फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Leafy Vegetables: बारिश में पत्तेदार सब्जियों का सेवन हो सकता है नुकदायक, जानें वजह

Thu, 07 Jul 2022 05:06 PM IST
स्वाति शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 8
भारतीय भोजन - फोटो : social media
भारतीय भोजन विविधताओं से भरा है। जहां दुनिया भर में बड़ी तादाद में मंसाहार किया जाता है। भारत में केवल शाकाहारी भोजन की ही कई हजार वैरायटीज हैं। बल्कि ये शाकाहार अब बड़े पैमाने पर विदेशियों को भी लुभा रहा है। हमारे देश मे तो इस शाकाहार के लिए भी अलग अलग मौसमों और स्थितियों के हिसाब से व्यंजन होते हैं। खासकर बारिश के मौसम में भोजन के तौर तरीके एकदम बदल जाते हैं और रसोई में आ जाती है लौकी,गिलकी, कद्दू, आदि की बहार। यही नहीं हमारे बुजुर्ग इस मौसम में कई सब्जियों से दूरी बनाने की परम्परा धार्मिक स्तर पर भी बताते हैं। रोटी-सब्जी-दाल-चावल भारतीय भोजन का अहम हिस्सा है। इनमे से भी देश के अलग हिस्सों में रोटी और चावल ऑप्शनल हो सकते हैं लेकिन सब्जी और दाल कॉमन है। सब्जियों के प्रयोग को लेकर भी हमारे देश मे कई नियम कायदे हैं। जैसे कि बारिश के दिनों में पत्तेदार सब्जियों का प्रयोग न करना। आखिर क्यों बारिश में काम में नहीं लाई जातीं कुछ सब्जियां, क्या हो सकते हैं इनके नुकसान जानिए। 
विज्ञापन

2 of 8
बारिश का मौसम - फोटो : अमर उजाला
बारिश में बदली रसोई

मानसून आने के पहले ही देश के कई हिस्सों में इस विशेष चौमासे की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। हालाँकि अब बारिश के महीने और समय पहले की तरह नहीं रहा क्योंकि आजकल बारिश कभी भी हो सकती है। लेकिन मुख्यतः जून-जुलाई से सितंबर तक के महीने में खान-पान को लेकर कई बदलाव पारम्परिक तौर पर हमारे यहाँ किये जाते हैं और इसमें सबसे बड़ा परिवर्तन होता है सब्जियों से जुड़ा। सर्दी के मौसम को हरी-पत्तेदार सब्जियों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है तो बारिश को इनके लिए सबसे अनुपयुक्त कहा जाता है। यही कारण है कि ज्यादातर घरों में पालक, मैथी, साग, पत्तागोभी और यहाँ तक कि फूलगोभी और बैंगन भी बैन हो जाते हैं। ये बैन केवल परम्परा का ही हिस्सा नहीं है। इसके पीछे बकायदा विज्ञान भी है।  
विज्ञापन

3 of 8
फूड पॉइज़निंग की समस्या - फोटो : istock
क्या है कारण?

बदलता मौसम हमेशा बीमारियों का अंदेशा भी साथ लेकर आता है। खासकर बारिश के आने के पहले तेज धूप और उसके साथ बनने वाली नमी मिलकर पसीने व चिपचिपेपन के साथ त्वचा के लिए तो मुश्किल खड़ी करती ही है। तापमान में होने वाली इस घटत-बढ़त से शरीर सामंजस्य बैठाने का प्रयास करता है। दूसरी तरह पानी गिरने के बाद पैदा होने वाले बैक्टीरिया और जर्म्स मिलकर प्रदूषित पेयजल आदि का कारण भी बन जाते हैं। बारिश के कारण पानी पीने में भी कम आता है और भोजन के पचने की प्रक्रिया में भी बदलाव आने लगता है। यही कारण है कि इस मौसम में सर्दी-खांसी, बुखार, पेट संबंधी समस्याएं जैसे फ़ूड पॉइजनिंग, उलटी-दस्त, जोड़ों में अकड़न आदि बढ़ जाते हैं। इन सबमें भोजन का संतुलन बहुत जरूरी होता है क्योंकि इम्युनिटी बनाये रखने और पोषण पाने के लिए सही भोजन की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।  

4 of 8
बारिश में पत्तेदार सब्जियों के सेवन से बचें - फोटो : iStock
पत्तेदार सब्जियों से दूरी

मौसम के बदलने के साथ बारिश में इम्युनिटी का स्तर कम होने लगता है। इसलिए और भी अधिक जरूरत होती है सही भोजन करने की। ज्यादातर हरी पत्तेदार सब्जियां दलदली और नम जगह पर उगाई जाती हैं। यह जगह बैक्टीरिया, वायरस, फफूंद, कीड़े-मकोड़ों और अन्य हानिकारक कारकों के पैदा होने के लिए एकदम अनुकूल हो जाती है। आम मौसम में धूप मिटटी को संक्रमणरहित बनाने में मदद करती है लेकिन बारिश में ऐसा नहीं हो पाता। ऐसे में पत्तेदार सब्जियों पर संक्रमण पैदा करने वाले जीवों के पनपने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। चूँकि इन सब्जियों में पत्तियां आपस में पास पास गुंथी होती हैं, ऐसे में ये सूक्ष्म जीव आसानी से दिखाई भी नहीं देते। इसलिए सब्जियों को धोते या पकाते समय भी कई बार छूट जाते हैं और पेट में जाकर मुश्किल खड़ी करते हैं।  
विज्ञापन

