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World Cancer Day 2026: क्या होता है कोलन कैंसर? पुरुषों में क्यों अधिक होता है इस कैंसर का खतरा?

Wed, 04 Feb 2026 03:58 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Cancer Day 2026 Themes: कोलन कैंसर पेट की एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण बेहद सामान्य होते हैं, जिसे अक्सर लोग पेट की छोटी समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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कोलन कैंसर - फोटो : Freepik.com
Colon Cancer Symptoms in Men: हर साल 4 फरवरी को दुनिया भर में विश्व कैंसर दिवस के रूप में मनाया जाता है, ताकि कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाई जा सके और इसकी रोकथाम व उपचार के लिए वैश्विक प्रयासों को एकजुट किया जा सके। वर्ष 2025 से 2027 के लिए तीन साल का वैश्विक अभियान का थीम 'यूनाइटेड बाय यूनिक' है। इसका उद्देश्य यह समझाना है कि कैंसर से लड़ने का लक्ष्य भले ही एक हो, लेकिन हर मरीज का अनुभव और उसकी जरूरतें अलग होती हैं।

फेफड़ों का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर जैसी कई गंभीर बीमारियों के बारे में आपने सुना होगा। मगर आज हम कैंसर के एक प्रकार के बारे में जानेंगे जिसका संबंध सीधा पेट से संबंधित है। हम बात कर रहे हैं कोलन कैंसर की। कोलन कैंसर, जिसे 'कोलोरेक्टल कैंसर' भी कहा जाता है, पाचन तंत्र के अंतिम हिस्से बड़ी आंत या मलाशय में विकसित होता है। अधिकांश मामलों में इसकी शुरुआत छोटे, गैर-कैंसरयुक्त ऊतकों के समूह से होती है जिन्हें 'पॉलीप्स' कहा जाता है। 

समय के साथ, इनमें से कुछ पॉलीप्स कैंसर का रूप ले सकते हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार भारत सहित दुनिया भर में कोलन कैंसर के मामलों में तेजी से वृद्धि हो रही है, और यह कैंसर से होने वाली मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर शुरुआती चरणों में 'स्क्रीनिंग' (जैसे कोलोनोस्कोपी) के जरिए पॉलीप्स का पता लगा लिया जाए, तो कैंसर बनने से पहले ही इन्हें हटाकर जान बचाई जा सकती है। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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कोलन - फोटो : Freepik.com
पुरुषों में कोलन कैंसर का खतरा अधिक क्यों है?
वैश्विक आंकड़ों और रिपोर्ट्स के अनुसार, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में कोलन कैंसर होने की संभावना काफी अधिक होती है। इसके पीछे मुख्य कारण जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारक हैं। पुरुष अक्सर आहार में लाल मांस और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन करते हैं, जो इस कैंसर के बड़े ट्रिगर हैं।

इसके अलावा पुरुषों में 'विसरल फैट' (पेट के आसपास की जिद्दी चर्बी) का अधिक होना और महिलाओं की तुलना में कम 'हेल्थ स्क्रीनिंग' करवाना उन्हें इस जानलेवा बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील बनाता है।

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कैंसर का खतरा - फोटो : Freepik.com
जीवनशैली की ये गलतियां बनती हैं कैंसर का कारण
कोलन कैंसर के विकास में हमारी आधुनिक जीवनशैली का सबसे बड़ा हाथ है। कम फाइबर वाला आहार, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा और शराब व धूम्रपान का अत्यधिक सेवन बड़ी आंत की परत को नुकसान पहुंचाता है।

जब हम फल और सब्जियां कम खाते हैं, तो पाचन तंत्र से कचरा धीरे-धीरे बाहर निकलता है, जिससे कैंसर पैदा करने वाले तत्व आंतों के संपर्क में अधिक समय तक रहते हैं। यह निरंतर संपर्क कोशिकाओं के डीएनए में बदलाव पैदा कर कैंसर को जन्म देता है।

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पाचन स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
इन लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज
कोलन कैंसर के लक्षण शुरुआत में बहुत सामान्य लग सकते हैं, जिससे लोग इन्हें अक्सर बवासीर या सामान्य पेट की खराबी समझ लेते हैं। अगर आपको लगातार कब्ज, दस्त, मल में खून आना, पेट में मरोड़ या बिना किसी कारण के तेजी से वजन कम होने जैसे संकेत मिल रहे हैं, तो यह कोलन कैंसर की चेतावनी हो सकती है। 45 वर्ष की आयु के बाद नियमित अंतराल पर मेडिकल चेकअप करवाना जरूरी है, क्योंकि शुरुआती स्टेज में इस कैंसर का इलाज पूरी तरह संभव है।
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जिम वर्कआउट - फोटो : Adobe Stock photo
सही आदतों से कम करें अपना जोखिम
अपनी डाइट में साबुत अनाज, फल और हरी सब्जियों को शामिल करें और सप्ताह में कम से कम 150 मिनट व्यायाम जरूर करें। धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बनाकर आप अपने जोखिम को कई गुना तक कम कर सकते हैं। ध्यान रखें कोलन कैंसर एक 'साइलेंट किलर' हो सकता है, लेकिन जागरूकता और समय पर की गई जांच आपको एक सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य दे सकती है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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