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World Diabetes Day 2025: डायबिटीज रोगी हो जाएं सावधान, शुगर कंट्रोल नहीं तो आपकी किडनी भी खतरे में

Fri, 14 Nov 2025 08:54 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • Diabetes Day 2025: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएओ) के अनुसार, दुनियाभर में करीब 30-40% डायबिटिक मरीजों में किसी न किसी रूप में किडनी की समस्या देखी जा रही है। 
  • अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों को कंट्रोल में रखना डायबिटिक नेफ्रोपैथी को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।
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डायबिटीज के कारण किडनी की बीमारी - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा है, साल-दर साल इसके मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। भारतीय आबादी में डायबिटीज का जोखिम और भी अधिक देखा जा रहा, लिहाजा भारत को अब 'डायबिटीज कैपिटल' तक कहा जाने लगा है।

भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की रिपोर्ट के अनुसार, देश में करीब 10 करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीड़ित हैं और आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ने की आशंका है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, गड़बड़ जीवनशैली डायबिटीज बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है। लंबे समय तक एक ही जगह पर बैठे रहना, शारीरिक रूप से कम मेहनत करना, जंक फूड्स का अधिक सेवन और स्ट्रेस के कारण खतरा बढ़ा है। जिन लोगों का ब्लड शुगर अक्सर बढ़ा हुआ रहता है उनमें हार्ट, तंत्रिका, आंखों के साथ किडनी पर असर पड़ सकता है।

डायबिटीज के मरीजों में किडनी की बढ़ती बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट करते हैं। आइए जानते हैं कि हाई शुगर किस तरह से किडनी की सेहत प्रभावित करती है और इससे कैसे बचा जा सकता है?
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हाई डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
हाई शुगर के कारण डायबिटीज का खतरा

डायबिटीज के बढ़ते जोखिमों के बारे में लोगों को अलर्ट करने और और इससे बचाव के तरीकों को लेकर शिक्षित करने के उद्देश्य से हर साल 14 नवंबर को वर्ल्ड डायबिटीज डे मनाया जाता है। 

अमर उजाला से बातचीत में वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ वसीम गौहरी बताते हैं, जिन लोगों का शुगर लेवल अक्सर बढ़ा हुआ रहता है उनमें किडनी की बीमारी अधिक रिपोर्ट की जाती रही है। 

जब खून में शुगर का स्तर लंबे समय तक बढ़ा रहता है, तो यह धीरे-धीरे शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है। किडनी में मौजूद ये सूक्ष्म रक्त वाहिकाएं खून को साफ करने का काम करती हैं। लेकिन जब इन पर लगातार हाई ब्लड शुगर का दबाव पड़ता है, तो वे कमजोर होकर लीक करने लगती हैं। डायबिटीज के कारण किडनी की होने वाली बीमारी को डायबिटीज नेफ्रोपैथी कहा जाता है।
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किडनी की बीमारियां - फोटो : Freepik.com
डायबिटिक नेफ्रोपैथी से करें बचाव

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएओ) के अनुसार, दुनियाभर में करीब 30-40% डायबिटिक मरीजों में किसी न किसी रूप में किडनी की समस्या देखी जाती है। 

डायबिटीज किडनी पर कई तरह से असर डालती है। जब ब्लड शुगर अधिक होती है, तो किडनी को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे समय के साथ उसकी क्षमता घटती जाती है। इसके अलावा डायबिटीज के मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर का जोखिम भी अधिक रहता है।

डायबिटीज के साथ हाई ब्लड प्रेशर की समस्या किडनी के लिए और खतरनाक हो सकती है।अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर दोनों को कंट्रोल में रखना डायबिटिक नेफ्रोपैथी को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

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किडनी को स्वस्थ रखने के करें उपाय - फोटो : Adobe stock
किन लोगों को खतरा अधिक

डॉक्टर कहते हैं, वैसे तो डायबिटीज के सभी मरीजों को किडनी की बीमारी हो ऐसा जरूरी नहीं है। हालांकि कुछ स्थितियां खतरा बढ़ा सकती हैं। 
  • जिन लोगों को लंबे समय से डायबिटीज है उनमें यह खतरा अधिक होता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर हाई रहना, धूम्रपान और मोटापा की समस्या भी जोखिमों को बढ़ा देती है। 
  • जिनके परिवार में पहले से किसी को किडनी की बीमारी रही है या डायबिटीज की हिस्ट्री रही है, उनमें भी जोखिम अधिक देखा जाता है। 
  • कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में डायबिटिक किडनी डिजीज की दर अधिक होती है।
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डायबिटीज को कंट्रोल में रखना जरूरी - फोटो : Adobe stock
डायबिटीज से किडनी को कैसे बचाया जाए?

डॉक्टर कहते हैं, किडनी को सुरक्षित रखने के लिए सबसे जरूरी है ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखें।

नमक का सेवन कम करना, धूम्रपान और अल्कोहल से दूरी बनाने के साथ रोजाना कम से कम 30 मिनट तेज वॉक करना भी जरूरी है। इसके साथ किडनी को स्वस्थ रखने के लिए आहार में हरी सब्जियां, साबुत अनाज, फाइबर युक्त फल जैसे सेब, अमरूद को शामिल करें। साल में कम से कम एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट जरूर कराएं।           



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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