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Vitamin D: सर्दियों में क्यों घटने लगता है ‘सनशाइन विटामिन’? जानिए क्या होते हैं इसके नुकसान

Tue, 04 Nov 2025 07:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों में पहले से विटामिन डी की कमी होती है उनके लिए सर्दियों का ये मौसम चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आइए जानते हैं कि सर्दियों में विटामिन-डी की कमी क्यों हो जाती है और इससे निपटने के लिए क्या किए जाने चाहिए?
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विटामिन-डी की कमी - फोटो : Freepik.com
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खान-पान में सुधार करना बहुत जरूरी हो जाता है। भोजन की थाली में उन चीजों को अधिक से अधिक शामिल किया जाना चाहिए जिससे शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों की आसानी से पूर्ति की जा सके। अच्छी सेहत के लिए प्रोटीन-विटामिन्स सहित कई प्रकार के पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है, विटामिन-डी उनमें से एक है।

हड्डियों को मजबूत रखने, इम्युनिटी पावर बढ़ाने के साथ विटामिन-डी हमारे लिए कई कारणों से जरूरी है। पर क्या आप जानते हैं कि सर्दियों के मौसम में इस विटामिन की कमी हो जाती है, जो कई बीमारियों के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों में पहले से विटामिन डी की कमी होती है उनके लिए सर्दियों का ये मौसम चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आइए जानते हैं कि सर्दियों में विटामिन-डी की कमी क्यों हो जाती है और इससे निपटने के लिए क्या किए जाने चाहिए?
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सर्दियों में विटामिन-डी की कमी - फोटो : Adobe
सर्दियों में विटामिन-डी की कमी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर लोगों का मानना है कि सर्दियों में धूप कम होती है इसलिए विटामिन-डी की कमी हो जाती है, ये सच है पर विटामिन-डी की कमी के लिए बस यही कारण जिम्मेदार नहीं है।

सर्दियों में गतिहीन जीवनशैली, दिनभर ऑफिस में बैठे रहना, विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों का कम सेवन करना भी इसका कारण हो सकता है। चूंकि विटामिन डी शरीर में पोषक तत्वों के अवशोषण और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार है, इसलिए इस महत्वपूर्ण विटामिन की कमी से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और मेटाबॉलिज्म स्वास्थ्य में गिरावट आ सकती है। 

इतना ही नहीं जब शरीर में विटामिन-डी का स्तर गिरता है तो मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है।
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विटामिन डी की कमी से क्या दिक्कतें होती हैं - फोटो : Adobe Stock Images
कितनी मात्रा में विटामिन-डी जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वयस्कों को रोजाना 600-800 IU (15-20 माइक्रोग्राम) जबकि बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को 1000 IU तक विटामिन-डी की जरूरत होती है। धूप में समय बिताना (सुबह 7 से 9 बजे तक 15-20 मिनट), फोर्टिफाइड मिल्क, दही और साबुत अनाज, अंडे और फैटी फिश से इसकी पूर्ति की जा सकती है।

जिन लोगों में विटामिन-डी की कमी होती है उनमें कई तरह की दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। 

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हड्डियों की बीमारी - फोटो : Freepik.com
ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा
  • विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है। इसकी कमी से शरीर कैल्शियम को सही तरह से उपयोग नहीं कर पाता, जिससे हड्डियां कमजोर होकर टूटने लगती हैं। लंबे समय तक इस विटामिन की कमी रहने पर ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याएं हो सकती है, जिसमें हड्डियां खोखली हो जाती हैं। महिलाओं में रजोनिवृत्ति के बाद यह समस्या बढ़ जाती है।

मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी
  • विटामिन-डी मांसपेशियों के संकुचन और शक्ति को बनाए रखता है। इसकी कमी से आपको लगातार थकान, पैरों में दर्द या चलने में दिक्कत महसूस हो सकती है। बुजुर्गों में इसकी कमी गिरने या मांसपेशियों में ऐंठन का कारण बनती है।
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इम्युनिटी कमजोर होने की समस्या - फोटो : Adobe stock photos
इम्युनिटी की समस्या
  • शोध बताते हैं कि विटामिन-डी शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए जरूरी है। इसकी कमी से सर्दी-जुकाम, फ्लू, संक्रमण और ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि आप सर्दियों में ज्यादा बीमार पड़ते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर 
  • विटामिन-डी दिमाग में सेरोटोनिन और डोपामिन जैसे हार्मोन्स को नियंत्रित करता है। इसकी कमी से मूड स्विंग, उदासी या डिप्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। खासतौर पर ठंड के मौसम में जब धूप कम मिलती है, तब सीजनल डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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