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धूम्रपान करने वालों के आसपास रहना कितना खतरनाक? सेकेंडहैंड स्मोकिंग से हो सकती हैं ये बीमारियां

Fri, 11 Sep 2026 05:06 PM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Health Problems Caused by Secondhand Smoke: लोगों को आपने ये कहते तो सुना होगा कि स्मोकिंग से शरीर बीमार होता है। पर, क्या आप जानते हैं कि बिना सिगरेट पिए आप पैसिव स्मोकिंग के शिकार हो सकते हैं। ये भी शरीर के लिए काफी हानिकारक मानी जाती है। आइए जानते हैं इस बारे में सब-कुछ
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पैसिव स्मोकिंग से कौन-कौन से खतरे? - फोटो : AI
Health Problems Caused by Secondhand Smoke:  सिगरेट पीने से होने वाले नुकसान के बारे में तो आपने खूब सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास रहने से भी आपकी सेहत प्रभावित हो सकती है? इसे सेकेंडहैंड स्मोक या पैसिव स्मोकिंग कहा जाता है।

इसमें व्यक्ति खुद सिगरेट नहीं पीता, लेकिन आसपास के धुएं के संपर्क में आता रहता है। यह धुआं सांस के जरिए शरीर में पहुंच सकता है और लंबे समय तक संपर्क रहने पर स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि पैसिव स्मोकिंग क्या है, इससे कौन-कौन सी स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं और खुद को इसके संपर्क से कैसे बचाया जा सकता है।

 
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पैसिव स्मोकिंग से कौन-कौन से खतरे? - फोटो : AI
सेकेंडहैंड स्मोक क्या है?

 जब कोई व्यक्ति सिगरेट, बीड़ी या किसी अन्य तंबाकू उत्पाद का धुआं छोड़ता है और आसपास मौजूद दूसरा व्यक्ति उस धुएं को सांस के जरिए अंदर लेता है, तो इसे सेकेंडहैंड स्मोक एक्सपोजर कहा जाता है। यानी इसके लिए खुद धूम्रपान करना जरूरी नहीं है। अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहता है जहां लगातार धूम्रपान किया जाता है, तो वह भी तंबाकू के धुएं में मौजूद कई हानिकारक रसायनों के संपर्क में आ सकता है।

 
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पैसिव स्मोकिंग से कौन-कौन से खतरे? - फोटो : AI
पैसिव स्मोकिंग से कौन-कौन से खतरे?

 सेकेंडहैंड स्मोक का असर व्यक्ति की उम्र, धुएं के संपर्क की अवधि और उसकी मात्रा जैसे कई कारकों पर निर्भर कर सकता है। लंबे समय तक या बार-बार संपर्क में रहने से कई स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

  फेफड़ों पर असर

 तंबाकू के धुएं के संपर्क में रहने से सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा जैसी समस्या है, उनमें धुएं के संपर्क से लक्षण और ज्यादा परेशान कर सकते हैं।  बच्चों में भी बार-बार सेकेंडहैंड स्मोक के संपर्क को सांस संबंधी समस्याओं और श्वसन संक्रमण से जोड़ा गया है।

दिल की सेहत पर असर

 पैसिव स्मोकिंग केवल फेफड़ों को ही प्रभावित नहीं करती। तंबाकू के धुएं के संपर्क में रहने से हृदय और रक्त वाहिकाओं पर भी असर पड़ सकता है और लंबे समय में हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। यही वजह है कि घर या कार्यस्थल पर लगातार धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास रहने को सामान्य आदत मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 

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पैसिव स्मोकिंग से कौन-कौन से खतरे? - फोटो : AI
बच्चों के लिए ज्यादा चिंता की बात

 बच्चे सेकेंडहैंड स्मोक के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हो सकते हैं। उनके फेफड़े अभी विकसित हो रहे होते हैं और वे सांस लेने की समस्या, खांसी या बार-बार होने वाले श्वसन संक्रमण से परेशान हो सकते हैं। अगर घर में कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है, तो बच्चे को धुएं से दूर रखना बेहद जरूरी है।

  गर्भावस्था में भी सावधानी जरूरी

 गर्भावस्था के दौरान तंबाकू के धुएं से बचना महत्वपूर्ण है। गर्भवती महिला खुद धूम्रपान न करती हो, फिर भी अगर वह लगातार सेकेंडहैंड स्मोक के संपर्क में आती है तो यह चिंता का विषय हो सकता है। इसलिए घर और आसपास के वातावरण को स्मोक फ्री रखना गर्भवती महिला और होने वाले बच्चे दोनों के लिए बेहतर है।

 
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पैसिव स्मोकिंग से कौन-कौन से खतरे? - फोटो : AI
खुद को सेकेंडहैंड स्मोक से कैसे बचाएं?
 
  • घर के अंदर धूम्रपान की अनुमति न दें।
  • कार या किसी बंद जगह में धूम्रपान से बचें।
  • बच्चों और गर्भवती महिलाओं को धूम्रपान वाले वातावरण से दूर रखें।
  •  अगर आसपास कोई व्यक्ति धूम्रपान कर रहा है तो संभव हो तो वहां से दूर हो जाएं।
  •  धूम्रपान करने वाले व्यक्ति को घर के बाहर भीड़भाड़ से दूर स्थान पर धूम्रपान करने और दूसरों को धुएं से बचाने के लिए प्रेरित करें।
  • परिवार में किसी व्यक्ति को धूम्रपान की आदत है तो उसे इसे छोड़ने के लिए डॉक्टर या विशेषज्ञ की मदद लेने के लिए प्रोत्साहित करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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