फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Liver Health: न वजन ज्यादा और न पेट बाहर, फिर भी हो रहा फैटी लिवर! डॉक्टर से जानिए क्या है इसका कारण

Fri, 13 Feb 2026 06:29 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अक्सर माना जाता रहा है कि अगर आपका वजन नॉर्मल है और लिवर एंजाइम, शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे रूटीन टेस्ट लिमिट में हैं, तो उनका लिवर हेल्दी होना चाहिए। बदकिस्मती से, यह हमेशा सच नहीं होता। नॉर्मल वजन का मतलब जरूरी नहीं कि आप फैटी लिवर से सुरक्षित हैं। 
विज्ञापन
1 of 5
फैटी लिवर रोग होने के कारण और बचाव - फोटो : adobe stock images
लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो खून से अशुद्ध चीजों को फिल्टर करने, डाइजेशन को ठीक रखने, ब्लड शुगर को कंट्रोल करने से लेकर एल्ब्यूमिन जैसे जरूरी प्रोटीन बनाने में मदद करता है। मसलन शरीर स्वस्थ रहे इसके लिए जरूरी है कि आपका लिवर ठीक तरीके से काम करता रहे। हालांकि लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी के कारण लिवर से संबंधित बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। लिवर में फैट जमा होने की बीमारी यानी फैटी लिवर डिजीज समय के साथ कम उम्र के लोगों को भी अपना शिकार बना रही है।

फैटी लिवर डिजीज के लिए शराब पीने की आदत, मोटापा, व्यायाम न करने और लंबे समय तक बैठकर काम करते रहने को जिम्मेदार माना जाता रहा है। अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों का वजन अधिक होता है या फिर मोटापे का शिकार हैं, ऐसे लोगों में फैटी लिवर रोग होने का खतरा और अधिक हो सकता है।

ऐसे में सवाल ये है कि क्या दुबले-पतले लोग या जिनका वजन कंट्रोल है ऐसे लोगों को भी फैटी लिवर की बीमारी हो सकती है?
विज्ञापन

2 of 5
दुबले-पतले लोगों में फैटी लिवर की समस्या - फोटो : Freepik.com
 दुबले-पतले लोगों में बढ़ती फैटी लिवर की समस्या
 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अक्सर माना जाता रहा है कि फैटी लिवर की बीमारी सिर्फ मोटापा ग्रस्त या ज्यादा वजन वाले लोगों को होती है, हालांकि विशेषज्ञ कहते हैं, ओपीडी में ऐसे मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है जिनका वजन तो कंट्रोल में होता है पर उनके लिवर में फैट जमा होने की समस्या देखी जाती है। दुबले-पतले लोग भी फैटी लिवर रोग का शिकार पाए जा रहे हैं। इस तरह के फैटी लिवर को लीन फैटी लिवर या फिर नॉन-ओबेसिटी फैटी लिवर डिजीज कहा जाता है।

अमर उजाला से बातचीत में लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ अभिजीत पाण्डेय कहते हैं, अगर आप कम वजन वाले हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि आपको फैटी लिवर डिजीज नहीं होगी। अगर लाइफस्टाइल ठीक नहीं है तो ये बीमारी किसी को भी हो सकती है।


(पेट की ये आम दिक्कत कहीं बन न जाए जानलेवा, 600% तक बढ़ा सकती है कैंसर का खतरा)
विज्ञापन

3 of 5
लिवर में फैट बढ़ने की समस्या - फोटो : Adobe Stock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

डॉ अभिजीत पाण्डेय बताते हैं, फैटी लिवर रोग का संबंध मेटाबॉलिज्म से होता है। वजन कंट्रोल में होने का मतलब ये नहीं है कि आपका मेटाबॉलिज्म ठीक हो।

कुछ लोगों के लिवर के आसपास फैट जमा हो जाता है, भले ही वे पतले दिखते हों। इसके लिए लाइफस्टाइल में गड़बड़ी, खानपान की गड़बड़ी सहित कई अन्य स्थितियों को जिम्मेदार माना जा सकता है।
 
  • लाइफस्टाइल की गड़बड़ आदतें जैसे ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट और मीठी चीजें खाना, सॉफ्ट ड्रिंक्स और पैकेज्ड स्नैक्स खाने की आदत लिवर की सेहत को नुकसान पहुंचाती है और फैटी लिवर रोग का कारण बन सकती है।
  • शारीरिक गतिविधियों की कमी, नींद पूरी न होना, लंबे समय तक बैठकर काम करना, स्ट्रेस और गट हेल्थ में असंतुलन भी आपमें फैटी लिवर रोग का खतरा बढ़ाने वाले हो सकते हैं, भले ही  आपका वजन कंट्रोल में है।

4 of 5
लिवर की बढ़ती समस्याएं - फोटो : Freepik.com
ये आदतें बढ़ा देती हैं खतरा

वजन कंट्रोल में होने के बाद भी फैटी लिवर का शिकार हो गए हैं तो इसके लिए कुछ कारणों को जिम्मेदार माना जा सकता है।
 
  • लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, व्यायाम नहीं करते हैं तो इससे फैट का मेटाबॉलिज्म बिगड़ने लगता है। इसका असर सीधे लिवर पर पड़ता है और वहां फैट जमा होने लगता है। यानी बाहर से शरीर पतला दिखता है, लेकिन अंदरूनी अंगों में चर्बी जमा हो जाती है।
  • बहुत ज्यादा रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट, शुगर, मीठे पेय, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड खाने से इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस होने पर लिवर फैट को ठीक से प्रोसेस नहीं कर पाता और फैटी लिवर की समस्या हो सकती है।
  • इसके अलावा अगर परिवार में किसी को फैटी लिवर, डायबिटीज या मेटाबॉलिक सिंड्रोम रहा है, तो नॉर्मल वजन वाले व्यक्ति को भी फैटी लिवर होने का खतरा बढ़ जाता है। कुछ जीन लिवर में फैट जमा होने की प्रवृत्ति को बढ़ा देते हैं, भले ही शरीर का वजन सामान्य हो।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
लिवर की बीमारियों का खतरा कैसे कम करें? - फोटो : Freepik.com
भारत में बढ़ती जा रहा हैं लिवर की समस्याएं

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दुनियाभर में लिवर रोगों से होने वाली मौतों में से 18% अकेले भारत से रिपोर्ट किए जा रहे हैं। भारत में, लिवर रोग एक गंभीर जन स्वास्थ्य चिंता का विषय है, जिसमें नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज (एनएएफएलडी) और कई अन्य प्रकार के क्रोनिक लिवर रोग प्रमुख हैं। एम्स के एक अध्ययन में बताया गया है कि लगभग 38% भारतीय आबादी फैटी लिवर से प्रभावित है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं।

इंडियन जर्नल ऑफ क्लिनिकल रिसर्च में छपे एक अध्ययन के अनुसार मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज वाले 60% से अधिक लोगों में लिवर की दिक्कतों का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों में फैटी लिवर डिजीज का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। 



-------------
नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें