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Breast Cancer: ब्रेस्ट कैंसर को लेकर अब तक का सबसे बड़ा खुलासा, डॉक्टर ने बताया इस तरफ किसी का नहीं जाता ध्यान

Sat, 06 Jun 2026 07:59 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Breast Cancer Kyu Badh Raha Hai: ब्रेस्ट कैंसर के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इससे सालाना लाखों महिलाओं की मौत हो जाती है। अंतरराष्ट्रीय कैंसर सम्मेलन में कैंसर के कारणों को लेकर जो खुलासा हुआ है उसने लोगों को हैरान कर दिया है। आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
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ब्रेस्ट कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
ब्रेस्ट कैंसर दुनियाभर में तेजी से बढ़ने वाले कैंसर में से एक है। हर साल इससे करीब 7.75 लाख लोगों की मौत हो जाती है। कुछ दशकों पहले तक इस कैंसर के मामले उम्र बढ़ने के साथ देखे जाते थे, हालांकि अब कम उम्र में भी इसके मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।

स्तन में गांठ, स्तन के आकार या त्वचा के रंग में किसी तरह के बदलाव और निप्पल से असामान्य डिसचार्ज को इसका आम लक्षण माना जाता है। अध्ययनों से पता चलता है कि आनुवांशिकता के साथ महिलाओं की बगड़ती दिनचर्या और खान-पान में गड़बड़ी ने इसके खतरे को काफी बढ़ा दिया है।

क्या आपने कभी सोचा है कि कई बार आपके जीवन के बड़े फैसले सिर्फ आपकी लाइफस्टाइल या करियर को ही नहीं बल्कि सेहत को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं? हाल ही में अंतरराष्ट्रीय कैंसर सम्मेलन में सामने आई एक चौंकाने वाली चेतावनी ने पूरी दुनिया में चर्चा छेड़ दी है। इसमें कैंसर रोग विशेषज्ञों ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि जो महिलाएं बच्चे पैदा करने में देरी करती हैं, उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा काफी हद तक बढ़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह सुनने में विवादित लग सकता है, लेकिन रिपोर्ट में सामने आया है कि ब्रेस्ट कैंसर को लेकर ये बड़ा खतरा हो सकता है।


ये भी पढ़िए- (AI & Health: कैंसर से लड़ाई में स्मार्ट हथियार बना एआई, ब्रेस्ट-स्किन कैंसर का शुरुआत में ही लगा सकता है पता)
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स्तन कैंसर का बढ़ता जोखिम - फोटो : Adobe stock
देर से बच्चे पैदा करने का फैसला बढ़ा सकता है कैंसर का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, मौजूदा समय में जहां महिलाएं शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिरता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता दे रही हैं, वहीं मातृत्व को अक्सर बाद के वर्षों के लिए टाल दिया जाता है। लेकिन यह देरी शरीर की प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली पाई गई है।

इटली के गैलेरिया हॉस्पिटल में मेडिकल ऑन्कोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. एंड्रिया डेसेंसी कहते हैं, आजकल महिलाएं पहले की तुलना में बहुत देर से बच्चे पैदा करने का फैसला ले रही हैं। इसके कई नकारात्मक असर देखने को मिल रहे हैं। 
 
  • लोग इस विषय पर खुलकर बात करने से बचते हैं, लेकिन देर से गर्भधारण करना ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते मामलों के सबसे बड़े कारणों में से एक है।
  • उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब दुनियाभर में युवाओं में कैंसर के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है।


क्या है बच्चे पैदा करने का सही उम्र?

