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World Diabetes day: डायबिटीज के इन दो साइड-इफेक्ट्स की सबसे कम होती है चर्चा, पर गंभीर हो सकते हैं परिणाम

Fri, 14 Nov 2025 10:43 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • Diabetes Side-Effects: अध्ययनों से पता चलता है कि डायबिटीज रोगियों में कैंसर और प्रजनन से संबंधित समस्याओं का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि हाई शुगर लेवल का इन दो समस्याओं से क्या लिंक है और शुगर रोगी इनसे बचाव के लिए क्या उपाय कर सकते हैं?
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डायबिटीज के कारण होने वाली समस्याओं को जानिए - फोटो : Freepik.com
दुनियाभर में हाल के वर्षों में जिन बीमारियों के मामले सबसे तेजी से बढ़ते हुए देखे गए हैं, उनमें कैंसर, हृदय और डायबिटीज के मामले प्रमुख हैं। ब्लड शुगर का बढ़ा हुआ स्तर शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करने वाला हो सकता है।

डायबिटीज रोगियों में हृदय की बीमारी, आंखों की रोशनी कम होने, नसों की समस्या होने के बारे में तो अक्सर हम सभी सुनते रहते हैं, पर इसके कुछ ऐसे भी साइड-इफेक्ट्स हैं जिनके बारे में लोगों को कम जानकारी होती है और इसपर चर्चा भी कम की जाती है।

डायबिटीज के बढ़ते जोखिमों के बारे में लोगों को अलर्ट करने और और इससे बचाव के तरीकों को लेकर शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है। इस लेख में हम डायबिटीज के खतरनाक साइड-इफेक्ट्स के बारे में जानेंगे।
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हाई ब्लड शुगर की समस्या - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज और इसके कारण होने वाली समस्याएं

अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ विभोर गुप्ता बताते हैं, जिन लोगों का शुगर लेवल अक्सर अनियंत्रित रहता है, उनके संपूर्ण स्वास्थ्य पर इसका असर देखा जाता है।

अध्ययनों से पता चलता है कि डायबिटीज रोगियों में कैंसर और प्रजनन से संबंधित समस्याओं का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि हाई शुगर लेवल का इन दो समस्याओं से क्या लिंक है और शुगर रोगी इनसे बचाव के लिए क्या उपाय कर सकते हैं?
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कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe Stock
डायबिटीज और कैंसर का खतरा

अध्ययनों से पता चलता है कि हाई शुगर की समस्या के शिकार लोगों में कुछ प्रकार के कैंसर होने की आशंका अधिक देखी गई है। डायबिटीज और कैंसर के बीच एक गहरा संबंध माना जाता है।

डॉक्टर बताते हैं, जब शरीर में इंसुलिन का स्तर लगातार बढ़ा रहता है, तो यह कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि को बढ़ावा देता है। हाई शुगर कैंसर कोशिकाओं के लिए ईंधन की तरह काम करता है, जिससे ट्यूमर बनने की आशंका बढ़ सकती है। इतना ही नहीं डायबिटीज रोगियों में इंफ्लेमेशन और मोटापा की दिक्कत भी अधिक होती है, ये दोनों ही स्थितियां भी कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

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इनफर्टिलिटी की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज रोगियों में प्रजनन की दिक्कत

इसी तरह कुछ अन्य अध्ययनों की रिपोर्ट में डायबिटीज के एक और साइड-इफेक्ट को लेकर काफी चर्चा की जाती है वह है- प्रजनन की समस्या। मधुमेह पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन विकारों को बढ़ाने वाला हो सकता है। डायबिटीज के कारण हार्मोनल असंतुलन और रक्त वाहिकाओं-तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचता है, ये स्थितियां प्रजनन समस्याओं का कारण बनती हैं।

इसके अलावा महिलाओं में अक्सर ब्लड शुगर हाई रहने के कारण मासिक धर्म चक्र में अनियमित और गर्भपात का खतरा अधिक रहता है।
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शुगर को कंट्रोल रखने वाले उपाय जरूरी - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज कंट्रोल रखने वाले उपाय करें

डॉक्टर कहते हैं, हाई शुगर का असर संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ सकता है, इसके दुष्प्रभावों से बचे रहने के लिए जरूरी है कि आप अपने शुगर लेवल को कंट्रोल रखने के उपाय करते रहें। ब्लड शुगर की नियमित रूप से जांच करते रहें ताकि शुगर की स्थिति का अंदाजा हो सके। इसके साथ-साथ वजन को कंट्रोल में रखें और रोज 30-45 मिनट व्यायाम की आदत इसमें मददगार हो सकती है।
  • प्रोसेस्ड फूड्स, चीनी वाली चीजें, कोल्ड ड्रिंक्स और अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों का सेवन कम करें।
  • आहार में एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर चीजें जैसे हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज को शामिल करें।
  • शराब और धूम्रपान से दूर रहें। ये दोनों शुगर को प्रभावित करने के साथ डायबिटीज की जटिलताओं को भी बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
  • जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज की दिक्कत रही हो उन्हें अपनी सेहत को लेकर बहुत सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।


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स्रोत
Diabetes and Infertility
Diabetes and Cancer


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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