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एंटीबायोटिक दवाएं ले रहे हैं तो सावधान, WHO ने भारत को लेकर दी ये चेतावनी

Tue, 14 Oct 2025 04:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में दुनिया भर में देखा गया हर छह में से एक बैक्टीरियल संक्रमण  एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी था। 
  • भारत में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की दर ज्यादा देखी जा रही है जोकि काफी चिंताजनक है।
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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा - फोटो : amarujala.com
Antibiotic Resistance: दवाओं का असंयमित इस्तेमाल और सेल्फ मेडिकेशन यानी बिना डॉक्टरी प्रिस्क्रिप्शन के खुद से ही दवा लेना एक बड़े खतरे को जन्म देता हुआ दिख रहा है। सिरदर्द, खांसी, बुखार या जुकाम जैसे हल्के संक्रमण में लोग ओवर-द-काउंटर दवा ले रहे हैं, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट करते रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि विशेषतौर पर एंटीबायोटिक दवाओं का असंयमित और बार-बार इस्तेमाल शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ा रहा है, जो आने वाले समय में एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन सकती है।  

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हालिया रिपोर्ट में चिंताजनक आंकड़े साझा किए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में दुनिया भर में देखा गया हर छह में से एक बैक्टीरियल संक्रमण एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी था। ये खतरा साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है।

डब्ल्यूएचओ ने बताया, मूत्र मार्ग और रक्तप्रवाह में संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणुओं में एंटीबायोटिक प्रतिरोध सबसे अधिक देखा गया है जबकि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और यूरो-जेनिटल गोनोरिया इंफेक्शन पैदा करने वाले जीवाणुओं में प्रतिरोध दर कम देखी गई।

विशेषज्ञों ने सावधान किया है कि अगर अभी भी सख्त कदम न उठाए गए तो आने वाले वर्षों में ये समस्या गंभीर रूप ले सकती है।
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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के कारण बढ़ सकती हैं दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
पहले एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के बारे में जानिए 

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तब होता है जब बैक्टीरिया या कवक जैसे रोगाणुओं को मारने के लिए बनाई गई दवाओं (एंटीबायोटिक्स) के प्रति ये रोगाणु बचाव की क्षमता विकसित कर लेते हैं।

एंटीबायोटिक दवाएं मुख्यरूप से संक्रमण की स्थिति में रोगजनकों को खत्म करने के लिए दी जाती हैं, पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति में ये दवाएं काम करना ही बंद कर देती हैं। इस स्थिति में दवा लेने पर भी रोगाणु मरते नहीं बल्कि और बढ़ते रहते हैं। प्रतिरोधी संक्रमणों का इलाज करना कठिन और असंभव भी हो सकता है।
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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का बढ़ती दर - फोटो : Freepik.com
भारत में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की दर ज्यादा

'ग्लोबल एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस सर्विलांस रिपोर्ट 2025' के लेखकों का कहना है कि डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया (जिसमें भारत भी शामिल है) और पूर्वी भूमध्यसागरीय क्षेत्रों (लगभग हर तीन में से एक संक्रमण) में सबसे अधिक प्रतिरोध दर देखी गई। इसके बाद अफ्रीकी क्षेत्रों (पांच में से एक संक्रमण) का स्थान है, जो सभी वैश्विक औसत से ऊपर हैं।

बार-बार एंटीबायोटिक दवाएं लेने से बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति प्रतिरक्षा विकसित कर सकते हैं। यह एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरा है क्योंकि इससे संक्रमण की स्थिति में रोगी पर एंटीबायोटिक दवाएं काम करनी बंद कर सकती हैं, अस्पताल में रहने की अवधि बढ़ सकती है जिससे संभावित रूप से इलाज के खर्च लागत और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे पर बोझ बढ़ सकता है। 

भारत के संदर्भ में बात करें तो पता चलता है कि रक्तप्रवाह संक्रमण के 71 प्रतिशत मामले, जबकि ई. कोलाई के कारण होने वाले 78 प्रतिशत से अधिक संक्रमण एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी थे। 
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बेअसर हो रही हैं एंटीबायोटिक दवाएं - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?

अध्ययन के लेखकों ने कहा, साल 2023 में दुनियाभर में रिपोर्ट किए गए हर छह में से एक जीवाणु संक्रमण एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण हुआ। साल 2018 और 2023 के बीच प्रतिरोध दर में वृद्धि देखी गई, जिसमें विश्लेषण किए गए 40 प्रतिशत से अधिक एंटीबायोटिक दवाओं में 5-15 प्रतिशत की वार्षिक दर से प्रतिरोध में वृद्धि रिपोर्ट हुई है।

विशेषज्ञों ने कहा, एंटीबायोटिक प्रतिरोध आधुनिक चिकित्सा में प्रगति की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है, जिससे दुनियाभर के परिवारों के स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।

लेखकों ने बताया कि इस रिपोर्ट में 104 देशों ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के आंकड़े प्रस्तुत किए हैं जो 2016 में 25 देशों द्वारा साझा किए गए आंकड़ों की तुलना में चार गुना ज्यादा है। लेखकों ने कहा कि यह प्रवृत्ति एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की निगरानी करने के महत्व के बारे में विभिन्न देशों में बढ़ती जागरूकता को दर्शाती है। हालांकि एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के मामलों में वृद्धि गंभीर चिंता का कारण बन सकती है।


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स्रोत
Global antibiotic resistance surveillance report 2025


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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