फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sleep Disorders: नींद न आना बड़ी बीमारियों को है न्योता, आप भी हैं शिकार तो तुरंत सुधार लें ये आदतें

Sun, 26 Oct 2025 06:35 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, पर्याप्त नींद न लेने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, मानसिक संतुलन बिगड़ता है और कई क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
 
विज्ञापन
1 of 4
नींद न आने की समस्या - फोटो : Freepik.com
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए अच्छी नींद लेना बहुत आवश्यक माना जाता है। ये मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार की सेहत को ठीक रखने के लिए जरूरी है। डॉक्टर बताते हैं, जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा रहता है।  

मौजूदा समय में नींद की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। पहले जहां ये दिक्कत सिर्फ बुजुर्गों या कामकाजी लोगों में देखने को मिलती थी, वहीं अब बच्चों-युवाओं तक में भी नींद न आने की समस्या आम हो गई है। मोबाइल फोन, लैपटॉप, देर रात तक सोशल मीडिया का इस्तेमाल, तनाव, अनियमित जीवनशैली आदि ने सभी उम्र के लोगों में इन समस्याओं को बढ़ा दिया है। शोध बताते हैं कि भारत में हर तीसरा व्यक्ति नींद से जुड़ी समस्या का सामना कर रहा है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, पर्याप्त नींद न लेने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, मानसिक संतुलन बिगड़ता है और कई क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि नींद की कमी के क्या दुष्प्रभाव हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है?
विज्ञापन

2 of 4
युवाओं में नींद विकार - फोटो : Freepik.com
नींद की कमी का सेहत पर होता है असर

अध्ययनों से पता चलता है कि कुछ प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, दिल की बीमारियां और मानसिक रोग के शिकार लोगों की भी नींद अक्सर बाधित रहती है। 

नींद की कमी का सबसे बड़ा असर हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। जब हम पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो दिमाग को आराम करने का मौका नहीं मिलता। इससे तनाव, चिंता, अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ने लगती हैं।

इसी तरह से नींद की कमी दिल की बीमारियों और हाई ब्लड प्रेशर को भी बढ़ा देती है। जब शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
विज्ञापन

3 of 4
अच्छी नींद सेहत के लिए जरूरी - फोटो : adobe stock
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नींद की बढ़ती समस्याओं के लिए मोबाइल या कंप्यूटर जैसे स्क्रीन्स का अधिक इस्तेमाल भी एक कारण  माना जा सकता है। इन उपकरणों से निकलने वाली ब्लू लाइट नींद के लिए आवश्यक मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को रोकती है। नींद में सुधार के लिए कुछ उपाय मददगार हो सकते हैं।

सोने का समय निर्धारित करें

हर दिन एक ही समय पर सोने और जागने की आदत डालें। इससे शरीर का बायोलॉजिकल क्लॉक नियमित होता है, जिससे नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। इसके अलावा कमरे को नींद के अनुकूल बनाएं। कमरा शांत, अंधेरा वाला और ठंडा होना चाहिए। अनुकूल माहौल में अच्छी नींद मिलती है।
विज्ञापन

4 of 4
नुकसानदायक है मोबाइल का अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com
शारीरिक सक्रियता बढ़ाना जरूरी

नियमित शारीरिक व्यायाम नींद की गुणवत्ता में सुधार करने में सहायक है। व्यायाम करने से शरीर को थकावट महसूस होती है, जिससे सोने में आसानी होती है। ध्यान रहे कि सोने से पहले व्यायाम न करें, क्योंकि यह शारीरिक उत्तेजना बढ़ा सकता है। ध्यान, गहरी सांस लेने की तकनीक और मांसपेशियों को आराम देने वाली एक्सरसाइज सोने से पहले करने से तनाव कम होता है और नींद में सुधार होता है।


स्मार्टफोन और स्क्रीन पर अपना समय कम करें

सोने से 1-2 घंटे पहले स्मार्टफोन, कंप्यूटर, या टेलीविजन का इस्तेमाल न करें। इन उपकरणों की ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के स्तर को प्रभावित करती है, जिससे नींद आने में परेशानी होती है। मेलाटोनिन एक प्राकृतिक हार्मोन है जो नींद को नियंत्रित करता है। अनिद्रा के शिकार लोग डॉक्टर से सलाह लेकर इसका सप्लीमेंट ले सकते हैं। अगर नींद की समस्या किसी मानसिक विकार जैसे अवसाद या एंग्जायटी के कारण है, तो इसके लिए मनोचिकित्सक से सलाह लें। 



-----------------------------------
नोट- यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें