फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डेंगू का खतरा: सिर्फ प्लेटलेट्स गिरना ही नहीं, ये संकेत भी बताते हैं बीमारी हो रही है गंभीर

Fri, 28 Aug 2026 06:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डेंगू की गंभीरता केवल प्लेटलेट्स की संख्या से तय नहीं होती। बुखार उतरने के बाद पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, नाक-मसूड़ों से खून, अत्यधिक सुस्ती या बेचैनी, सांस लेने में परेशानी और शरीर में तरल जमा होना गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों में तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है।
विज्ञापन
1 of 5
डेंगू का खतरा, हो जाएं अलर्ट - फोटो : Amarujala.com/AI
बरसात के दिनों में मच्छरों के कारण होने वाली डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते दिनों हुई बारिश और जगह-जगह जल जमाव के कारण राजधानी दिल्ली-एनसीआर में डेंगू के मामले बढ़ने लगे हैं।

दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में इस साल अब तक डेंगू के 272 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा मलेरिया के 95 और चिकनगुनिया के 21 मामले दर्ज हो चुके हैं। इतना ही नहीं पिछले एक सप्ताह में डेंगू के 26, मलेरिया के 15 और चिकनगुनिया के दो नए मामले सामने आए हैं।

राजधानी दिल्ली पहले से ही स्वाइन फ्लू का प्रकोप झेल रही है ऐसे में डेंगू के मामलों ने डबल अटैक कर दिया है। एडीज एजिप्टी मच्छरों के कारण होने वाली ये बीमारी कुछ लोगों में गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है। इन्हीं खतरों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को मच्छरों से बचाव को लेकर अलर्ट रहने की सलाह दे रहे हैं।
विज्ञापन

2 of 5
डेंगू-मलेरिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
गंभीर हो सकती है डेंगू की बीमारी

डेंगू का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में प्लेटलेट्स काउंट घूमने लगता है। डेंगू के टेस्ट में इसका कम होना चिंता बढ़ाने लगता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि डेंगू की गंभीरता सिर्फ प्लेटलेट्स काउंट से तय नहीं होती।
 
  • कई बार मरीज की हालत बिगड़ने लगती है। शरीर प्लेटलेट्स की रिपोर्ट से पहले ही खतरे के संकेत देता है।
  • डॉक्टर कहते हैं, अगर आपको तेज बुखार के साथ लगातार पेट में तेज दर्द, उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आने, बहुत ज्यादा सुस्ती जैसी परेशानी हो रही है तो इसे बिल्कुल इग्नोर न करें। ये भी इशारा करते हैं कि बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।
विज्ञापन

3 of 5
डेंगू के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe stock
डेंगू में पेट की दिक्कतों पर भी दें ध्यान
 
  • बुखार के साथ या बुखार कम होने के बाद भी अगर अचानक तेज पेट दर्द शुरू हो जाए तो इसे बिल्कुल हल्के में न लें। पेट में दर्द गंभीर डेंगू का संकेत हो सकता है। डेंगू के मरीजों को उल्टी होने की भी दिक्कत रहती है। बार-बार उल्टी होने की स्थिति में अगर मरीज पानी और दूसरे तरल पदार्थ ठीक से नहीं ले रहा है तो इससे शरीर में डिहाइड्रेशन की दिक्कत बढ़ सकती है।


नाक या मसूड़ों से खून आना
 
  • नाक या मसूड़ों से खून आना डेंगू का गंभीर संकेत हो सकता है। कुछ लोगों में उल्टी या मल में भी खून दिखाई दे सकता है। डॉक्टर कहते हैं, गंभीर स्थिति में डेंगू अत्यधिक रक्तस्राव का कारण बनता है। इसलिए डेंगू के मरीज में किसी भी तरह का असामान्य रक्तस्राव दिखाई दे तो इसे सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने का सामान्य असर मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।

4 of 5
चक्कर आना और कमजोरी - फोटो : Adobe Stock
थकान-कमजोरी की दिक्कत
 
  • गंभीर डेंगू में शरीर से तरल पदार्थ निकलने के कारण खून का संचार प्रभावित हो सकता है। इससे लो ब्लड प्रेशर और शॉक जैसी समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है। इस स्थिति में मरीज को अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होती है। लगातार बढ़ती कमजोरी को सिर्फ बुखार के बाद की थकान मानना सही नहीं है।

अगर डेंगू के मरीज की अचानक सांस फूलने लगे या सांस लेने में दिक्कत हो तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
डेंगू के खतरे - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉक्टर कहते हैं, डेंगू को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि बुखार उतर जाने पर अक्सर लोग मान लेते हैं कि बीमारी ठीक हो गई। हालांकि कई बार डेंगू के गंभीर संकेत अक्सर बुखार कम होने के 24 से 48 घंटे बाद दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बुखार उतरने के बाद भी मरीज की सेहत पर लगातार ध्यान देते रहें।

पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून आने, बहुत ज्यादा सुस्ती, बेचैनी या सांस लेने में परेशानी जैसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डेंगू में प्लेटलेट्स की जांच महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स काउंट से ही बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती।



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें