क्या आपको कभी ऐसा हुआ है कि कमरे में किसी काम से गए लेकिन वहां पहुंचकर याद ही नहीं रहा कि क्यों आए थे? कभी किसी परिचित का नाम अचानक दिमाग से निकल गया या रोज इस्तेमाल होने वाली चीज का नाम याद करने में भी मेहनत करनी पड़ती है? ऐसी छोटी-छोटी भूल को अक्सर उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
लेकिन हर बार भूलने की आदत सामान्य नहीं होती। उम्र बढ़ने के साथ डिमेंशिया का खतरा जरूर बढ़ता है, मगर अब विशेषज्ञों का ध्यान उन कारणों पर भी है जिन्हें बदला या नियंत्रित किया जा सकता है।
चौंकाने वाली बात यह है कि जिस हवा को हम हर दिन सांस के साथ शरीर के अंदर ले रहे हैं, उसका संबंध भी दिमाग की सेहत से जोड़ा जा रहा है। अब तक पीएम 2.5 जैसे बेहद महीन प्रदूषक कण केवल फेफड़ों और दिल के लिए चिंता का विषय नहीं माने जा रहे, अब विशेषज्ञों ने बताया है कि इनके लंबे समय तक संपर्क से मस्तिष्क पर भी असर हो सकता है और इससे याददाश्त की ताकत भी कमजोर होने का खतरा बढ़ सकता है।