Why Joint Pain Increase During Monsoon: अक्सर लोगों से साथ ये शिकायत रहती है कि बारिश का मौसम आते ही उनके घुटने दर्द होने लगते हैं। इसकी क्या वजह है, आइए जानते हैं।
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बारिश में क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द?
- फोटो : AI
Why Joint Pain Increase During Monsoon: अक्सर देखा जाता है कि मानसून शुरू होते ही घुटनों, कंधों, कमर और टखनों में दर्द या अकड़न महसूस होने लगती है। खास बात यह है कि यह समस्या केवल अर्थराइटिस (गठिया) के मरीजों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि कई स्वस्थ लोगों को भी बारिश के दौरान जोड़ों में दर्द की शिकायत होने लगती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में इस दर्द में कई वजहें इसके पीछे जिम्मेदार हो सकती हैं। हालांकि, हर व्यक्ति में इसके कारण अलग-अलग हो सकते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि मानसून में जोड़ों का दर्द क्यों बढ़ता है, इससे राहत पाने के लिए क्या उपाय अपनाने चाहिए और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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बारिश में क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द?
- फोटो : Adobe Stock
बारिश के मौसम में जोड़ों का दर्द क्यों बढ़ जाता है?
1. वायुदाब में बदलाव
बारिश के मौसम में वायुदाब कम हो जाता है, जिससे जोड़ों के आसपास के ऊतकों में दबाव बदलता है। इसके कारण घुटनों और अन्य जोड़ों में दर्द और अकड़न बढ़ सकती है।
2. नमी बढ़ने का असर
मानसून में हवा में नमी अधिक होती है, जो मांसपेशियों और जोड़ों को प्रभावित करती है। इससे सुबह के समय जकड़न और असहजता ज्यादा महसूस होती है।
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3. शारीरिक गतिविधि कम होना
बारिश के कारण लोग बाहर कम निकलते हैं और चलना-फिरना कम हो जाता है। लंबे समय तक बैठे रहने से जोड़ों में दर्द बढ़ जाता है।
4. पुरानी चोट का असर
जिन लोगों के घुटनों या जोड़ों में पहले चोट लगी होती है, उन्हें मौसम बदलने पर ज्यादा दर्द महसूस होता है। पुरानी चोटें मौसम के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाती हैं।
5. मांसपेशियों में जकड़न
ठंडा और नम मौसम मांसपेशियों को सख्त बना देता है। इससे जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और दर्द की समस्या बढ़ जाती है।
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बारिश में क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द?
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कब डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि जोड़ों का दर्द कई दिनों तक लगातार बना रहे, सूजन बढ़ जाए, चलने-फिरने में परेशानी हो, जोड़ों में लालपन या गर्माहट महसूस हो, तेज दर्द के साथ बुखार आए या दर्द के कारण दैनिक काम प्रभावित होने लगें, तो तुरंत डॉक्टर या हड्डी रोग विशेषज्ञ से जांच कराएं। समय पर इलाज से गंभीर समस्याओं से बचाव किया जा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।