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Sedentary Lifestyle: नहीं करते हैं व्यायाम तो हो जाइए सावधान, एक महीने में ही बढ़ जाता है इन समस्याओं का खतरा

Sun, 28 Jul 2024 04:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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व्यायाम न करने के नुकसान - फोटो : istock
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए पौष्टिक आहार के साथ नियमित रूप से व्यायाम की आदत बनाना भी बहुत जरूरी माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर सिर्फ नियमित रूप से 30 मिनट व्यायाम की आदत बना ली जाए तो इससे कई प्रकार की क्रोनिक और मेटाबॉलिज्म से संबंधित बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है। योग-व्यायाम और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने के कई सारे लाभ हैं।

हालांकि ऑफिस जाने वाले लोग या घरेलू महिलाओं में सेंडेंटरी लाइफस्टाइल की समस्या काफी तेजी से बढ़ती देखी जा रही है। सेडेंटरी लाइफस्टाइल यानी कि निष्क्रिय जीवनशैली होना, जैसे एक ही स्थान पर लंबे समय तक बैठे रहने, दिन का अधिकतर समय लेटे-लेटे बिताने जैसी आदतें गंभीर रोगों का खतरा बढ़ा देती हैं।

आइए जानते हैं कि ये आदतें शरीर को किस प्रकार से नुकसान पहुंचाती हैं?
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निष्क्रिय जीवनशैली - फोटो : istock
सेंडेंटरी लाइफस्टाइल और इसके नुकसान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वयस्कों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर व्यायाम का चयन करके नियमित इसका अभ्यास करना चाहिए। सेंडेंटरी लाइफस्टाइल से बचना कई तरह की बीमारियों से सुरक्षित रहने के लिए सबसे आवश्यक माना जाता है।

व्यायाम न करने के कई तरह के प्रतिकूल स्वास्थ्य प्रभाव होते हैं, जिनमें वजन बढ़ना, हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज, मांसपेशियों की कमजोरी और मानसिक स्वास्थ्य की समस्या शामिल है। आइए जानते हैं कि सिर्फ कुछ महीने ही व्यायाम न करने का स्वास्थ्य पर किस तरह से असर हो सकता है?
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वजन बढ़ने का खतरा - फोटो : Freepik
वजन बढ़ने और मोटापे का हो सकता है खतरा

शारीरिक निष्क्रियता का सबसे पहला असर आपके वजन पर होता है। व्यायाम न करने से कैलोरी बर्न नहीं होने पाती है और इस दौरान भोजन से मिल रही अतिरिक्त कैलोरी वसा के रूप में जमा होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप वजन बढ़ सकता है और मोटापे का खतरा बढ़ जाता है। एक महीने भी शारीरिक निष्क्रियता या व्यायाम की कमी के कारण आपका वजन बढ़ सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ वजन बढ़ने की समस्या को हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज सहित कई तरह की क्रोनिक बीमारियों का कारण मानते हैं।

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ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : Freepik
ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का जोखिम

गतिहीन जीवनशैली के कारण शरीर में रक्त का परिसंचरण बिगड़ने लगता है। इसके अलावा रक्तचाप और बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ने लग जाता है जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। व्यायाम की कमी के कारण होने वाले ये परिवर्तन एथेरोस्क्लेरोसिस (धमनियों का सख्त होना) का भी खतरा बढ़ा देते हैं जिससे दिल के दौरे, स्ट्रोक और अन्य हृदय रोगों का जोखिम भी हो सकता है।

यही कारण है कि नियमित व्यायाम करने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने वालों में ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारियों का जोखिम कम देखा जाता है।
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इम्युनिटी सिस्टम की कमजोरी - फोटो : istock
कमजोर होने लगती है इम्युनिटी

नियमित व्यायाम और शारीरिक गतिविधि शरीर में रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देकर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में भी मदद करती है। अगर आप सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के शिकार हैं तो इसका असर इम्युनिटी सिस्टम पर भी दिखने लगता है। प्रतिरक्षा प्रणाली में कमजोरी के कारण शरीर संक्रमण और बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। खून के संचार की समस्या प्रतिरक्षा प्रणाली को बिगाड़ने के साथ कई तरह की अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारक है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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