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Health Tips: अस्थमा की समस्या है तो हो जाइए सावधान, सर्दियों में बढ़ सकती हैं आपकी दिक्कतें, जरूर करें ये उपाय

Wed, 24 Jan 2024 12:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अस्थमा की समस्या - फोटो : iStock
सर्दियों का ये मौसम आपकी सेहत के लिए कई प्रकार से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चे-बुजुर्ग और कुछ प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के शिकार लोगों को ठंडक से बचाव करते रहना बहुत जरूरी हो जाता है। गिरता तापमान ब्लड प्रेशर, शुगर, हृदय रोगों से लेकर सांस की समस्याओं के शिकार लोगों की दिक्कतों को बढ़ाने वाला हो सकता है। यही कारण है कि इस मौसम में लोग अधिक बीमार पड़ते हैं। ऐसे में अगर आपको भी इस तरह की कोई दिक्कत है तो सावधान हो जाने की आवश्यकता है।

सर्दियों का मौसम सांस के रोगियों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या फिर निमोनिया जैसी बीमारियों के शिकार लोगों के लक्षणों को बढ़ाने वाली हो सकती है। हवा में शुष्की और ठंडक के कारण श्वसन तंत्र की समस्याओं के शुरू होने का भी खतर हो सकता है। आइए जानते हैं कि ठंड का मौसम किस प्रकार से श्वसन समस्याओं के शिकार लोगों के लिए समस्याकारक है और बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है?
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सर्दियों में अस्थमा की समस्या - फोटो : Pixabay
ठंड के मौसम में अस्थमा की दिक्कत

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अस्थमा के शिकार लोगों के लिए ये जानना जरूरी है कि किन चीजों से आपकी समस्या ट्रिगर हो सकती है। पर्यावरणीय एलर्जी, बीमारी या तापमान में परिवर्तन इनमें से प्रमुख है। कई लोग बताते हैं कि सर्दियों के महीनों के दौरान उनके लक्षण बढ़ जाते हैं। 

मौसम में बदलाव, हवा में शुष्की के कारण आपके वायुमार्ग में जलन हो सकती है, जिसमें वायुमार्ग की परत में सूजन बढ़ने लगती है। यह जलन-सूजन अस्थमा के लक्षणों को बदतर बना देती है। रोगी को सीने में जकड़न, खांसी, सांस लेने में तकलीफ और घरघराहट जैसी दिक्कतें होने लगती हैं।
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श्वसन समस्याओं का जोखिम - फोटो : iStock
सर्दियों में बढ़ सकती हैं श्वसन समस्याएं

श्वसन रोग विशेषज्ञ बताते हैं, न केवल अत्यधिक गर्मी और ठंड आपके अस्थमा को ट्रिगर करती है, बल्कि तापमान में अचानक बदलाव के कारण भी दिक्कतों के बढ़ने का खतरा रहता है। 

मौसम में बदलाव के अलावा सर्दियों के महीने आमतौर पर श्वसन वायरस में वृद्धि वाले भी होते हैं, जो अस्थमा रोगियों के लिए ट्रिगर होते हैं। इस मौसम में आरएसवी, फ्लू, सामान्य सर्दी और कोविड-19 जैसे संक्रमण के कारण भी अस्थमा पीड़ितों की समस्या बढ़ सकती है। अध्ययनों से पता चलता है कि सर्दियों के महीनों के दौरान वायरल संक्रमण 60 से 70% तक अस्थमा के जोखिमों को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

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सांस के रोगी दें ध्यान - फोटो : getty images
क्या है डॉक्टर्स की सलाह?

डॉ. सलाह देते हैं कि जब मौसम बदलता है तो अस्थमा या सांस के अन्य रोगियों को अपने पल्मोनोलॉजिस्ट की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए। सुनिश्चित करें कि ठंड से बचाव करते रहें, दवाओं में लापरवाही न करें। सर्दियों में गर्म कपड़े पहनें, विशेष रूप से मुंह, नाक और सिर के आसपास के हिस्सों को अच्छी तरह से ढक कर रखें। किसी भी जटिलता से बचाव के लिए इनहेलर हमेशा अपने पास रखें।
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अस्थमा से करें बचाव - फोटो : Pixabay
इन बातों का रखें ध्यान

डॉक्टर कहते हैं, सर्दियों के दौरान अस्थमा के ट्रिगर होने का एक कारण इनडोर प्रदूषण भी हो सकता है। न केवल ठंड का मौसम अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए खतरा है, बल्कि सर्दियों के महीनों में अक्सर घर के अंदर रहना भी इस समस्या को बढ़ा सकता है। अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए धूल के कण और फफूंदी जैसे इनडोर ट्रिगर भी होते हैं। इससे बचने के लिए कमरे में वेंटिलेशन की अच्छी व्यवस्था रखें, बहुत देर से हीटर जलाकर न रखें ये भी समस्याकारक हो सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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