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Arboviral Diseases: मानसून आते ही बढ़ जाता है डेंगू-चिकनगुनिया का खतरा, अब डब्ल्यूएचओ ने लिया ये बड़ा फैसला

Tue, 15 Jul 2025 07:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दुनियाभर में 560 करोड़ से अधिक लोगों को अर्बोवायरल संक्रमण का खतरा रहता है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पहली बार इसके इलाज को लेकर 'ग्लोबल क्लिनिकल गाइडलाइन' जारी की है।
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मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com
मानसून का समय आते ही दुनियाभर में अर्बोवायरल रोगों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। हर साल इन बीमारियों के कारण हजारों लोगों की मौत हो जाती है। अर्बोवायरल रोग, उन वायरल बीमारियों को कहा जाता है जो संक्रमित कीटों मुख्यतः मच्छरों और टिक्स के काटने से मनुष्यों में फैलता है। ये रोग हल्के बुखार और चकत्ते से लेकर इंसेफेलाइटिस और रक्तस्रावी बुखार जैसी गंभीर तंत्रिका संबंधी जटिलताओं तक का कारण बनते हैं।

डेंगू, पीत ज्वर (येलो फीवर) जीका और चिकनगुनिया जैसे रोग देश में सबसे आम प्रकार के अर्बोवायरल रोग हैं। 

इस बीमारियों के शिकार लोगों के उपचार के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पहली बार 'ग्लोबल क्लिनिकल गाइडलाइन' जारी की है। डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अर्बोवायरल रोग मुख्यरूप से एडीज मच्छरों द्वारा फैलते हैं। वैश्विक स्वास्थ्य के लिए ये एक बढ़ता हुआ खतरा हैं, विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन, शहरीकरण और बढ़ती मानव गतिशीलता के संदर्भ में।

दुनिया भर में 5.6 बिलियन (560 करोड़) से अधिक लोगों को अर्बोवायरल संक्रमण का खतरा है, इसलिए स्वास्थ्य विशेषज्ञों के पास इन बीमारियों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने और इलाज प्रदान करने को लेकर गाइडलाइंस होनी चाहिए।
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डेंगू का खतरा - फोटो : Freepik.com

मच्छर जनित रोगों का खतरा

इससे पहले कि हम डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी किए गए प्रोटोकॉल पर गौर करें, पहले ये जान लेना जरूरी है कि डेंगू-चिकनगुनिया जैसी बीमारियां स्वास्थ्य सेवाओं के लिए किस प्रकार से चुनौतियां बढ़ाती जा रही हैं?
  • डेंगू बुखार एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चिंता का विषय है, जिसके हर साल लाखों मामले सामने आते हैं। साल 2024 में, वैश्विक स्तर पर 1.41 करोड़ डेंगू के मामले सामने आए।
  • वहीं, 6.20 लाख से अधिक मामले चिकनगुनिया के रिपोर्ट किए गए। मानसून के दिनों में इन बीमारियों के कारण स्वास्थ्य सेवाओं पर हर साल अतिरिक्त दवाब भी बढ़ जाता है।

इन समस्याओं पर गौर करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अब ट्रीटमेंट गाइडलाइंस जारी की है।
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मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com
संदिग्ध रोगियों और हल्के स्तर की बीमारी वालों के लिए प्रोटोकॉल

डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी किए गए प्रोटोकॉल के अनुसार संदिग्ध रोगियों और हल्के स्तर की बीमारी वालों को कुछ बातों पर ध्यान देना चाहिए।
  • रोगियों को निर्जलीकरण से बचाने के लिए मौखिक द्रव उपचार (ओआरएस और अन्य उपचार) का प्रयोग करें।
  • दर्द या बुखार के इलाज के लिए पैरासिटामोल का प्रयोग करें।
  • नॉन-स्टेरायडल एंटी-इफ्लेमेटरी दवाओं (एनएसएआईडी) से बचें।
  • हल्के स्तर के रोगियों में कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स के इस्तेमाल से बचें।
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मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का इलाज - फोटो : Adobe stock
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि ये सिफारिशें नवीनतम उपलब्ध साक्ष्यों पर आधारित हैं और नए आंकड़े सामने आने पर इन्हें अपडेट किया जाएगा। जिन क्षेत्रों में अर्बोवायरल रोग बहुत कॉमन हैं वहां इलाज में मदद करने और बेहतर स्वास्थ्य परिणामों की दिशा में ये सुझाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अब गंभीर (अस्पताल में भर्ती) या पुष्ट अर्बोवायरल रोगियों के लिए जारी प्रोटोकॉल जानिए
  • गंभीर स्तर के रोगियों के इलाज के लिए इंटरवेनस हाइड्रेशन (ड्रिप्स) का इस्तेमाल करें।
  • गंभीर मामलों में भी कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और इम्युनोग्लोबुलिन थेरेपी से बचें।
  • लो प्लेटलेट काउंट वाले रोगियों में तब तक प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन से बचें, जब तक कि रक्तस्राव की स्थिति न हो।
  • पीत ज्वर (येलो फीवर) के कारण होने वाले लिवर फेलियर के मामलों में इंटरवेनस एन-एसिटाइलसिस्टीन का उपयोग करें।
  • येलो फीवर के लिए मोनोक्लोनल इम्युनोग्लोबुलिन TY014 और सोफोसबुविर जैसी प्रायोगिक चिकित्सा का उपयोग केवल अनुसंधान स्थितियों में ही करें।


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स्रोत
WHO guidelines for clinical management of arboviral diseases


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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