जैसे-जैसे सर्दी बढ़ रही है, अस्पतालों और फिजियोथेरेपी क्लीनिकों में जोड़ों की जकड़न, मांसपेशियों के दर्द और खिंचाव की शिकायत वाले मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। असल में, सर्दियों में मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे दर्द और अकड़न बढ़ती है। यह मौसमी समस्या आम है, लेकिन समय पर देखभाल, नियमित व्यायाम, हल्की स्ट्रेचिंग, पर्याप्त गरमाहट और संतुलित आहार को दिनचर्या में शामिल कर इस परेशानी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
क्यों बढ़ता है दर्द
ठंड बढ़ते ही दर्द और अकड़न इसलिए बढ़ती है, क्योंकि इसका सीधा असर मांसपेशियों, जोड़ों और रक्त संचार पर पड़ता है। सर्द मौसम में रक्त वाहिनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह धीमा पड़ता है और जोड़ों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। इसी वजह से अकड़न और जकड़न महसूस होती है।
असल में, शरीर खुद को गरम रखने के लिए मांसपेशियों को सख्त कर लेता है और यही सख्तपन बाद में दर्द, खिंचाव और कठोरता का कारण बनता है। वहीं जिन लोगों को गठिया या पुरानी चोटों की समस्या होती है, उन्हें सर्दियों में यह दर्द और अधिक महसूस होता है। इसके अलावा ठंड में शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो जाती हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर और जोड़ों में अकड़न बढ़ना लाजमी है। वहीं धूप की कमी के कारण शरीर में विटामिन डी का स्तर भी काफी घट जाता है, जिससे हड्डियों और जोड़ों की स्थिति प्रभावित होती है और दर्द बढ़ने लगता है।