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सेहत की बात: बार-बार पड़ जाते हैं बीमार? ये 4 गलतियां हो सकती हैं बड़ी वजह

Fri, 28 Aug 2026 09:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बार-बार बीमार पड़ना हमेशा कमजोर इम्युनिटी का संकेत नहीं होता। नींद की कमी, खराब खान-पान, तनाव, संक्रमण का लगातार संपर्क और कुछ स्वास्थ्य स्थितियां इसकी वजह बन सकती हैं। जानिए किन आदतों पर तुरंत ध्यान देना चाहिए और कब बार-बार होने वाले संक्रमण के लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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बार-बार बीमारी का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या हर बार मौसम बदलते ही आप भी बीमार हो जाते हैं? पहले गला खराब, दो दिन बाद सर्दी-जुकाम और फिर बुखार। बीमारी ठीक हुई तो कुछ दिन बाद दोबारा वही परेशानी। अगर आपके साथ ऐसा बार-बार हो रहा है तो इसे सिर्फ बदलते मौसम का असर मानकर इग्नोर करने की गलती न करें।

जब बात बार-बार होने वाली बीमारियों की आती है तो हम अक्सर मान लेते हैं कि ये इम्युनिटी कमजोर होने की वजह से हो रहा है। ये सच भी है लेकिन हर बार बीमार पड़ने की वजह कमजोर इम्युनिटी ही हो, ऐसा भी जरूरी नहीं है।

हमारी रोज की कुछ आदतें भी बीमारी का रास्ता खोल सकती हैं। मसलन रात में देर तक जागना, अच्छी नींद न लेना, खाना समय पर न खाना, डाइट में जरूरी पोषक तत्वों की कमी शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। ये सभी आपके बार-बार बीमार होने के पीछे के साइलेंट कारण हो सकते हैं। 
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नींद की कमी - फोटो : Freepik.com
डॉक्टर कहते हैं, जिस तरह से दिल्ली-एनसीआर सहित देश के कई राज्यों में स्वाइन फ्लू का दौर चल रहा है, ऐसे में लोगों को बुखार, सर्दी-जुकाम होना सामान्य है। पर अगर आप हर एक-दो महीने में इन समस्याओं का शिकार हो रहे हैं, तो थोड़ा सावधान हो जाने की जरूरत है। एक बार मुड़कर अपनी आदतों की तरफ भी देखिए, कहीं गलती यहां तो नहीं हो रही है? 

कहीं आपकी नींद तो खराब नहीं रहती?

अगर आप लगातार कम सो रहे हैं तो सबसे पहले इसी आदत को सुधारने की जरूरत है। नींद सिर्फ थकान दूर नहीं करती है, ये  शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रक्रिया में भी भूमिका निभाती है। विशेषज्ञों के अनुसार अच्छी और पर्याप्त नींद शरीर को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचाव में मदद करती है।
 
  • रोज देर रात तक मोबाइल चलाना या ऑफिस का काम करना और अलग-अलग समय पर सोना आपकी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। 
  • इसलिए रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें। 
  • वयस्कों के लिए आम तौर पर कम से कम 8-9 घंटे की नींद की सलाह दी जाती है।
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डाइट में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
डाइट में जरूरी पोषक तत्व हैं या नहीं?

शरीर को स्वस्थ रखने के लिए डाइट का संतुलित होना जरूरी है। फल-सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन-फाइबर जैसे पोषक तत्वों को अपने आहार का हिस्सा जरूर बनाएं। इम्यून सिस्टम को मजबूत रखने के लिए पोषण से भरपूर संतुलित भोजन बहुत जरूरी है।
 
  • अगर आपकी डाइट ज्यादातर पैकेज्ड फूड, तला-भुना खाना या बहुत ज्यादा मीठे पेय पर निर्भर है तो इसमें बदलाव जरूरी है।
  • घर का बना खाना और रोजाना मौसमी फल खाना आपको कई बीमारियों से बचाए रखने में मदद कर सकता है।

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हाथों की स्वच्छता जरूरी - फोटो : Amarujala.com/Ai
हाथों की साफ-सफाई का रखते हैं ध्यान?

ऑफिस, स्कूल, भीड़भाड़ वाली जगहों या घर में किसी बीमार व्यक्ति के संपर्क में रहने पर भी संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बार-बार बीमार पड़ने का कारण हमेशा शरीर की कमजोरी नहीं होती। आप कितनी बार संक्रमण के संपर्क में आते हैं, यह भी मायने रखता है।
 
  • हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना संक्रमण फैलने से रोकने के सबसे आसान तरीकों में से एक है। 
  • हाथ धोने से कई तरह के वायरस और बैक्टीरिया का संक्रमण कम किया जा सकता है।
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डॉक्टरी सलाह जरूरी - फोटो : Adobe stock
क्या कहते हैं डॉक्टर?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपको बार-बार संक्रमण हो रहा है या मौसम बदलते ही बीमार हो जाते हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। कुछ स्वास्थ्य स्थितियां संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। हाई ब्लड शुगर के शिकार लोगों में शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता को प्रभावित हो जाती है, ये आपमें बीमारियों का खतरा बढ़ा देती है।
 
  • डायबिटीज के शुरुआती स्थिति में अक्सर कोई खास लक्षण नहीं होते हैं इसलिए इसका देर से पता चल पाता है। इसलिए समय रहते जांच से शरीर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।

समय पर डॉक्टरी सलाह आपमें बीमारी का कारण पता लगाने और बार-बार होने वाली समस्याओं को रोकने में मददगार हो सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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