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World Brain Day 2025: मुंह की गंदगी बढ़ा रही है दिमाग के लिए खतरा, स्ट्रोक का भी हो सकते हैं शिकार

Tue, 22 Jul 2025 07:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मसूड़ों की बीमारी, दांतों की कमजोरी, ब्रश न करने की आदत और खराब मौखिक स्वास्थ्य के कारण न सिर्फ मस्तिष्क की सेहत प्रभावित हो रही है साथ ही स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ सकता है।
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मस्तिष्क से संबंधित समस्याएं - फोटो : Freepik.com
World Brain Day 2025: मस्तिष्क की सेहत का ख्याल रखना मौजूदा समय की प्रमुख आवश्यकताओं में से एक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं जिस प्रकार से अल्जाइमर-डेमेंशिया जैसी बीमारियों का जोखिम बढ़ता जा रहा है ऐसे में ब्रेन हेल्थ पर ध्यान देना और भी आवश्यक हो गया है। इस प्रकार के जोखिमों से बचे रहने के लिए कम उम्र से ही प्रयास करते रहना जरूरी है।

तंत्रिका संबंधी विकारों के बारे में जागरूकता और मस्तिष्क स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए हर साल 22 जुलाई को विश्व मस्तिष्क दिवस मनाया जाता है।

मस्तिष्क की सेहत को कई प्रकार के कारक प्रभावित कर सकते हैं, क्या आप जानते हैं कि इसमें ओरल हाइजीन की भी बड़ी भूमिका होती है? एक शोध में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया कि दांतों और मसूड़ों की साफ-सफाई और देखभाल में कमी मस्तिष्क को प्रभावित कर सकती है। 

मसूड़ों की बीमारी, दांतों की कमजोरी, ब्रश न करने की आदत और खराब मौखिक स्वास्थ्य के कारण न सिर्फ मस्तिष्क की सेहत प्रभावित हो रही है साथ ही स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ सकता है।
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ओरल हाइजीन का रखिए ख्याल - फोटो : Adobe stock photos
ओरल हाइजीन का मस्तिष्क की सेहत पर असर

अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन के अंतर्राष्ट्रीय स्ट्रोक सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए शोध के अनुसार ओरल हाइजीन का ध्यान रखना,  मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। 

गौरतलब है कि इससे पहले के भी कई अध्ययनों में ओरल हाइजीन और मस्तिष्क स्वास्थ्य की समस्या के लिंक को लेकर अलर्ट किया जाता रहा है। कुछ शोध यह भी कहते हैं कि खराब मौखिक स्वास्थ्य उच्च रक्तचाप और हृदय स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि बचपन से ही अगर ओरल हाइजीन पर ध्यान दे दिया जाए तो स्ट्रोक और मस्तिष्क की अन्य बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।


अध्ययन में क्या पता चला?

ओरल हाइजीन और मस्तिष्क स्वास्थ्य की समस्याओं के बीच लिंक को जानने के लिए यूके में साल 2014 से 2021 के बीच 40,000 वयस्कों पर यह अध्ययन किया गया। इनमें 46 प्रतिशत पुरुष प्रतिभागी थे जिनकी औसत आयु 57 वर्ष थी। इनमें से किसी को पहले स्ट्रोक नहीं हुआ था। प्रतिभागियों के मस्तिष्क की एमआरआई के माध्यम से सेहत की जांच की गई।

वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन प्रतिभागियों को आनुवंशिक रूप से कैविटी, दांत गिरने का खतरा अधिक था, उनमें साइलेंट सेरेब्रोवास्कुलर रोग का खतरा भी अधिक पाया गया। 
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ब्रेन स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Freepik.com
बढ़ जाता है स्ट्रोक का खतरा

अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को आनुवांशिक रूप से मौखिक स्वास्थ्य की समस्या थी और उनमें हाइजीन की भी दिक्कत बनी रही, उनकी एमआरआई में माइक्रोस्ट्रक्चरल डैमेज का खतरा ज्यादा पाया गया। इस तरह के डैमेज के कारण न सिर्फ मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है साथ ही यह स्ट्रोक और अन्य मानसिक स्वास्थ्य विकारों के खतरे को बढ़ाने वाली स्थिति भी मानी जाती है। 
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ओरल हाइजीन का रखिए ख्याल - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

अध्ययन लेखक साइप्रियन रिवियर कहते हैं, मौखिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना कई मामलों में आवश्यक है, यह न सिर्फ मुंह में बैक्टीरिया के विकास को रोकने में मदद करती है साथ ही मस्तिष्क को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भी यह आवश्यक है। इस अध्ययन में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि क्या खराब मौखिक स्वास्थ्य, मस्तिष्क की कार्यात्मक स्थिति को भी प्रभावित करती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि दिन में दो-तीन बार ब्रश करने की आदत बनाना न सिर्फ ओरल हाइजीन को ठीक रखने में मददगार है साथ ही इससे मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में भी मदद मिल सकती है। 



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स्रोत
Poor oral health may contribute to declines in brain health


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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