डिमेंशिया का जोखिम
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भारतीय आबादी में बढ़ता खतरा
भारत के लिए यह चेतावनी इसलिए अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि देश के कई शहर लंबे समय से अत्यधिक प्रदूषित शहरों की सूची में शामिल हैं। इसके अलावा यहां लोगों में क्रॉनिक बीमारियों के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ये भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 तक दुनिया भर में लगभग 5.7 करोड़ लोग डिमेंशिया का शिकार थे।
- हर साल करीब एक करोड़ नए मरीज इस बीमारी की चपेट में आते हैं।
- साल 2030 तक यह संख्या बढ़कर 7.8 करोड़ और 2050 तक 13.2 करोड़ तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।
भारत में लगभग 10.4 करोड़ लोग 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के हैं। इस आयु वर्ग के करीब 7 प्रतिशत लोग किसी न किसी प्रकार के डिमेंशिया से प्रभावित हैं। इसका अर्थ है कि देश में अनुमानित 60 से 70 लाख लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं या इसके जोखिम में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे बुजुर्ग आबादी बढ़ेगी, यह संख्या भी लगातार बढ़ सकती है।
डब्ल्यूएचओ ने भी आगाह किया है कि आने वाले वर्षों में कम और मध्यम आय वाले देशों पर डिमेंशिया का बोझ सबसे तेजी से बढ़ने की आशंका है।