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Screen Time: विशेषज्ञों ने बताया किस उम्र में कितना होना चाहिए स्क्रीनटाइम, भूलकर भी न करें ये गलती

Tue, 01 Oct 2024 07:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मोबाइल के अधिक इस्तेमाल के नुकसान - फोटो : freepik.com
मोबाइल-कंप्यूटर हो या टीवी हम सभी पूरे दिन किसी न किसी तरह के स्क्रीन से घिरे ही रहते हैं। हालांकि ये आदत स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियां खड़ी कर रही है। अध्ययनों में बढ़ते स्क्रीनटाइम को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत के लिए खतरनाक माना जाता है। बच्चों से लेकर वयस्कों तक सभी उम्र के लोगों के लिए इसके दुष्प्रभाव देखे जाते रहे हैं।

स्क्रीन टाइम उस समयावधि को कहा जाता है जितना वक्त हमारा किसी भी तरह की स्क्रीन के सामने बीतता है। स्क्रीन से ब्लू लाइट निकलती है जो आंखों से लेकर संपूर्ण स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकती है।  

आज के डिजिटल युग में मोबाइल-कंप्यूटर से हम सभी घिरे हुए हैं। सेहत पर कम उम्र से ही इसका काफी असर पड़ सकता है, आंखों की बढ़ती समस्याओं के लिए इसे प्रमुख कारक के रूप में जाना जाता है। रोशनी कम होने के साथ-साथ संज्ञानात्मक कौशल में कमी, मोटापा के लिए भी बढ़े हुए स्क्रीन टाइम को खतरा माना जा रहा है। 

चूंकि आज के समय में मोबाइल-कंप्यूटर से दूरी बना पाना हमारे लिए कठिन है ऐसे में सवाल उठता है कि किस उम्र में स्क्रीन टाइम कितना होना चाहिए?
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स्क्रीन टाइम बढ़ने के नुकसान - फोटो : Adobe Stock
स्क्रीन टाइम बढ़ने के कई सारे नुकसान

उम्र के हिसाब से कितना स्क्रीन टाइम ठीक माना जा सकता है, इसे जानने से पहले ये जानना जरूरी है कि बढ़े हुए स्क्रीन टाइम का सेहत पर किस तरह से असर होता है?

अध्ययनों से पता चता है कि स्क्रीन टाइम बढ़ना बच्चों और वयस्कों सभी के लिए कई कारणों से हानिकारक है। मानसिक स्वास्थ्य पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा जाता रहा है। स्क्रीन टाइम बढ़ने के कारण अवसाद, चिंता जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम रहता है। ये नींद को भी प्रभावित करने वाली समस्या मानी जाती है, जिसका शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत पर नकारात्मक असर होता है।

स्क्रीन टाइम बढ़ने से शारीरिक सक्रियता कम होने लगती है जिससे वजन बढ़ने और मोटापा का जोखिम रहता है जिसे कई गंभीर क्रोनिक बीमारियों जैसे हृदय रोग, डायबिटीज का प्रमुख कारक माना  जाता है।
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बच्चों के लिए नुकसानदायक है मोबाइल का अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com
स्क्रीन टाइम को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्क्रीन टाइम को लेकर बढ़ती चिंताओं के जवाब में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, माता-पिता और शिक्षक, बच्चों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग को प्रबंधित करने में मदद कर सकते हैं। ये बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि स्क्रीन टाइम के जिस तरह के दुष्प्रभाव हैं उससे कम उम्र में ही कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है।

एक रिपोर्ट के अनुसार ब्राजीलियन सोसाइटी ऑफ पीडियाट्रिक्स के विशेषज्ञों ने कहा, दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी प्रकार के स्क्रीन से बिल्कुल दूर रखा जाना चाहिए। कम उम्र में मोबाइल या अन्य स्क्रीन्स के संपर्क के कारण बच्चों का मानसिक विकास प्रभावित हो सकता है। 

दो साल से कम उम्र के बच्चों की मोबाइल पर लत बिल्कुल भी नहीं लगानी चाहिए।

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मोबाइल का इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com
बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है असर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दो से पांच की आयु में स्क्रीन का समय प्रतिदिन दो घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वे वीडियो गेम और अधिक तकनीक के संपर्क में आते रहते हैं, ये समय उनके सामाजिक विकास का भी होता है ऐसे में स्क्रीन टाइम अधिक होने से इसपर नकारात्मक असर होने का जोखिम रहता है। अत्यधिक स्क्रीन का उपयोग स्कूल के काम, सामाजिक संबंधों और शारीरिक स्वास्थ्य में बाधा डाल सकता है। 6 से 12 वर्ष की आयु के बच्चों का स्क्रीनटाइम तीन से अधिक नहीं होना चाहिए। 
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mobile call new - फोटो : Adobe Stock
वयस्कों के लिए स्क्रीन टाइम
 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सामान्य दिशा-निर्देशों के अनुसार वयस्कों के लिए स्क्रीन के इस्तेमाल का समय प्रतिदिन दो घंटे से अधिक नहीं होना चाहिए।  सीमित रखना चाहिए। स्क्रीन टाइम के कारण होने वाले स्वास्थ्य दुष्प्रभावों से बचाव के लिए नियमित रूप से शारीरिक गतिविधियों में अधिक समय बिताना चाहिए। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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