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World Alzheimer's Day: समय पर याद ही नहीं आता लोगों का नाम और जरूरी चीजें? कहीं आप एनोमिया के शिकार तो नहीं

Sat, 21 Sep 2024 11:10 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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याद न रहने की समस्या - फोटो : amarujala.com
दुनियाभर में अल्जाइमर रोग का जोखिम बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। साल 2020 के आंकड़ों के मुताबिक 55 मिलियन (5.5 करोड़) से अधिक लोग अल्जाइमर और इसके कारण होने वाली डिमेंशिया रोग के शिकार थे। यह संख्या हर दो दशकों में लगभग दोगुनी होने की आशंका जताई गई है। चीजों को भूल जाने, याददाश्त में कमी, तर्क करने की क्षमता में दिक्कत वाली ये बीमारी उम्र बढ़ने के साथ बहुत आम है।

अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसकी चुनौतियों से निपटने के उद्देश्य से हर साल 21 सितम्बर को वर्ल्ड अल्जाइमर डे मनाया जाता है। 

भूलने की समस्या, समय पर चीजों या किसी के नाम को याद न कर पाना सामान्य है। पर अगर आपको अक्सर ये दिक्कत होती रहती है, इसके कारण आपकी दैनिक गतिविधियों पर असर हो रहा है तो इसपर ध्यान दिया जाना जरूरी हो जाता है। कहीं ये किसी न्यूरो-साइकेट्रिक समस्या के कारण तो नहीं है?

लिखते-बोलते समय चीजों या लोगों का नाम न याद आने को मेडिकल की भाषा में 'एनोमिया' की दिक्कत कहा जाता है। इस विकार से पीड़ित लोगों को अक्सर ऐसा लगता है कि उनके जीभ पर ही शब्द है पर उसे व्यक्त नहीं कर पा रहे हैं। कहीं आपको या किसी जानने वाले को इस तरह की दिक्कत तो नहीं?
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याददाश्त की समस्या - फोटो : freepik.com
बोलने के लिए समय पर सही शब्द न मिल पाना

अक्सर आपने एक मशहूर भारतीय क्रिकेटर को कई इंटरव्यू के दौरान चीजों या खिलाड़ियों का नाम भूलते हुए देखा होगा। उदाहरण के लिए जैसे उन्हें बताना हो कि किसी खिलाड़ी को फील्डिंग के लिए फाइन लेग पर भेजा और उसने बेहतरनी कैच पकड़ लिया। इसे वह ऐसे बोलते दिखते हैं- मैंने उसे वहां भेजा और उसने बढ़िया कैच पड़ लिया।

हमारे आसपास भी ऐसे लोग हो सकते हैं, जिन्हें आप चीजों का नाम भूलते नोटिस तो करते हैं पर जानकारी के अभाव में इसे कभी समस्या नहीं मानते। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इसपर गंभीरता से ध्यान दिए जाने की जरूरत है। कुछ स्थितियों में ये अल्जाइमर रोग का लक्षण भी हो सकता है।
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मस्तिष्क विकार - फोटो : istock
एनोमिया की समस्या क्या है?

एनोमिया या एनोमिक अफेसिया को भाषा विकार के रूप में जाना जाता है। इसमें आपके दिमाग में चीजें तो होती हैं पर बोलने के धाराप्रवाह में उसके लिए सही शब्द नहीं मिल पाते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि स्ट्रोक, सिर में दर्दनाक चोट या ट्यूमर के कारण होने वाली ब्रेन डैमेज की समस्या इसका कारण बन सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं, एनोमिया की समस्या को मुख्यरूप से मस्तिष्क के बाएं हिस्से में होने वाली क्षति का परिणाम माना जाता है। दाएं हाथ वाले लोगों के लिए मस्तिष्क का बायां हिस्सा भाषा को नियंत्रित करने और इसके चयन में मदद करता है। हालांकि एनोमिया के लिए हर बार जरूरी नहीं है कि मस्तिष्क में चोट लगी ही हो।

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अल्जाइमर और एनोमिया का लिंक? - फोटो : istock
अल्जाइमर रोग से इसका संबंध

वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी बताते हैं, इस तरह की समस्याओं पर ध्यान देना इसलिए जरूरी है क्योंकि अल्जाइमर रोग और डिमेंशिया जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के शुरुआती चरणों में भी एनोमिया के लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा लंबे समय से तनाव के शिकार लोगों में स्ट्रोक होने का जोखिम बढ़ जाता है जो एनोमिक अपेसिया का कारण बन सकती है।

समय पर इन समस्याओं का निदान और उपचार प्राप्त करके कई तरह के न्यूरोसाइकेट्रिक विकारों के खतरे कम को करने में मदद मिल सकती है।
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एनोमिया के बारे में जानिए - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

डॉ सत्यकांत कहते हैं, अगर आपको लगता है कि आप या आपके किसी परिचित में एनोमिया के लक्षण हैं तो उन्हें उचित निदान और इलाज लेने की सलाह दें। स्पीच और विजुअल एक्शन थेरेपी आदि की मदद से इस तरह की समस्याओं में आराम पाया जा सकता है। निदान के दौरान ये भी जाना जा सकता है कि कहीं मस्तिष्क में कोई क्षति तो नहीं है?

न्यूरोसाइकेट्रिक विकारों के बढ़ते मामले गंभीर और दीर्घकालिक समस्याओं का कारण बन सकते हैं इसलिए समय रहते इनका पता करना और इलाज लेना जरूरी है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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