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Health Tips: सर्दियों में क्रॉनिक कब्ज से आराम पाने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय, मिलेगी तुरंत राहत

Fri, 02 Jan 2026 04:45 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Constipation In Winter: कब्ज एक ऐसी समस्या है, जिससे अधिकतर लोग परेशान रहते हैं। सर्दियों में कब्ज से राहत पाने के लिए लोग तरह तरह के उपाय करते हैं, मगर फिर भी पूरी तरह आराम नहीं पाते हैं। इसलिए आइए इस लेख में डॉक्टर से बिना दवा के कब्ज को दूर करने के उपाय जानते हैं।
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कब्ज की समस्या - फोटो : Amar Ujala
Doctor Approved Constipation Remedies: उत्तर भारत में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इसी के साथ ही पाचन संबंधी समस्याएं, विशेषकर क्रोनिक कब्ज के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सर्दियों के मौसम में कब्ज की समस्या में लगभग 30-40% तक की वृद्धि देखी जाती है। इसके पीछे कई वैज्ञानिक और व्यवहारिक कारण हैं।

ठंड के कारण हमारी शारीरिक सक्रियता कम हो जाती है, जिससे आंतों की गतिशीलता धीमी पड़ जाती है। इसके अलावा, प्यास कम लगने के कारण हम पानी का सेवन बहुत कम कर देते हैं, जो मल को कठोर बना देता है। साथ ही सर्दियों में भारी और तैलीय भोजन का सेवन बढ़ जाता है, जिसे पचाना शरीर के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।

इन सभी कारणों से पेट साफ न होने, गैस और पेट फूलने की समस्या बनी रहती है। इसी विषय पर डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ बेहद प्रभावी और आसान घरेलू उपाय साझा किए हैं, जो भीषण ठंड में भी आपके पाचन तंत्र को सुचारू बनाए रख सकते हैं। आइए इस लेख में उन्हीं उपायों के बारे में एक-एक करके जानते हैं।
 
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पीने का पानी - फोटो : Adobe Stock
सुबह की शुरुआत गुनगुने पानी से करें
डॉ. सोलंकी के अनुसार कब्ज से राहत पाने का सबसे पहला और प्रभावी नियम है, सुबह उठते ही एक गिलास गुनगुना पानी पीना। ठंड में आंतों की मांसपेशियां संकुचित हो जाती हैं। गुनगुना पानी इन मांसपेशियों को रिलैक्स करता है और शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है। यह एक 'नेचुरल स्टिमुलेटर' की तरह काम करता है, जिससे सुबह पेट आसानी से साफ हो जाता है।

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चिया सिड्स - फोटो : Adobe Stock
दैनिक फाइबर त्रिकोण का पालन
पाचन को दुरुस्त रखने के लिए डॉ. सोलंकी 'फाइबर त्रिकोण' अपनाने की सलाह देती हैं। इसमें हर दिन एक ताजा फल, एक कटोरी हरी सब्जी और थोड़े भिगोए हुए बीजों (जैसे चिया या अलसी) का सेवन अनिवार्य है। फाइबर मल को सॉफ्ट और बल्की बनाता है, जिससे वह आंतों में फंसता नहीं है और बिना किसी रुकावट के बाहर निकल जाता है।

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नट्स और दूध - फोटो : Freepik.com
दूध और घी का मेल
क्रोनिक कब्ज के लिए रात को सोने से पहले एक गिलास गाय के दूध में एक चम्मच घी मिलाकर पीना सबसे उत्तम है। यह आंतों में लुब्रिकेशन (चिकनाई) पैदा करता है। अगर आप लैक्टोज इंटॉलरेंट हैं, तो आप एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच घी मिलाकर ले सकते हैं। यह उपाय अगली सुबह बिना किसी जोर के पेट साफ करने में चमत्कारिक रूप से मदद करता है।
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इसबगोल - फोटो : Adobe Stock
स्टूल सॉफ्टनिंग फूड और इसबगोल
आहार में सुधार करते हुए डॉ. सोलंकी मूंग की दाल और दलिया जैसे 'स्टूल सॉफ्टनिंग फूड' लेने की सलाह देती हैं। ये खाद्य पदार्थ पचने में हल्के होते हैं और पेट पर अतिरिक्त दबाव नहीं डालते। अगर कब्ज बहुत पुराना है, तो रात को सोने से पहले इसबगोल की भूसी का सेवन भी किया जा सकता है, जो आंतों की सफाई के लिए प्राकृतिक झाड़ू की तरह काम करता है।
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धूप में समय - फोटो : Freepik.com
मील के बाद टहलना है अनिवार्य
सिर्फ सही खाना ही काफी नहीं है, बल्कि उसे पचाना भी जरूरी है। डॉ. सोलंकी का पांचवां सुझाव है कि रात के खाने के बाद 10-15 मिनट जरूर टहलें। ठंड में लोग खाना खाकर तुरंत रजाई में दुबक जाते हैं, जिससे खाना ठीक से नहीं पचता। खाने के बाद वज्रासन में बैठना या थोड़ी देर टहलना मेटाबॉलिज्म को सक्रिय रखता है, जिससे सुबह मल त्याग में कोई कठिनाई नहीं होती।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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