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World Brain Tumor Day 2026: अक्सर रहता है सिरदर्द, उल्टी और कमजोरी? कहीं ये ब्रेन ट्यूमर की तरफ इशारा तो नहीं

Mon, 08 Jun 2026 06:36 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ब्रेन ट्यूमर हमेशा कैंसर नहीं होता, लेकिन अगर यह बढ़ने लगे तो तेजी से मस्तिष्क के कार्यों को प्रभावित कर सकता है। कुछ मामलों में यह जेनेटिक कारणों से जुड़ा होता है, यानी परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही हो तो जोखिम थोड़ा बढ़ सकता है।
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कहीं आपको ब्रेन ट्यूमर तो नहीं? - फोटो : Amarujala.com/AI
ट्यूमर का नाम सुनते ही एक अजीब सा डर पैदा हो जाता है, और जब बात ब्रेन में ट्यूमर की हो तो फिर चिंता और भी गंभीर हो जाती है। आंकड़े बताते हैं कि भारत में ब्रेन ट्यूमर का खतरा हाल के दशकों में तेजी से बढ़ा है। हर साल इसके लगभग 40,000 नए मामले सामने आते हैं और करीब 25 हजार लोगों की इससे मौत हो जाती है। यह देश में 14वां सबसे आम कैंसर है और कैंसर से होने वाली मौतों का 11वां सबसे बड़ा कारण है। कम उम्र के लोगों में भी ये समस्या बढ़ती देखी जा रही है।

ब्रेन हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण और नाजुक हिस्सा माना जाता है। यह सिर्फ सोचने या याद रखने का काम नहीं करता, बल्कि शरीर के सारे कामकाज को भी नियंत्रित करता है। ब्रेन में असामान्य गांठ या कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि को ब्रेन ट्यूमर कहा जाता है।

डॉक्टर कहते हैं, हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता। समय पर अगर ट्यूमर का पता चल जाए तो इसके इलाज और मरीज के ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। यही कारण है कि सभी लोगों को ब्रेन ट्यूमर के लक्षणों के बारे में जरूर जानकारी होनी चाहिए।
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ब्रेन ट्यूमर की समस्या - फोटो : Freepik.com
ब्रेन ट्यूमर और इसके खतरे

लोगों में इस समस्या के बारे में जागरूकता बढ़ाने, बीमारी का जल्द पता लगाने के तरीकों के बारे में शिक्षित करने और ब्रेन ट्यूमर के मरीजों को हौंसला देने के उद्देश्य से हर साल  8 जून को 'वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे' मनाया जाता है।
 
  • मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि गड़बड़ जीवनशैली, तनाव, नींद की कमी और बढ़ते पर्यावरणीय कारकों ने ब्रेन ट्यूमर का खतरा कम उम्र वालों में भी बढ़ा दिया है। 
  • कुछ मामलों में यह जेनेटिक कारणों से जुड़ा होता है, यानी परिवार में पहले किसी को यह समस्या रही हो तो जोखिम बढ़ जाता है। 
  • सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण अक्सर सामान्य सिरदर्द, थकान या तनाव जैसी समस्याओं से मिलते-जुलते होते हैं, जिसे लोग सामान्य समझकर अनदेखा किया करते हैं। हालांकि ये गलती बड़ी समस्या का कारण बन सकती है।

आइए जान लेते हैं कि ब्रेन ट्यूमर की समय पर पहचान कैसे की जा सकती है?
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क्या आपको भी होता है बार-बार सिरदर्द? - फोटो : Freepik.com
1. अक्सर होता रहता है सिरदर्द?

ब्रेन ट्यूमर का सबसे आम संकेत लगातार सिरदर्द होना माना जाता है। यह सामान्य सिरदर्द से अलग होता है और समय के साथ बढ़ता जाता है।
 
  • अक्सर सुबह के समय ये दर्द ज्यादा तेज महसूस होता है। 
  • कई मरीजों में खांसने, झुकने या शारीरिक दबाव डालने पर भी दर्द बढ़ सकता है।
  • हालांकि हर सिरदर्द ब्रेन ट्यूमर का संकेत नहीं होता, लेकिन अगर सिरदर्द लगातार हो रहा हो या सामान्य दवाओं से ठीक नहीं हो रहा हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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आंखों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
2. सिरदर्द के साथ आंखों में भी रहती है दिक्कत?

सिरदर्द के अलावा ब्रेन ट्यूमर का आपकी आंखों और दृष्टि पर भी असर पड़ता है। इसमें मरीजों को धुंधला दिखने, डबल विजन की दिक्कत हो सकती है।
 
  • असल में ट्यूमर मस्तिष्क के उन हिस्सों पर दबाव डालता है जो दृष्टि को नियंत्रित करते हैं। 
  • कभी-कभी ऑप्टिक नर्व पर भी इसका असर पड़ सकता है, जिससे आंखों की क्षमता प्रभावित होती है।
  • अगर दृष्टि में बदलाव अचानक या लगातार हो, तो यह एक चेतावनी संकेत हो सकता है।
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उल्टी-मितली की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
3. अक्सर उल्टी-मितली की रहती है दिक्कत?

बिना कारण के अक्सर उल्टी या मितली महसूस होना भी आपके लिए अलार्मिंग हो सकता है।
 
  • मस्तिष्क के अंदर बढ़ता दबाव शरीर के उल्टी नियंत्रण केंद्र को भी प्रभावित करता है। 
  • यह सामान्य फूड पॉइजनिंग या गैस की समस्या से अलग होता है क्योंकि इसमें कोई स्पष्ट पाचन कारण नहीं मिलता।
  • अगर उल्टी बार-बार हो रही हो और उसके साथ सिरदर्द या चक्कर भी आता हो, तो ये न्यूरोलॉजिकल समस्याओं या ट्यूमर की ओर संकेत हो सकता है।
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शरीर तो नहीं हो रहा सुन्न? - फोटो : Adobe Stock
4. शरीर का कोई हिस्सा कमजोरी या सुन्न तो नहीं हो गया?

ब्रेन ट्यूमर के कारण शरीर के एक हिस्से में कमजोरी, सुन्नपन या संतुलन बिगड़ने का खतरा भी रहता है। 
 
  • मस्तिष्क हमारे शरीर की हर गतिविधि को नियंत्रित करता है।
  • अगर ट्यूमर मस्तिष्क के मोटर कंट्रोल वाले हिस्से पर दबाव डालता है, तो हाथ या पैर में कमजोरी महसूस हो सकती है। 
  • इससे चलने में लड़खड़ाहट या संतुलन न बन पाने की समस्या भी हो सकती है।
  • ये लक्षण ब्रेन स्ट्रोक में भी देखे जाते हैं, इसलिए इसे मेडिकल इमरजेंसी मानकर तुरंत डॉक्टरी सलाह लें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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