लिवर की बीमारी
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नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज
आंकड़ों के अनुसार
दुनिया की करीब 32 फीसदी आबादी नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज की शिकार है। इस समस्या पर ध्यान न देने या समय पर इलाज न मिल पाने के कारण यह सिरोसिस, लिवर स्कारिंग और कैंसर जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। वैसे तो इस बीमारी के लिए प्रभावी तौर पर कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, हालांकि शोधकर्ताओं ने पाया कि व्यायाम की आदत बनाने से रोगियों को फैटी लिवर की समस्या को कम करने, शारीरिक फिटनेस और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में विशेष मदद मिल सकती है।
नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज को अब मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) के नाम से जाना जाता है।
शारीरिक गतिविधि फैटी लिवर से बचा सकती है
विशेषज्ञों के मुताबिक सभी लोगों को रोजाना 30 मिनट और सप्ताह में कम से कम 150 मिनट के व्यायाम की आदत बनानी चाहिए।
- व्यायाम का हमारे शरीर पर किस प्रकार का प्रभाव होता है इसको जानने के लिए किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि सप्ताह में 150 मिनट के मध्यम स्तरीय व्यायाम की आदत लिवर के फैट को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
पेन स्टेट कॉलेज ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए शोध के अनुसार संपूर्ण फिटनेस के साथ-साथ लिवर की समस्याओं को कम करने में भी व्यायाम की भूमिका हो सकती है। स्वास्थ विशेषज्ञ कहते हैं, इस परिणाम के आधार पर माना जा सकता है कि जिन लोगों को फैटी लिवर की समस्या है, उनके लिए यह सहायक उपचार की तकनीक हो सकती है।
पहले के शोध में भी इस बात पर जोर दिया गया था कि शारीरिक गतिविधि फैटी लिवर की समस्याओं को कम करने में लाभकारी हो सकती है, पर उन अध्ययनों में कितने व्यायाम की जरूरत है, यह स्पष्ट नहीं था।