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Liver Disease: फैटी लिवर वालों के लिए अच्छी खबर, विशेषज्ञों ने बताया आसान तरीका जिससे लिवर भी बोलेगा थैंक्यू

Sat, 15 Aug 2026 09:53 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फैटी लिवर की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए नियमित व्यायाम बेहद फायदेमंद हो सकता है। अध्ययन के मुताबिक, सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की शारीरिक गतिविधि लिवर में जमा अतिरिक्त चर्बी को कम करने और लिवर की सेहत सुधारने में मदद कर सकती है।
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लिवर की बीमारी - फोटो : Adobe Stock
लिवर हमारे शरीर का ऐसा अंग है, जो चुपचाप दिन-रात अपना काम करता रहता है। हम क्या खाते हैं, कितना खाते हैं और कितना एक्टिव रहते हैं, इसका असर भी लिवर पर पड़ता है। आजकल फैटी लिवर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वजन ज्यादा होना, अनहेल्दी खानपान, शराब और लंबे समय तक बैठे रहने जैसी आदतें इसके जोखिम को बढ़ा रही हैं। कई लोगों को तो पता भी नहीं चलता कि उनके लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा हो चुका है।

अमर उजाला में हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया कि डायबिटीज वाले 70% मरीजों में फैटी लिवर का खतरा हो सकता है। जिसका मतलब है कि फैटी लिवर एक गंभीर समस्या है जिसपर गंभीरता से ही ध्यान देने की जरूरत है।

लेकिन राहत की बात यह है कि लिवर की सेहत सुधारने के लिए हमेशा भारी-भरकम एक्सरसाइज या घंटों जिम में पसीना बहाना जरूरी नहीं है।  अध्ययन में सामने आया है कि सप्ताह में करीब 150 मिनट व्यायाम करने से फैटी लिवर वाले लोगों को फायदा मिल सकता है। यानी रोजाना करीब 20-25 मिनट की शारीरिक गतिविधि आपको लिवर की इस बढ़ती बीमारी से बचा सकती है।
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लिवर की बीमारी - फोटो : Adobe Stock
नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज

आंकड़ों के अनुसार दुनिया की करीब 32 फीसदी आबादी नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज की शिकार है। इस समस्या पर ध्यान न देने या समय पर इलाज न मिल पाने के कारण यह  सिरोसिस, लिवर स्कारिंग और कैंसर जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। वैसे तो इस बीमारी के लिए प्रभावी तौर पर कोई विशिष्ट उपचार नहीं है, हालांकि शोधकर्ताओं ने पाया कि व्यायाम की आदत बनाने से रोगियों को फैटी लिवर की समस्या को कम करने, शारीरिक फिटनेस और जीवन की गुणवत्ता सुधारने में  विशेष मदद मिल सकती है।

नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज को अब मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज (एमएएसएलडी) के नाम से जाना जाता है।

शारीरिक गतिविधि फैटी लिवर से बचा सकती है

विशेषज्ञों के मुताबिक सभी लोगों को रोजाना 30 मिनट और सप्ताह में कम से कम 150 मिनट के व्यायाम की आदत बनानी चाहिए।
 
  • व्यायाम का हमारे शरीर पर किस प्रकार का प्रभाव होता है इसको जानने के लिए किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि सप्ताह में 150 मिनट के मध्यम स्तरीय व्यायाम की आदत लिवर के फैट को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकती है।

पेन स्टेट कॉलेज ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए शोध के अनुसार संपूर्ण फिटनेस के साथ-साथ लिवर की समस्याओं को कम करने में भी व्यायाम की भूमिका हो सकती है। स्वास्थ विशेषज्ञ कहते हैं, इस परिणाम के आधार पर माना जा सकता है कि जिन लोगों को फैटी लिवर की समस्या है, उनके लिए यह सहायक उपचार की तकनीक हो सकती है।

पहले के शोध में भी इस बात पर जोर दिया गया था कि शारीरिक गतिविधि फैटी लिवर की समस्याओं को कम करने में लाभकारी हो सकती है, पर उन अध्ययनों में कितने व्यायाम की जरूरत है, यह स्पष्ट नहीं था। 
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लिवर की समस्याएं - फोटो : adobe stock images
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

एसोसिएट प्रोफेसर और हेपेटोलॉजिस्ट जोनाथन स्टाइन कहते हैं, नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज के रोगियों को व्यायाम से लाभ मिल सकता है। हमारे निष्कर्ष के आधार पर ऐसे रोगियों के इलाज के लिए चिकित्सक दवाइयों के साथ व्यायाम करने का सुझाव दे सकते हैं। लिवर की बढ़ती समस्याओं को कम करने में जीवन शैली में सुधार की विशेष भूमिका मानी जाती है।

अगर हम सभी नियमित व्यायाम की आदत बना लेते हैं तो भविष्य में  फैटी लिवर की समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। 
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योग-व्यायाम की बनाएं आदत - फोटो : Adobe Stock
योग-व्यायाम से सेहत में होता है सुधार

इस शोध के लिए 14 अध्ययनों की समीक्षा की गई। फैटी लिवर की समस्या वाले रोगियों की आयु, लिंग, बॉडी मास इंडेक्स, शरीर के वजन में बदलाव जैसे कारकों के डेटा का मूल्यांकन किया गया। अध्ययन में पाया गया है कि जिन लोगों ने नियमित रूप से व्यायाम को दिनचर्या का हिस्सा बनाया उनमें लिवर से संबंधित बिमारियों का जोखिम कम पाया गया। 

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि एरोबिक व्यायाम के साथ योग को भी दिनचर्या में शामिल करके लाभ पाया जा सकता है। बालासन (चाइल्ड पोज), अनुलोम विलोम प्राणायाम और धनुरासन (बो पोज) जैसे अभ्यास की आदत को भी लिवर की सेहत को बेहतर रखने के लिए फायदेमंद पाया गया है। 



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स्रोत: 
Exercise in the Management of Metabolic-Associated Fatty Liver Disease (MAFLD) in Adults: A Position Statement from Exercise and Sport Science Australia


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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