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Alert: सेहत के लिए फायदेमंद सप्लीमेंट्स कहीं कर न दें बीमार? आपकी ये गलती पड़ सकती है भारी

Tue, 06 Jan 2026 08:47 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • विटामिन, मिनरल, प्रोटीन पाउडर और मल्टीविटामिन को लोग सेहतमंद रहने का आसान उपाय मानते हैं। डॉक्टर भी कई मामलों में सप्लीमेंट्स की सलाह देते हैं, खासकर तब जब शरीर में किसी खास पोषक तत्व की कमी पाई जाए।
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सप्लीमेंट्स लेते हैं तो सावधान - फोटो : Freepik.com
आजकल हेल्थ और फिटनेस के नाम पर विटामिन सप्लीमेंट्स लेना एक आम ट्रेंड बन चुका है। सोशल मीडिया, फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स और ऑनलाइन विज्ञापनों को देखकर लोग बिना डॉक्टर की सलाह के तरह-तरह के सप्लीमेंट्स खरीदकर सेवन करने लगते हैं।

ज्यादातर लोगों का मानना है कि सप्लीमेंट्स सिर्फ फायदे ही पहुंचाते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि इनकी जरूरत से ज्यादा खुराक यानी ओवरडोज गंभीर रूप से नुकसानदायक हो सकती है। कुछ मामलों में तो यह स्थिति जीवन के लिए भी घातक साबित हो सकती है।

आजकल सेहत को लेकर जागरूकता काफी बढ़ गई है। इसी चक्कर में लोग इंटरनेट पर देखे वीडियो या किसी की सलाह पर सप्लीमेंट्स रोजाना खाना शुरू कर देते हैं। ऐसा करते हुए उनके मन में यही विचार होता है कि विटामिन्स या हर्बल चीजें नुकसान नहीं पहुंचाएंगी। यदि आप बिना डॉक्टरी सलाह या जांच के सप्लीमेंट्स का सेवन शुरू कर देते हैं और शरीर में इसकी अधिकता हो जाती है तो इससे नुकसान हो सकते हैं। कोई भी सप्लीमेंट्स लेने से पहले चिकित्सक की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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विटामिन सप्लीमेंट्स के नुकसान - फोटो : freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

सफदरजंग अस्पताल दिल्ली में कम्युनिटी मेडिसिन के निदेशक-प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर कहते हैं, अक्सर लोग यह सोच लेते हैं कि मल्टीविटामिन की गोलियां उनकी सारी पोषण संबंधी जरूरतें पूरी कर देंगी। जबकि हकीकत यह है कि शरीर केवल विटामिनों से नहीं चलता। शरीर को रोजाना मिनरल्स, प्रोटीन, फैट, कार्ब, एंटीऑक्सीडेंट, फाइबर और पर्याप्त पानी की भी जरूरत होती है।

अगर कोई व्यक्ति सिर्फ मल्टीविटामिन पर निर्भर हो जाए और संतुलित आहार को नजरअंदाज करे, तो इससे शरीर में अन्य जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। इसका असर दिल, किडनी और लिवर पर पड़ सकता है।

कभी भी एक ही समय पर दो सप्लीमेंट्स नहीं लेना चाहिए। आपको बिना डॉक्टर की सलाह के कुछ भी नहीं लेना चाहिए। ऐसे आहार जिसमें सब्जी एवं दाल की मात्रा अधिक हो का सेवन करें, जो शरीर के लिए जरूरी सभी पोषक तत्वों की पूर्ति कर सके।  
 
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कैल्शियम की कमी कैसे दूर करें - फोटो : Freepik.com
विटामिन डी वाले सप्लीमेंट्स

विटामिन डी को लोग अक्सर पूरी तरह सुरक्षित मानते हैं, लेकिन यह वसा में घुलनशील विटामिन है। इसका मतलब है कि यह शरीर में जमा हो सकता है और ज्यादा मात्रा में लेने पर आसानी से बाहर नहीं निकलता। विटामिन डी की अधिकता से मांसपेशियों में दर्द, मूड स्विंग्स, किडनी स्टोन और पेट में तेज दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में दिल की आर्टरीज में कैल्सिफिकेशन यानी कैल्शियम का जमाव हो सकता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बन सकता है। 

दूसरी ओर, विटामिन ए, डी, ई और के वसा में घुलनशील होते हैं। ये भी शरीर में स्टोर हो जाते हैं। अगर इन्हें लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा लिया जाए, तो ये शरीर में जमा होकर गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकते हैं।

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खुद से न लें कोई भी दवा - फोटो : Adobe Stock Images
कैल्शियम  सप्लीमेंट्स को लेकर सावधानियां

कैल्शियम हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है, लेकिन प्रतिदिन 2,500 मिलीग्राम से ज्यादा कैल्शियम का सेवन नुकसानदायक हो सकता है। जरूरत से ज्यादा कैल्शियम आर्टरीज में प्लाक जमा कर उन्हें सख्त बना देता है। इससे रक्त संचार प्रभावित होता है और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।
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दवाओं के दुरुपयोग हो सकते हैं खतरनाक - फोटो : Freepik.com
मैग्नीशियम और आयरन का जोखिम

मैग्नीशियम मांसपेशियों और नर्व सिस्टम के सही कामकाज में मदद करता है, लेकिन इसकी ओवरडोज उन लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है, जिनकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है। किडनी के कमजोर होने पर मैग्नीशियम शरीर में जमा होने लगता है इससे मतली, ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना और गंभीर किडनी समस्याएं हो सकती हैं।

इसी तरह आयरन की कमी से एनीमिया होता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा आयरन लेने से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। अधिक आयरन शरीर में फ्री रेडिकल्स बनाकर दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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