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Winter Health Tips: सर्दी में जोड़ों का दर्द बढ़ने से कैसे बचें? अपनाएं ये 7 जरूरी आदतें

Thu, 18 Dec 2025 11:47 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सर्दियों में पुरानी चोटें और दर्द अक्सर उभर आते हैं, जिससे रोजमर्रा के कार्य करना भी मुश्किल हो जाता हैं। ऐसे समय में दिनचर्या में किए गए छोटे बदलाव सबसे बड़ी राहत बनते हैं।
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सर्दियों में जोड़ो का दर्द क्यों बढ़ जाता है - फोटो : istock
जैसे-जैसे सर्दी बढ़ रही है, अस्पतालों और फिजियोथेरेपी क्लीनिकों में जोड़ों की जकड़न, मांसपेशियों के दर्द और खिंचाव की शिकायत वाले मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। असल में, सर्दियों में मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे दर्द और अकड़न बढ़ती है। यह मौसमी समस्या आम है, लेकिन समय पर देखभाल, नियमित व्यायाम, हल्की स्ट्रेचिंग, पर्याप्त गरमाहट और संतुलित आहार को दिनचर्या में शामिल कर इस परेशानी को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

क्यों बढ़ता है दर्द

ठंड बढ़ते ही दर्द और अकड़न इसलिए बढ़ती है, क्योंकि इसका सीधा असर मांसपेशियों, जोड़ों और रक्त संचार पर पड़ता है। सर्द मौसम में रक्त वाहिनियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे रक्त प्रवाह धीमा पड़ता है और जोड़ों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। इसी वजह से अकड़न और जकड़न महसूस होती है।

असल में, शरीर खुद को गरम रखने के लिए मांसपेशियों को सख्त कर लेता है और यही सख्तपन बाद में दर्द, खिंचाव और कठोरता का कारण बनता है। वहीं जिन लोगों को गठिया या पुरानी चोटों की समस्या होती है, उन्हें सर्दियों में यह दर्द और अधिक महसूस होता है। इसके अलावा ठंड में शारीरिक गतिविधियां काफी कम हो जाती हैं, जिससे मांसपेशियां कमजोर और जोड़ों में अकड़न बढ़ना लाजमी है। वहीं धूप की कमी के कारण शरीर में विटामिन डी का स्तर भी काफी घट जाता है, जिससे हड्डियों और जोड़ों की स्थिति प्रभावित होती है और दर्द बढ़ने लगता है।
 
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मॉर्निंग वॉक - फोटो : Adobe Stock
कैसे पाएं राहत

दर्द से बचने के लिए सर्दियों में शरीर को सक्रिय रखना सबसे जरूरी है। इसलिए सुबह हल्का वार्म अप करें।
  • रोज 5-10 मिनट की हल्की एक्सरसाइज दिन भर की जकड़न को कम कर सकती है।
  • ठंड से घुटनों, पीठ और गर्दन का बचाव करें और उन्हें गर्माहट देने वाले कपड़े पहनें।
  • मांसपेशियों को आराम देने और रक्त प्रवाह बढ़ाने के लिए गरम पानी से स्नान या गर्म सेक करें।
  • लंबे समय तक एक ही स्थान पर न बैठें। हर 30-40 मिनट बाद उठकर स्ट्रेचिंग करें।
  • आपके लिए टहलना, योग और हल्की स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज बेहद फायदेमंद साबित होंगी।
  • साथ ही सबसे जरूरी है पर्याप्त पानी पीना, क्योंकि शरीर में पानी की कमी मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ाती है।
  • जब भी धूप खिली हो तो धूप लें, क्योंकि विटामिन डी की उचित मात्रा जोड़ों के लिए बहुत जरूरी है।
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जोड़ों में दर्द की समस्या - फोटो : Adobe
मदद लें

अगर दर्द और जकड़न आपकी रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करने लगें तो फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह लेना जरूरी है। विशेष रूप से तब, जब सुबह उठने पर घंटों तक अकड़न बनी रहे, चलना-फिरना या सीढ़ियां चढ़ना दर्द के कारण कठिन हो जाए या गठिया का दर्द सर्दियों में बढ़ जाए। यदि जोड़ों में सूजन, गर्माहट, हल्की लालिमा, लगातार थकान, मांसपेशियों में खिंचाव, पकड़ने या वजन उठाने में कमजोरी महसूस हो तो इसे अनदेखा न करें। ठंड में बढ़ते ये लक्षण शरीर में सूजन और कठोरता के संकेत हो सकते हैं, जिन का समय पर उपचार बेहद आवश्यक है।
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हल्की स्ट्रेचिंग  - फोटो : Adobe Stock
हल्की स्ट्रेचिंग 

सर्दियों की जकड़न भले आपको सामान्य लगे, लेकिन इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। ठंड के मौसम में सही व्यायाम, नियमित फिजियोथेरेपी और कुछ आसान आदतें अपनाकर आप पूरे मौसम दर्द और अकड़न से काफी हद तक बच सकती हैं। जोड़ों की उचित देखभाल, जैसे हल्की स्ट्रेचिंग, गर्माहट बनाए रखना और शरीर को सक्रिय रखना सर्दियों की दिनचर्या का जरूरी हिस्सा होना चाहिए। समय पर ध्यान देने से भविष्य की गंभीर समस्याओं से बचा जा सकता है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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