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Long Covid: अध्ययन में दावा- महिलाओं में पोस्ट कोविड सिंड्रोम का खतरा अधिक, ऐसे लक्षणों को लेकर बरतें सावधानी

Mon, 02 May 2022 01:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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महिलाओं में लॉन्ग कोविड का खतरा - फोटो : iStock
कोरोना का संक्रमण पिछले दो साल से अधिक समय से पूरी दुनिया के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। जिस तरह से सामने आ रहे नए वैरिएंट्स की संक्रामकता दर देखी जा रही है, वह निश्चित ही चिंता बढ़ाने वाली है। संक्रमण के साथ-साथ लॉन्ग कोविड के मामले भी रोगियों और स्वास्थ्य क्षेत्र दोनों के लिए परेशानियां बढ़ाने वाला है। कुछ अध्ययनों में यहां तक भी दावा किया जा रहा है कि पोस्ट कोविड सिंड्रोम के मामले, छह माह से लेकर एक साल तक भी बने रह सकते हैं। कुछ स्थितियों में इनके गंभीर रूप लेने का भी खतरा होता है, ऐसे में संक्रमण से ठीक हो जाने के बाद भी सभी लोगों को अपने लक्षणों की निगरानी करते रहना चाहिए।

देश में अब तक आई कोरोना संक्रमण की तीन लहरों में संक्रमितों और लॉन्ग कोविड रोगियों की बढ़ती संख्या स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ा चैलेंज है। लॉन्ग कोविड के रूप में  ब्रेन फॉग से लेकर हृदय और फेफड़े की समस्या और बालों के झड़ने से लेकर महीनों तक स्वाद और गंध न आने जैसी दिक्कतें देखने को मिली हैं। शोध बताते हैं कि लगभग सभी उम्र के लोगों में लॉन्ग कोविड का खतरा हो सकता है।

वहीं एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में लॉन्ग कोविड सिंड्रोम का खतरा अधिक होता है, साथ ही उनमें लक्षणों के गंभीर रूप लेने की आशंका भी बढ़ जाती है। आइए इस शोध के बारे में आगे विस्तार से समझते हैं। 
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पोस्ट कोविड की समस्याएं - फोटो : iStock
महिलाओं में लॉन्ग कोविड  का खतरा अधिक

जर्नल ऑफ विमेन हेल्थ में पीयर-रिव्यू शोध के मुताबिक पुरुषों की तुलना में महिलाओं  में लॉन्ग कोविड के लक्षण होने का खतरा अधिक हो सकता है। संक्रमण से ठीक हो चुकी महिलाओं में थकान, सीने में दर्द, भोजन को निगलने में कठिनाई जैसी समस्याओं का जोखिम अधिक देखा गया है।

कोविड-19 के प्रभावों को लेकर हुए इससे पहले के शोध में बताया गया था कि वैसे तो महिलाओं में कोरोना संक्रमण होने या गंभीर रोग विकसित होने का खतरा कम होता है, हालांकि अगर इनमें संक्रमण हो जाए तो पोस्ट कोविड की समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
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पोस्ट कोविड की समस्याओं का जोखिम - फोटो : iStock
लॉन्ग कोविड का जोखिम

इसी तरह लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक अन्य अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि महिलाओं में संक्रमण से ठीक होने के बाद पोस्ट कोविड की समस्याओं का जोखिम अधिक हो सकता है। इतना ही नहीं अगर समय पर प्रभावी उपचार न मिल पाए तो महिलाओं में लॉन्ग कोविड के लक्षण भी गंभीर हो सकते हैं, जो दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को बढ़ावा दे सकते हैं।

यूके शोधकर्ताओं के मुताबिक कोविड-19 के कारण अस्पताल में भर्ती रह चुके दो-तिहाई से अधिक लोग अभी भी लॉन्ग कोविड के लक्षणों के शिकार हैं। इसमें महिलाओं और अधिक वजन वाले लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है।

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पोस्ट कोविड के लक्षणों को पहचानिए - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?

इस शोध के लिए 2,300 से अधिक लोगों को शामिल किया गया, ये सभी संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती रह चुके थे। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि संक्रमण से ठीक होने के पांच महीने बाद केवल 26 फीसदी लोग पूरी तरह से ठीक हो पाए हैं, जबकि करीब 29 फीसदी लोगों को ठीक होने में एक साल से अधिक का समय लगा। अध्ययन के मुताबिक, पुरुषों की तुलना में महिलाओं के जल्दी पूरी तरह ठीक होने की संभावना 33 फीसदी कम पाई गई। 
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महिलाओं में पोस्ट कोविड का अधिक जोखिम - फोटो : iStock
इन लक्षणों के मामले अधिक

शोधकर्ताओं ने पाया कि लॉन्ग कोविड के शिकार लोगों में सांस फूलना, थकान, मांसपेशियों में दर्द, नींद की समस्या, अंगों की कमजोरी और मानसिक स्वास्थ्य की दिक्कतें अधिक देखने को मिलती हैं। महिलाओं में यह लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि तेजी से बढ़ते संक्रमण और लॉन्ग कोविड को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की तत्काल आवश्यकता थी। कुछ लक्षण समय के साथ गंभीर भी हो सकते हैं, जिनमें विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
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महिलाओं को विशेष सावधानी की जरूरत - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अध्ययन के निष्कर्ष के आधार पर शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रारंभिक संक्रमण के लगभग 90 दिनों के बाद तक कोरोनावायरस के लक्षण बने रहने की स्थिति लॉन्ग कोविड का संकेत है। इस अध्ययन से पता चलता कि अस्पताल में भर्ती रह चुके लोगों में हल्के से लेकर गंभीर लक्षण हो सकते हैं, जिनमें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।

संक्रमण से ठीक हो जाने के बाद भी स्वास्थ्य को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। महिलाओं में लॉन्ग कोविड का खतरा अधिक क्यों होता है, इसे समझने के लिए अध्ययन जारी हैं। 

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स्रोत और संदर्भ
Clinical characteristics with inflammation profiling of long COVID and association with 1-year recovery following hospitalisation in the UK: a prospective observational study

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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