5 of 8
स्ट्रीट फूड - फोटो : getty images
और बढ़ती मुश्किल

यदि आप घर की बजाय किसी रेस्त्रां या होटल में ये सब्जियां खाते हैं तब मुश्किल और भी बढ़ सकती है। घर पर भी ह्री सब्जियों को अच्छी तरह छांटकर, धोकर, गरम पानी से निकालकर, नमक के पानी में डुबोकर या उबालकर बनाया जाता है लेकिन बाहर किसी ने ये सब विधियां अपनाई होंगी, इसकी कोई ग्यारंटी नहीं। ऊपर से बारिश के दिनों में पेट के संक्रमण खराब पानी की वजह से भी फैलते हैं और खाना पकाते वक्त बाहर किस तरह का पानी उपयोग में लाया गया है, यह भी आप नहीं जान सकते। खाना पकाने वाला व्यक्ति किसी संक्रमण से ग्रस्त है या स्वस्थ है, इसकी जानकारी भी आपको नहीं हो सकती। यही कारण है कि सभी विशेषज्ञ इस मौसम में बाहर का भोजन और खासकर स्ट्रीट फूड से दूरी बनाये रखने की बात करते हैं।  
विज्ञापन

6 of 8
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इन बातों का भी रखें ख्याल 
 
  • बारिश के मौसम में क्या खा रहे हैं के साथ ही कब खा रहे हैं, यह भी बहुत मायने रखता है। कोशिश करें कि रात का भोजन शाम 7.30 के बाद न हो और सुबह नाश्ता जरूर करें।  भोजन में दालों को जरूर शामिल करें। चूँकि इस मौसम में सब्जियों का विकल्प आपके पास कम होगा, ऐसे में दालें काम आएँगी। ये फाइबर और प्रोटीन के साथ ही भरपूर मात्रा में पानी भी शरीर को देंगी।  
  • हालाँकि ये मौसम पकौड़ों और तले हुए व्यंजनों के लिए जाना जाता है लेकिन इस तरह के व्यंजन तकलीफ भी दे सकते हैं। अगर समोसे, कचौरी, पकौड़े आदि खाने भी हों तो घर पर बने हुए व्यंजनों को ही प्राथमिकता दें और इन्हें सुबह के नाश्ते या दोपहर के भोजन में खाएं। रात के भोजन के साथ इन्हें खाने से बचें। इससे पचने में आसानी भी होगी और आप स्वाद का आनंद भी उठा सकेंगे।  
  • स्ट्रीट फूड से कुछ समय के लिए दूरी बनायें। खासकर पानी-पूरी, चाट, फ्रूट चाट तथा समोसे आदि के साथ मिलने वाली चटनी आदि। यदि मजबूरी में बाहर खाना भी पड़ जाये तो हाथों को अच्छे से धोकर, साफ़ जगह देखकर, ऐसी चीज खाएं जिसमें संक्रमण का खतरा कम से कम हो। जैसे दाल-रोटी, सादा सब्जी, खिचड़ी आदि। 
विज्ञापन

7 of 8
बैंगन दे सकता है मुश्किल
  • कच्चे फल, सलाद, जूस, आदि का सेवन भी बाहर करने से बचें। घर पर भी इन चीजों को अच्छे से धोकर, छिलके उतारकर काम में लाएं। अगर आप नाश्ते में स्प्राउट्स खा रहे हैं तो उन्हें थोड़ी देर भाप में पका लें या उबाल लें। कच्चे खाने से बचें।  
  • बैंगन, शिमला मिर्च जैसी सब्जियों का प्रयोग भी कम से कम करें। इन सब्जियों में कुछ रसायन जैसे अल्कलॉइड्स व ग्लूकोसायनोलेट्स होते हैं जो पाचन में मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। पकाने के बाद भी इनका असर बरकरार रहता है और इससे पेट संबंधी समस्याएं जैसे उलटी, दस्त, पेटदर्द, आदि हो सकता है।  
  • इस मौसम में दूध और दूध से बने उत्पादों के उपयोग को लेकर भी सतर्कता रखें।  ये उत्पाद भी इस मौसम में संक्रमण का बड़ा खतरा बन सकते हैं।  
विज्ञापन

8 of 8
हरी सब्जियां
  • जहाँ तक हो सके बासी खाने से भी बचें। रखे हुए खाने और यहाँ तक कि गूंधकर रखे गए आटे में भी कीटाणुओं और बैक्टीरिया के पनपने की आशंका अधिक होती है। इससे कई बीमारियां फ़ैल सकती हैं।  
  • भोजन और भोजन बनाने की जगह दोनों को अच्छी तरह साफ़ रखें। यह मौसम कीड़ों, मक्खियों और कॉकरोचों का भी होता है जो बीमारियां फैलाते हैं। इसलिए भोजन को हमेशा ढंककर भी रखें और साफ बर्तनों का उपयोग करें।  
--------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 
 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें