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Screen Time: स्क्रीन टाइम बढ़ना सेहत के लिए खतरनाक, तो क्या बिल्कुल बंद कर दें मोबाइल-लैपटॉप का इस्तेमाल?

Fri, 24 Jul 2026 08:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विशेषज्ञ मानते हैं कि समस्या स्क्रीन नहीं, बल्कि उसका जरूरत से ज्यादा और गलत तरीके से इस्तेमाल है। कई घंटे लगातार स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने, ब्रेक न लेने, रात देर तक मोबाइल चलाना शरीर और दिमाग दोनों पर नकारात्मक असर डाल सकता है। 
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स्क्रीन टाइम से होने वाले खतरे - फोटो : Amarujala.com/AI
स्क्रीन टाइम बढ़ने को कई अध्ययनों में सेहत के लिए नुकसानदायक बताया गया है। स्क्रीन टाइम का मतलब है कि हम मोबाइल-लैपटॉप, टीवी जैसी डिजिटल स्क्रीन पर अपना कितना समय बिताते हैं?

मौजूदा समय में ये हमारी दिनचर्या का बड़ा हिस्सा बन चुका है। ऑनलाइन पढ़ाई से लेकर, बैंकिंग, खरीदारी या दोस्तों से बातचीत, हर काम किसी न किसी स्क्रीन के जरिए ही पूरा हो रहा है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि जब हर जरूरी काम स्क्रीन से जुड़ गया है, तो फिर स्क्रीन टाइम को कैसे कम किया जाए? क्या सेहत को ठीक रखने के लिए मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बना लेना ही सेहत बचाने का एकमात्र तरीका है?

आइए जान लेते हैं कि आप अपने जोखिमों को कैसे कम कर सकते हैं?
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मोबाइल फोन्स का इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com
बढ़ता स्क्रीन टाइम सेहत के लिए नुकसानदायक

विशेषज्ञ मानते हैं कि समस्या स्क्रीन नहीं, बल्कि उसका जरूरत से ज्यादा और गलत तरीके से इस्तेमाल है  इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि मोबाइल, टीवी या लैपटॉप का इस्तेमाल पूरी तरह बंद कर दिया जाए। आज के डिजिटल दौर में ऐसा करना लगभग असंभव है। जरूरत इस बात की है कि स्क्रीन का इस्तेमाल संतुलित तरीके से किया जाए। 

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ते स्क्रीन टाइम का बच्चों के शारीरिक और मानसिक दोनों सेहत पर नकारात्मक असर हो रहा है। बच्चों के साथ सभी उम्र वालों के लिए ये नुकसानदायक है।
 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्क्रीन टाइम को पूरी तरह बंद करना न तो व्यावहारिक है और न ही जरूरी। हमारा लक्ष्य स्क्रीन से दूरी बनाना नहीं, बल्कि उसका संतुलित उपयोग करना होना चाहिए।
  • जहां संभव हो, गैर-जरूरी स्क्रीन टाइम कम करें और जरूरी काम के दौरान भी नियमित ब्रेक लें। 
  • हर 20 मिनट बाद लगभग 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी वस्तु को देखने का 20-20-20 नियम आंखों को आराम देता है। 
  • इसके अलावा भोजन करते समय, परिवार के साथ समय बिताते समय और सोने से पहले कम से कम एक घंटे तक स्क्रीन से दूरी बनाना लाभदायक माना जाता है। 
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स्क्रीनटाइम का आंखों पर असर - फोटो : Freepik
स्क्रीन टाइम के क्या खतरे हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लगातार कई घंटों तक स्क्रीन देखने से आंखों में सूखापन, जलन, धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
 
  • लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठने से गर्दन, कंधे और कमर में दर्द बढ़ सकता है। 
  • स्क्रीन पर लगे रहने से शारीरिक गतिविधि कम होती है जिससे मोटापा, हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज का खतरा रहता है।
  • देर रात तक मोबाइल चलाने से नींद की गुणवत्ता खराब होती है।
  • पर्याप्त नींद न मिलने का असर अगले दिन ऊर्जा, एकाग्रता और कार्यक्षमता पर भी पड़ता है।    
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मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : AI Generated
कितना स्क्रीन टाइम ठीक माना जाता है?

विशेषज्ञों के अनुसार 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को जितना संभव हो सके स्क्रीन से दूर रखना बेहतर माना जाता है।
 
  • 2-5 वर्ष के बच्चों के लिए प्रतिदिन लगभग एक घंटे तक उच्च गुणवत्ता वाला कंटेंट पर्याप्त माना जाता है। 
  • वयस्कों के लिए दिन में तीन घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम नहीं होना चाहिए, हालांकि इसकी तय सीमा नहीं है। अनावश्यक स्क्रॉलिंग से बचना जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्क्रीन टाइम कम करने के लिए मोबाइल के गैर-जरूरी नोटिफिकेशन बंद करें। हर घंटे कुछ मिनट टहलें। दिन में स्क्रीन-फ्री समय तय करें। सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम करें। परिवार के साथ बिना मोबाइल के समय बिताएं और बच्चों को आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करें। किताब पढ़ना, संगीत सुनना और योग जैसी गतिविधियां डिजिटल स्क्रीन की जरूरतों को कम करने में मदद कर सकती हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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