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Alzheimer's Disease: आपको भी सता रहा है दिमाग की बीमारी का डर? वैज्ञानिकों ने बताए पता लगाने के दो कारगर तरीके

Mon, 23 Feb 2026 01:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Alzheimer's Disease Risk Factors: अल्जाइमर रोग, डिमेंशिया का प्रमुख कारण है, जिसमें दिमाग में असामान्य प्रोटीन (एमाइलॉइड और टाउ) जमा हो जाते हैं, जिससे न्यूरॉन्स नष्ट होने लगते हैं। इसके कारण व्यक्ति चीजें भूलने लगता है, परिचित लोगों को पहचानने में कठिनाई होती है। कहीं आपको भी तो इस बीमारी का खतरा नहीं है?
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अल्जाइमर रोग का खतरा - फोटो : Adobe Stock
सोचने-समझने की क्षमता में कमी, समय के साथ कमजोर होती याददाश्त और पहले की तरह से अब सही तरीके से निर्णय न ले पाना अल्जाइमर रोग का संकेत हो सकता है। वैसे तो ये बीमारी आमतौर पर 60 साल के बाद वाले लोगों में होती है, हालांकि कई मामलों में इसे 50 से कम उम्र वालों में भी बढ़ता देखा जा रहा है। अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम रूप है, जिसके कारण धीरे-धीरे दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में 5.5 करोड़ से अधिक लोग डिमेंशिया से प्रभावित हैं और इनमें से लगभग 60-70% मामलों का कारण अल्जाइमर होता है। बदलती जीवनशैली, तनाव, डायबिटीज-हाई ब्लड प्रेशर प्रेशर जैसी क्रॉनिक बीमारियों और कई तरह की पर्यावरणीय स्थितियों को इस बढ़ती समस्या के लिए जिम्मेदार माना जाता है।

अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि विशेषज्ञ दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों में इस बीमारी के खतरे को लेकर अलर्ट कर रहे हैं, इसका मुख्य कारण यहां अक्सर बढ़े हुए प्रदूषण को माना जा रहा है। 

आपको भी तो अल्जाइमर रोग का खतरा नहीं है? इसका पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने दो तरीकों के बारे में बताया है जिससे आप इस बीमारी के जोखिमों का अंदाजा लगा सकते हैं।
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अल्जाइमर रोग का जोखिम - फोटो : Freepik.com
अल्जाइमर रोग और इसका बढ़ता खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अल्जाइमर केवल याददाश्त ही नहीं बल्कि व्यक्ति के व्यवहार, भाषा और दैनिक कार्य करने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। भारत में भी इसके मामलों में तेजी से वृद्धि देखी जा रही है, जिससे यह एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है।

दिमाग में असामान्य प्रोटीन (एमाइलॉइड और टाउ) के जमा होने की वजह से न्यूरॉन्स नष्ट होने लगते हैं। इसके कारण व्यक्ति चीजें भूलने लगता है, परिचित लोगों को पहचानने में भी कठिनाई होती है और निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
 
  • अल्जाइमर रोग का पता लगाने लिए वैज्ञानिकों ने एक खास ब्लड टेस्ट के बारे में जानकारी दी है, जिसकी मदद से 94.5% तक की एक्यूरेसी से इस रोग का निदान किया जा सकता है। 
  • वहीं अल्जाइमर्स सोसाइटी के विशेषज्ञों ने एक खास तरह के लक्षणों को चेक करने वाले कैलकुलेटर के बारे में जानकारी दी है, जो किसी व्यक्ति में इस दिमागी बीमारी का आसानी से पता लगाने में सहायक हो सकती है।
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अल्जाइमर का पता लगाने वाला ब्लड टेस्ट - फोटो : Adobe Stock Photo
ब्लड टेस्ट से चल सकेगा अल्जाइमर रोग का खतरा

अल्जाइमर रोग का समय रहते पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने एक खास तरह के ब्लड टेस्ट के बारे में बताया है जिसकी मदद से इस बीमारी का करीब 95% सटीकता से पता लगाया जा सकता है। जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी में इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया गया है। 

 
  • वैज्ञानिकों ने बताया कि खून में मौजूद p-tau217 नाम का प्रोटीन अल्जाइमर बीमारी का सही पता लगाने में मदद कर सकता है। 
  • अध्ययन में स्पेन के शोधकर्ताओं ने जांच की कि खून पर आधारित बायोमार्कर (जैसे कि p-tau217 प्रोटीन) अल्जाइमर के क्लिनिकल डायग्नोसिस और न्यूरोलॉजिस्ट के अपने डायग्नोसिस पर भरोसे, दोनों से कितने असरदार हो सकते हैं?
  • 50 साल और उससे ज्यादा उम्र के करीब 200 मरीजों के फॉलोअप के बाद पाया गया कि p-tau217 का पता लगाने वाले सिंपल ब्लड टेस्ट से रूटीन क्लिनिकल प्रैक्टिस में इस बीमारी का समय रहते पता लगाने में विशेष मदद मिल सकती है। 
  • क्लिनिकल टेस्ट में डॉक्टरों ने 75.5% मामलों में अल्जाइमर का सही डायग्नोसिस किया, हालांकि जब ब्लड टेस्ट के नतीजों को शामिल किया जाता है, तो डायग्नोस्टिक की एक्यूरेसी बढ़कर 94.5% हो गई। 

डॉक्टरो ने कहा, फॉस्फोराइलेटेड टाऊ एक (p-tau217) प्रोटीन है जो दिमाग में प्राकृतिक रूप से होता है और न्यूरॉन्स यानी सिग्नल ले जाने वाली सेल्स को व्यव्स्थित और स्वस्थ रखने में मदद करता है। दिक्कत तब शुरू होती है जब यह प्रोटीन अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगता है और आपस में चिपक जाता है, जिससे दिमाग की सेल्स के बीच संचार में रुकावट आती है।

समय के साथ, यह दिमाग के काम पर असर डाल सकता है और अल्जाइमर जैसी न्यूरोडीजेनेरेटिव समस्याएं पैदा कर सकता है।
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अल्जाइमर रोग के लक्षणों का कैसे लगाएं पता? - फोटो : Adobe Stock Photo
लक्षणों का पता लगाने वाला चेकलिस्ट

अल्जाइमर रोग का पता लगाने के दूसरे तरीके में अल्जाइमर्स सोसाइटी के वैज्ञानिकों ने एक खास प्रखार के सिम्टम चेकर यानी लक्षणों का पता लगाने वाले कैलकुलेटर के बारे में बताया है। विशेषज्ञों ने कहा, अपने डॉक्टर से बात करने से पहले लक्षणों को नोट करने में ये चेकलिस्ट आपकी मदद कर सकता है जिससे समस्या के निदान में मदद मिल सकती है। इसे ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से प्रयोग में लाया जा सकता है।

अपने जोखिमों को जानने के लिए इस चेकलिस्ट की मदद ले सकते हैं।



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स्रोत:
Impact of blood p-tau217 testing on diagnosis and diagnostic confidence in cognitive disorders: a real-world clinical study


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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