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Uric Acid: क्या आपका यूरिक एसिड लेवल भी बढ़ गया है? ये दो उपाय दूर कर सकते हैं आधी समस्या

Sun, 26 Jul 2026 08:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक प्राकृतिक अपशिष्ट पदार्थ है, जो प्यूरीन नामक तत्व के टूटने पर बनता है। यही अगर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए तो चलना-फिरना तक मुश्किल कर सकता है।
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यूरिक एसिड की समस्या - फोटो : Amar Ujala
हमारा शरीर हर दिन कई ऐसे रसायन बनाता है, जिसकी थोड़ी-सी मात्रा सामान्य मानी जाती है, लेकिन यही अगर जरूरत से ज्यादा बढ़ जाए तो कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। यूरिक एसिड इसका उदाहरण है। बड़ी संख्या में लोग यूरिक एसिड की समस्या से पीड़ित देखे जा रहे हैं।

डॉक्टर कहते हैं, खराब जीवनशैली, फास्ट फूड, रेड मीट, मीठे पेय, शराब के सेवन और शारीरिक गतिविधियों में कमी ने हाई यूरिक एसिड के मामलों को काफी बढ़ा दिया है। शुरुआती दौर में इसका कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलता, इसलिए ज्यादातर लोग इस समस्या से अनजान रहते हैं। लेकिन जब जोड़ों में तेज दर्द, सूजन, अकड़न या बार-बार दर्द के दौरे शुरू होते हैं, तब तक शरीर में यूरिक एसिड काफी बढ़ चुका होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि यूरिक एसिड अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, लेकिन इसका बढ़ा हुआ स्तर कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है।
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यूरिक एसिड बढ़ने से क्या होता है? - फोटो : Freepik.com
हाई यूरिक एसिड की समस्या

यूरिक एसिड शरीर में बनने वाला एक प्राकृतिक अपशिष्ट पदार्थ है, जो प्यूरीन नामक तत्व के टूटने पर बनता है। प्यूरीन हमारे शरीर की कोशिकाओं के साथ-साथ कई खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों में भी स्वाभाविक रूप से मौजूद होता है। 
 
  • सामान्य परिस्थितियों में किडनी अतिरिक्त यूरिक एसिड को छानकर पेशाब के जरिए शरीर से बाहर निकाल देती है। 
  • लेकिन जब शरीर जरूरत से ज्यादा यूरिक एसिड बनाने लगे या किडनी इसे प्रभावी ढंग से बाहर न निकाल पाए, तो इसकी मात्रा खून में बढ़ने लगती है। 

लंबे समय तक हाई यूरिक एसिड रहने पर गठिया (गाउट), जोड़ों में दर्द, उंगलियों में सूजन और किडनी स्टोन जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए खानपान और जीवनशैली में सुधार करके इसे नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है।
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किडनी स्टोन की दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
गाउट-जोड़ों में दर्द की दिक्कत

खून में यूरिक एसिड का स्तर सामान्य से अधिक होने की स्थिति को हाइपरयूरिसीमिया कहा जाता है। इस स्थिति में यूरिक एसिड छोटे-छोटे क्रिस्टल का रूप ले सकता है, जो धीरे-धीरे जोड़ों में जमा होने लगते हैं। इसके कारण गाउट, जोड़ों में तेज दर्द, सूजन और अकड़न जैसी परेशानियां हो सकती हैं। यही क्रिस्टल किडनी में जमा होकर पथरी बनने और किडनी से जुड़ी अन्य समस्याओं का कारण भी बन सकते हैं।
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डाइट का रखें ध्यान - फोटो : Adobe Stock
  • खान-पान में कर लें सुधार

प्यूरीन से भरपूर खाद्य पदार्थ शरीर में यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकते हैं। इसलिए यदि यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, तो बियर और अन्य मादक पेय, रेड मीट, अधिक वसा वाले डेयरी उत्पाद तथा प्यूरीन से भरपूर अन्य खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना फायदेमंद माना जाता है। संतुलित और पौष्टिक आहार अपनाने से यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है।
 
  • वजन नियंत्रित रखना भी है जरूरी

बढ़ता हुआ वजन यूरिक एसिड और गाउट दोनों के जोखिम को बढ़ा सकता है। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में गाउट की संभावना अधिक होती है। ऐसे में स्वस्थ वजन बनाए रखना न केवल यूरिक एसिड को नियंत्रित रखने में मदद करता है, बल्कि डायबिटीज, हृदय रोग और अन्य मेटाबॉलिक बीमारियों के खतरे को भी कम करने में सहायक हो सकता है। नियमित व्यायाम और संतुलित आहार इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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