरिया, जो दूषित भोजन के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है, जिससे गंभीर रूप से पेट में ऐंठन-दर्द, खूनी दस्त और उल्टी की समस्या हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पर्यावरण का स्वच्छ रहना हमारी सेहत को ठीक रखने के लिए आवश्यक है, इसके लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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