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Life Expectancy Report: चीन-जापान से कम है भारतीयों की जीवन प्रत्याशा, इन कारणों को जिम्मेदार मान रहे हैं विशेषज्ञ

Thu, 07 Jul 2022 04:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कम हो रही है भारतीयों की जीवन प्रत्याशा - फोटो : Istock
कई रिपोर्ट्स में जिक्र मिलता है कि लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के कारण भारतीय लोगों की जीवन प्रत्याशा समय के साथ कम होती जा रही है। इसी को लेकर हाल ही में किए गए एक शोध में कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। नेशनल हेल्थ कमीशन (एनएचसी) द्वारा जारी डेटा से पता चलता है कि भारतीय लोगों की जीवन प्रत्याशा, चीनी लोगों की तुलना में कम है, मतलब चीन के लोग भारतीयों की तुलना में अधिक जीते हैं।

शोधकर्ताओं ने बताया कि हाल के वर्षों में चीन ने देश में कई तरह के स्वास्थ्य सुधार किए हैं जिससे वहां के लोगों की जीने के आयु में अब बढ़ोतरी देखी जा रही है।

विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 में भारत की जीवन प्रत्याशा 70 थी वहीं चीन के लोगों की जीवन प्रत्याशा 77.93 वर्ष है। जीवन प्रत्याशा, एक निर्धारित की गई औसत आयु के बाद जीवन में शेष बचे वर्षों की औसत संख्या है। भारत में कई कारणों से पिछले कुछ वर्षों में इसमें कमी रिपोर्ट की जा रही है, इसमें बढ़ती शारीरिक निष्क्रियता को प्रमुख कारक के तौर पर देखा जा रहा है। आइए इस रिपोर्ट के बार में विस्तार से जानते हैं?
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हांगकांग में अधिक जीते हैं लोग - फोटो : ANI
हांगकांग, जीवन प्रत्याशा में शीर्ष पर

जारी आंकड़े बताते हैं, साल 2013 के बाद से हांगकांग दुनिया की शीर्ष जीवन प्रत्याशा को कायम रखने वाला देश बना हुआ है। हांगकांग में पुरुषों और महिलाओं की औसत आयु 85 वर्ष से अधिक है। वहीं जापान और मकाऊ भी शीर्ष जीवन प्रत्याशा के मामले में दुनिया में शीर्ष पर हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि 1949 में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) के शासन की शुरुआत के दौरान चीनी नागरिकों की जीवन प्रत्याशा 35 वर्ष थी, जोकि साल 2019 में बढ़कर 77.3 साल हो गई है। फिलहाल यह भारत की तुलना में अधिक है। 
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भारतीयों के जीवन प्रत्याशा में कमी - फोटो : istock
भारत से कैसे आगे निकल रहा है चीन?

अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर चीन, भारत से आगे कैसे निकल रहा है? इस संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि हाल के वर्षों में चीन सरकार ने स्वास्थ्य को लेकर लोगों को विशेष जागरूकता दिखाने, उचित आहार, फिटनेस, तंबाकू-शराब से दूरी बनाने, मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण जैसे उपायों को बढ़ावा दिया है। इसका परिणाम यह है कि यहां कई तरह की बीमारियों का खतरा भी कम हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप  जीवन प्रत्याशा में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

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जीवन प्रत्याशा को लेकर अध्ययन - फोटो : Pixabay
भारतीयों में बढ़ी है शारीरिक निष्क्रियता

भारत के नजरिए से बात करें तो हाल के रिपोर्ट्स बताते हैं कि पिछले 3-4 साल, विशेषकर कोरोना संक्रमण के बाद से लोगों में शारीरिक निष्क्रियता और इससे संबंधित कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं। यह लोगों के शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा रही हैं। 
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फिटनेस को लेकर चीन के लोग अलर्ट - फोटो : Pixels
2035 तक चीन की जीवन प्रत्याशा हो सकती है 80

अधिकारियों का कहना है कि चीन ने व्यापक रूप से अपने स्वास्थ्य के प्रति ध्यान देते हुए कई तरह की बीमारियों के जोखिम को कम कर लिया है, ऐसे में यहां समय से पहले मृत्यु का खतरा भी कम हो गया है। इसी साल मई में चीन ने साल 2025 तक अपने लोगों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए विस्तृत खांका तैयार किया है।  इसका लक्ष्य 2025 में अपनी जीवन प्रत्याशा को एक और वर्ष बढ़ाकर 78.93 करना और शिशुओं-गर्भवती महिलाओं के मृत्यु दर को कम करना है। इस योजना के तहत वर्ष 2035 तक चीन की जीवन प्रत्याशा बढ़कर 80 तक पहुंचने की संभावना है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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