लंबे समय से स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते रहे हैं कि कम उम्र में बच्चे पैदा करने से ओवेरियन और ब्रेस्ट कैंसर से बचाव में मदद मिल सकती है। डॉ. डीसेंसी कहते हैं, बायोलॉजिकली, महिलाएं अपने पहले पीरियड के तुरंत बाद प्रेग्नेंसी के लिए तैयार हो जाती हैं।

बच्चे पैदा करने का सबसे सही समय 20 से 35 साल के बीच होता है। इसके बाद, न केवल कंसीव करना मुश्किल हो जाता है, बल्कि ब्रेस्ट कैंसर का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। डॉक्टर कहते हैं, सबसे बड़ी चिंता की बात ये है कि इस जोखिम को बारे में महिलाओं को न तो ज्यादा पता होता है और न ही इसपर बात की जाती है।
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स्तन कैंसर और इसके खतरे - फोटो : Adobe Stock Photo
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

डॉ. डीसेंसी  कहते हैं, एक समाज के तौर पर हम अब देर से बच्चे पैदा कर रहे हैं। पढ़ाई, काम और रहने-सहने का खर्च, इन सभी का असर इस बात पर पड़ता है कि महिलाएं कब बच्चे पैदा करती हैं या करती भी हैं या नहीं। उन्होंने कहा कि  जीवनशैली से जुड़े कारण जैसे कम शारीरिक गतिविधि में कमी, खराब खान-पान और मोटापा भी कैंसर के बढ़ते मामलों में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
 
  • प्रजनन, हार्मोन्स और ब्रेस्ट कैंसर के बीच जब संबंधों को समझने की कोशिश की गई तो पता चलता है कि कम उम्र में बच्चा होना कुछ हद तक आपको सुरक्षा प्रदान कर सकता है।
  • इसका एक वैज्ञानिक कारण यह माना जाता है कि जब तक महिला गर्भधारण नहीं करती, तब तक स्तन की कोशिकाएं अपेक्षाकृत अपरिपक्व और संवेदनशील रहती हैं। 
  • ये कोशिकाएं  एस्ट्रोजन हार्मोन के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं, जिससे इनके असामान्य रूप से बढ़ने और कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।
  • जब गर्भधारण सही समय पर होता है, तो ये कोशिकाएं जल्दी परिपक्व होकर अपने प्राकृतिक कार्य (दूध उत्पादन) की ओर बढ़ जाती हैं, जिससे समय के साथ कैंसर बनने का जोखिम कम हो सकता है।

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ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते खतरे - फोटो : Adobe Stock
अध्ययन में क्या पता चला?

ब्रिटिश जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जिन महिलाओं का पहला बच्चा 30 वर्ष की उम्र के बाद होता है, उनमें मेनोपॉज से पहले ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा उन महिलाओं की तुलना में 60% तक अधिक पाया गया है, जिन्होंने लगभग 22 वर्ष की उम्र में पहला बच्चा किया था।
 
  • इसके अलावा, हर गर्भधारण के साथ ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम लगभग 9% तक कम हो सकता है।
  • स्तनपान कराने को ब्रेस्ट कैंसर के जोखिमों को लेकर भी सुरक्षात्मक माना गया है।
  • रिसर्च के अनुसार, यदि कोई महिला छह महीने से अधिक समय तक स्तनपान कराती है और धूम्रपान नहीं करती, तो इससे बीमारी के होने में लगभग 10 साल तक की देरी हो सकती है।
  • स्तनपान शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के उत्पादन को कम कर सकता है। चूंकि कैंसर कोशिकाएं एस्ट्रोजन पर निर्भर होकर बढ़ती हैं, इसलिए इसका स्तर कम होना जोखिम घटा सकता है।
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ब्रेस्ट कैंसर से कैसे बचें? - फोटो : Amarujala.com/AI
ब्रेस्ट कैंसर से बचाव के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान

कैंसर रिसर्च यूके की हेल्थ इंफॉर्मेशन हेड फियोना ऑसगन कहती हैं, कैंसर एक जटिल बीमारी है और इसके जोखिम कई कारकों पर निर्भर करते हैं।
 
  • समय पर बच्चे होना ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है, लेकिन यह एक बहुत ही व्यक्तिगत निर्णय है जो कई परिस्थितियों पर निर्भर करता है। 
  • इसके अलावा भी कई ऐसे उपाय हैं जिनसे कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है।
  • धूम्रपान न करना, वजन को कंट्रोल रखना और शराब से दूरी भी ऐसे उपाय हैं जो आपको गंभीर जोखिमों से बचाए रखने में मदद कर सकते हैं।


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स्रोत:
Early periods and late childbearing increase risk of breast cancer, study confirms


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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