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Health Tips: सिर्फ 2 मिनट की आदत बचा सकती है कई बीमारियों से, हार्ट-लंग्स भी रहेंगे सुरक्षित

Fri, 26 Jun 2026 09:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मसूड़ों में होने वाली सूजन शरीर में लगातार इंफ्लेमेशन बढ़ा सकती है। यही इंफ्लेमेशन हृदय रोग, डायबिटीज, फेफड़ों के संक्रमण और गर्भावस्था की कुछ जटिलताओं जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ाने से जुड़ा पाया गया है। 
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ओरल हाइजीन का रखें ध्यान - फोटो : Freepik.com
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आपने डिटॉक्स के बारे में जरूर सुना होगा। पर क्या आप जानते हैं कि बॉडी डिटॉक्स करने से कहीं ज्यादा जरूरी है कि आप मुंह की साफ सफाई का ध्यान रखें। अक्सर लोग दांतों को चमकदार बनाए रखने के लिए ब्रश तो कर लेते हैं, लेकिन मुंह की पूरी सफाई पर ध्यान नहीं देते। मुंह में करोड़ों बैक्टीरिया रहते हैं। यही बैक्टीरिया दांतों और मसूड़ों पर प्लाक और टार्टर बनाना शुरू कर देते हैं। इसके बाद मसूड़ों में सूजन, बदबू, खून आना और दांतों का कमजोर होना जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। 

लेकिन खतरा यहीं खत्म नहीं होता। शोध बताते हैं कि मुंह की खराब सेहत का असर सिर्फ दांतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।
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मुंह की साफ-सफाई जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, मसूड़ों में होने वाली सूजन शरीर में लगातार इंफ्लेमेशन बढ़ा सकती है। शरीर में बढ़ा हुआ इंफ्लेमेशन हृदय रोग, डायबिटीज, फेफड़ों के संक्रमण और गर्भावस्था की कुछ जटिलताओं जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ाने से जुड़ा पाया गया है।
 
  • मुंह की सफाई नहीं करने पर भोजन के छोटे-छोटे कण दांतों पर चिपक जाते हैं। इन पर मौजूद बैक्टीरिया एसिड बनाते हैं, जो दांतों की बाहरी परत यानी इनेमल को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है। समय पर इलाज न होने पर गहरे कैविटी बन जाते हैं। 
  • मुंह की साफ-सफाई में कमी कई बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है।
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हृदय की समस्या - फोटो : adobe stock images
 हृदय रोग का बढ़ सकता है जोखिम

अध्ययनों से पता चलता है कि मसूड़ों में लंबे समय तक रहने वाला संक्रमण शरीर में सूजन बढ़ा सकता है। कुछ बैक्टीरिया रक्त के माध्यम से शरीर के अन्य हिस्सों तक पहुंच सकते हैं, जिससे हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। 
 
  • हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि हर खराब ओरल हाइजीन वाले व्यक्ति को हृदय रोग होगा, लेकिन दोनों के बीच संबंध कई अध्ययनों में देखा गया है। 

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फेफड़ों की बीमारी - फोटो : Adobe Stock
फेफड़ों के संक्रमण का बढ़ सकता है खतरा

मुंह में मौजूद हानिकारक बैक्टीरिया सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। विशेष रूप से बुजुर्गों, कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोगों और अस्पताल में भर्ती मरीजों में यह निमोनिया जैसे संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकते हैं।
 
  • ओरल हाइजीन केवल दांतों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि श्वसन स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। 
  • रोजाना सही तरीके से ब्रश और कुल्ला करना इस जोखिम को कम करने में मदद करता है।
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ओरल हाइजीन जरूरी - फोटो : Adobe stock photos
ओरल हाइजीन का रखें ध्यान

मुंह की साफ-सफाई के लिए दिन में दो बार फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से कम से कम दो मिनट तक ब्रश करें। 
 
  • रोजाना फ्लॉस का इस्तेमाल करें और जीभ की सफाई करें। 
  • मीठे और चिपचिपे खाद्य पदार्थ कम खाएं और खूब पानी पिएं।
  •  हर 6 महीने में डेंटिस्ट से जांच कराएं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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