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Electrolyte Imbalance: क्या हैं इलेक्ट्रोलाइट्स, क्यों खतरनाक मानी जाती है इसकी कमी? आसान तरीके से समझिए

Mon, 04 May 2026 07:54 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Electrolyte Imbalance Kyu Hota Hai: जब गर्मियों में शरीर से ज्यादा पसीना निकल जाता हैं, तो सिर्फ पानी ही नहीं बल्कि सोडियम, पोटैशियम और अन्य जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी शरीर से बाहर निकल जाते हैं। इनकी कमी सेहत के लिए कई तरह की मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है।
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इलेक्ट्रोलाइट्स - फोटो : Amarujala.com/AI
देश के ज्यादातर हिस्से इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप झेल रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, सेहत के लिए मुश्किलें भी बढ़ती जाती हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट्स में हमने बताया कि किस तरह से गर्मी बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हो सकती है और किस तरह से ये लोगों में किडनी की बीमारियों का कारण बन सकती है। 

गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) होना काफी आम है। विशेषज्ञ कहते हैं, इस मौसम में सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं है, बल्कि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बनाए रखना बहुत जरूरी है। इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी चक्कर आने, कमजोरी, लो ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ाने वाली हो सकती है।

इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी और इसके कारण होने वाली समस्याओं को लेकर तो खूब चर्चा होती है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ये इलेक्ट्रोलाइट्स आखिर होते क्या हैं और ये इतने जरूरी क्यों हैं?
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शरीर के लिए क्यों जरूरी हैं इलेक्ट्रोलाइट्स? - फोटो : Adobe Stock Images
इलेक्ट्रोलाइट्स के बारे में जान लीजिए

इलेक्ट्रोलाइट्स ऐसे मिनरल्स होते हैं जो हमारे शरीर के लगभग हर जरूरी कार्यों को नियंत्रित करते हैं। ये हमारे खून, पसीने और शरीर के तरल पदार्थों में घुले रहते हैं और पानी के साथ मिलकर शरीर के अंदर संतुलन बनाए रखते हैं। सोडियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स इलेक्ट्रोलाइट्स हैं।
 
  • गर्मियों में जब शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है, तो पसीने के साथ सोडियम, पोटैशियम और अन्य जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी शरीर से बाहर निकल जाते हैं। 
  • यही कारण है कि सिर्फ पानी पीना हमेशा पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सही इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होता है। 
  • अगर यह संतुलन बिगड़ जाए तो शरीर में कमजोरी, चक्कर आना, मांसपेशियों में ऐंठन और दिल की धड़कन भी प्रभावित हो सकती है।
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पानी के साथ इलेक्ट्रोलाइट्स भी जरूरी - फोटो : Freepik.com
इलेक्ट्रोलाइट्स क्यों जरूरी माना जाता है?

मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करते हैं। 
 
  • शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में इसकी भूमिका होती है।
  • मांसपेशियों और नर्वस सिस्टम के ठीक तरीके से काम करते रहने के लिए भी ये मिनरल्स जरूरी है।
  • कैल्शियम और पोटैशियम नर्व सिग्नल्स स्वस्थ रखते हैं, जिससे मांसपेशियां सही तरीके से सिकुड़ती और फैलती हैं।
  • दिल की धड़कन को नियमित रखने में भी पोटैशियम जैसे मिनरल्स की बड़ी भूमिका होती है।

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इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी का खतरा - फोटो : Freepik.com
सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम की कमी
 
  • पोटैशियम की कमी (हाइपोकैलीमिया): पोटैशियम दिल के काम-काज के लिए बहुत जरूरी है। इसकी कमी से दिल की धड़कनों में अनियमितता, मांसपेशियों में कमजोरी, ऐंठन, कब्ज और लकवा हो सकता है। 
  • मैग्नीशियम की कमी (हाइपोमैग्नेसीमिया): इसकी वजह से चिड़चिड़ापन, मांसपेशियों में ऐंठन, स्वभाव में बदलाव, दौरे पड़ने और दिल की धड़कनों में अनियमितता का जोखिम रहता है।
  • सोडियम की कमी (हाइपोनेट्रेमिया): सोडियम की कमी से तंत्रिका तंत्र से जुड़ी समस्याएं होती हैं। इससे लो बीपी, जी मिचलाने, उल्टी, चक्कर आने, भ्रम और दौरे पड़ने का खतरा रहता है।
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ओआरएस से इलेक्ट्रोलाइट की पूर्ति - फोटो : Adobe stock
इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस कैसे बनाए रखें? 
 
  • शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहने के साथ मिनरल्स की पूर्ति करते रहना भी जरूरी है।
  • नारियल पानी, केला, संतरा, तरबूज, दही और नमक युक्त पेय पदार्थ शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद करते हैं।
  • अमर उजाला से बातचीत में एम्स की वरिष्ठ डायटीशियन ने ओआरएस के इस्तेमाल की सलाह दी है। घर पर भी ओआरएस बनाकर इसके सेवन से लाभ पाया जा सकता है।
  • इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने के लिए संतुलित आहार जैसे फल-सब्जियां और सीमित मात्रा में नमक का सेवन भी बहुत जरूरी है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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