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अच्छी खबर: कैंसर के मरीजों की सबसे बड़ी दिक्कत दूर कर देगी ये इंजेक्शन, लाखों लोग रहते हैं परेशान

Fri, 11 Sep 2026 04:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कुछ कीमोथेरेपी दवाएं ऐसी कोशिकाओं और तंत्रों को प्रभावित कर सकती हैं, जिनसे मस्तिष्क के उल्टी नियंत्रित करने वाले हिस्से को संकेत मिलने लगते हैं। इस समस्या को कम करने के लिए विशेषज्ञों ने ओन्डैनसेट्रॉन इंजेक्शन के बारे में जानकारी दी है।
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कैंसर मरीजों के लिए अच्छी खबर - फोटो : Amarujala.com/AI
कैंसर का नाम सुनते ही अक्सर हमारे दिमाग में उम्रदराज व्यक्ति की तस्वीर आती है। लेकिन अब यह स्थिति बदल रही है। कैंसर सिर्फ बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। दुनिया के कई हिस्सों में कम उम्र के लोगों में भी कुछ प्रकार के कैंसर के मामले बढ़ने को लेकर वैज्ञानिक लगातार चिंता जता रहे हैं।

बड़ी संख्या में 40 से कम उम्र के लोगों में स्तन, आंत, पेट, अग्न्याशय और कुछ अन्य कैंसर के मामलों को बढ़ता हुआ देखा गया है। हालांकि हर कैंसर के बढ़ने के पीछे एक ही कारण नहीं होता और किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि  बदलती जीवनशैली, मोटापा, खान-पान में गड़बड़ी के अलावा शराब-धूम्रपान और कुछ पर्यावरणीय जोखिम भी कैंसर का खतरा बढ़ाते जा रहे हैं।

कैंसर की चुनौती सिर्फ बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं है। इलाज के दौरान मरीजों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसमें मितली और उल्टी की दिक्कत काफी आम है। अब इस समस्या को कम करने के लिए विशेषज्ञों ने एक तरीका ढूंढ लिया है। 
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इंजेक्शन से होगा कमाल - फोटो : Freepik.com
मरीजों में उल्टी-मितली की दिक्कत दूर करने वाला इंजेक्शन

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कई मरीजों को कीमोथेरेपी के बाद ऐसा महसूस होता है जैसे पेट लगातार खराब हो रहा हो। कुछ लोगों को इलाज के दौरान ही उल्टी आने लगती है, जबकि कुछ में कई घंटे या दिनों बाद भी यह समस्या दिखाई दे सकती है।
 
  • कैंसर के इलाज के दौरान होने वाली उल्टी और मितली की समस्या को नियंत्रित करने वाली दवा ओन्डैनसेट्रॉन के लंबे असर वाले एक नए इंजेक्शन के प्रयोग के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की विशेषज्ञ समिति ने सिफारिश की है।
  • समिति ने ओन्डैनसेट्रॉन एक्सटेंडेड रिलीज इंजेक्टेबल सस्पेंशन 100 एमजी/1 एमएल के निर्माण और बाजार में बिक्री की अनुमति देने की सिफारिश की है।
  • सीडीएससीओ की ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ समिति की बैठक में कंपनी ने इस दवा के निर्माण और बिक्री का प्रस्ताव रखा था।
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उल्टी-मितली की समस्या - फोटो : Freepik.com
कैंसर मरीजों में क्यों बढ़ जाती है मितली और उल्टी की दिक्कत

दरअसल, कुछ कीमोथेरेपी दवाएं ऐसी कोशिकाओं और तंत्रों को प्रभावित कर सकती हैं, जिनसे मस्तिष्क के उल्टी नियंत्रित करने वाले हिस्से को संकेत मिलने लगते हैं।
 
  • इसके अलावा पेट और आंतों में होने वाले बदलाव भी इस परेशानी को बढ़ा सकते हैं। हर मरीज में इसकी तीव्रता एक जैसी नहीं होती।
  • दवा का प्रकार, उसकी खुराक, इलाज का तरीका और व्यक्ति की अपनी शारीरिक स्थिति इसके जोखिम को प्रभावित कर सकती है।

यही वजह है कि कैंसर के इलाज में सिर्फ ट्यूमर को नियंत्रित करना ही लक्ष्य नहीं होता, बल्कि इलाज से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करना भी बेहद जरूरी होता है। मितली और उल्टी ज्यादा होने पर मरीज खाना-पीना कम कर सकता है, जिससे डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी, कमजोरी और पोषण की समस्या पैदा हो सकती है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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