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Micronutrient Deficiency: शरीर दे रहा है ये संकेत, तो समझ जाइए माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की हो गई है कमी

Fri, 03 Jul 2026 07:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड और एक जैसी डाइट की वजह से माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी तेजी से बढ़ रही है। खास बात यह है कि इनकी जरूरत बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन शरीर में इनका महत्व बेहद बड़ा होता है।
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माइक्रोन्यूट्रिएंट्स कितने जरूरी? - फोटो : Amarujala.com/AI
अच्छी सेहत के लिए खान-पान को ठीक रखना सबसे जरूरी माना जाता है। हम जिस तरह की चीजें खाते-पीते हैं उसका सीधे तौर पर सेहत पर असर होता है। पौष्टिक आहार शरीर के लिए जरूरी विटामिन्स और पोषक तत्वों की पूर्ति करते हैं। हालांकि जिस तरह से लोगों का खान-पान गड़बड़ होता जा रहा है, फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फूड और तली -भुनी चीजों का सेवन बढ़ रहा है, इसने शरीर में कई जरूरी न्यूट्रिशन की कमी पैदा कर दी है।

कई अध्ययन इस बात को लेकर चिंता जताते रहे है कि लोगों में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी तेजी से बढ़ती जा रही है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की जरूरत हमें बहुत कम मात्रा में होती है, लेकिन शरीर में इनका काफी महत्व होता है। विटामिन और मिनरल्स की यही छोटी-सी मात्रा इम्युनिटी मजबूत रखने, दिमाग को सक्रिय रखने, हड्डियों को मजबूत बनाने और हार्मोन्स को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।

आइए जान लेते हैं कि आप कैसे पता कर सकते हैं कि कहीं आपमें माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी तो नहीं है?
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शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी - फोटो : Freepik.com
माइक्रोन्यूट्रिएंट्स शरीर के लिए जरूरी

क्या आप रोज भरपेट भोजन करते हैं फिर भी हर समय थकान रहती है? बाल तेजी से झड़ रहे हैं, हड्डियों में दर्द रहता है या याददाश्त पहले जैसी नहीं रही? अगर ऐसा है, तो संभव है कि आपके शरीर को कैलोरी तो मिल रही हो, लेकिन वे छोटे-छोटे पोषक तत्व नहीं मिल रहे जिनके बिना शरीर ठीक से काम ही नहीं कर सकता।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार आयोडीन, जिंक और विटामिन डी की कमी दुनिया भर में सबसे आम पोषण संबंधी समस्याओं में शामिल हैं। भारत में भी महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं में इनकी कमी बड़ी चिंता का विषय है।
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आयरन की कमी का खतरा - फोटो : Amarujala.com
कहीं आपमें आयरन की कमी तो नहीं?

आयरन हमारे शरीर के लिए जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट है, ये हीमोग्लोबिन बनाने में मदद करता है। हीमोग्लोबिन एक प्रकार का प्रोटीन है  जो शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाता है। 
 
  • आयरन की कमी से एनीमिया, लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर आने, सांस फूलने, सिरदर्द जैसी दिक्कतें हो सकती है। 
  • महिलाओं, किशोरियों और गर्भवती महिलाओं में इसकी कमी अधिक देखी जाती है। 
  • आयरन की पूर्ति के लिए हरी पत्तेदार सब्जियां, चना, राजमा, गुड़ को फायदेमंद माना जाता है।

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पैरों में झुनझुनी की समस्या - फोटो : Freepik.com
हाथ-पैरों में झुनझुनी और याददाश्त की समस्या से हैं परेशान?

क्या आप भी कुछ समय से हाथ-पैरों में झुनझुनी, कमजोरी, याददाश्त कमजोर होना, चक्कर आने जैसी समस्याओं से परेशान हैं? ये विटामिन-बी 12 की कमी का संकेत हो सकता है।
 
  • विटामिन बी12 लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, डीएनए संश्लेषण और तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। 
  • शाकाहारी लोगों में इसकी कमी का खतरा अधिक होता है क्योंकि यह मुख्य रूप से पशु-आधारित खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। 
  • दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली और मांस इसके अच्छे स्रोत हैं। 
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जिंक की कमी का जोखिम - फोटो : Adobe Stock
कहीं आपमें जिंक की कमी तो नहीं?

जिंक शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट है। इसके अलावा घाव भरने की प्रक्रिया, त्वचा को स्वस्थ रखने, स्वाद और सूंघने की क्षमता के अलावा बच्चों की सामान्य वृद्धि के लिए भी ये जरूरी है।
 
  • जिन लोगों में जिंक की कमी होते है उनमें बार-बार संक्रमण होने, घाव देर से भरने, बाल झड़ने, भूख कम लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
  • कद्दू के बीज, तिल, मूंगफली, चना-राजमा से जिंक की पूर्ति हो सकती है।
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शरीर के लिए जरूरी है आयोडीन - फोटो : Adobe Stock Photos
आयोडीन की कमी का खतरा

आयोडीन थायरॉइड हार्मोन बनाने के लिए आवश्यक है। इसकी कमी से घेंघा, थायरॉइड हार्मोन की कमी, थकान, वजन बढ़ने, ठंड ज्यादा लगने का खतरा रहता है। 
 
  • बच्चों में मानसिक एवं शारीरिक विकास के लिए भी ये जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट है। 
  • आयोडीन की कमी को रोकने के लिए आयोडीन युक्त नमक का उपयोग सबसे प्रभावी माना जाता है।
  • इसके अलावा मछली, डेयरी उत्पाद और अंडे से भी इसकी कमी की पूर्ति हो सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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