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Sleep Disorders: रोज एक घंटे भी कम सोना बढ़ा सकता है आपका वजन, डायबिटीज-हृदय रोगों का भी खतरा

Sun, 19 Jul 2026 05:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अगर आप लगातार हर रात सिर्फ 80 मिनट (करीब डेढ़ घंटे) कम सोते हैं, तो इसका असर सिर्फ दिनभर की सुस्ती तक सीमित नहीं रहता। धीरे-धीरे आपका वजन बढ़ सकता है। वजन बढ़ने के कारण डायबिटीज, हृदय रोग जैसी क्रॉनिक बीमारियों का जोखिम भी बढ़ जाता है।
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अच्छी नींद सेहत के लिए जरूरी - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आपकी भी रात की नींद पूरी नहीं हो रही है? रात में वेब सीरीज देख रहते हैं, सोशल मीडिया पर स्क्रॉलिंग करते-करते ज्यादा समय बीत जाता है और सोने के लिए पूरा समय नहीं मिल पाता?  

अगर यही आदत रोज की बन जाए तो क्या होगा? स्वास्थ्य विशषज्ञ कहते हैं, नींद की कमी आपको कई गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकती है। जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है उनमें इंफ्लेमेशन से लेकर क्रॉनिक बीमारियों का जोखिम ज्यादा हो सकता है। 

इसी को लेकर एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने चेताया है कि अगर आप लगातार हर रात सिर्फ 80 मिनट (करीब डेढ़ घंटे) कम सोते हैं, तो इसका असर सिर्फ दिनभर की सुस्ती तक सीमित नहीं रहता। धीरे-धीरे आपका वजन बढ़ सकता है, शरीर की सक्रियता कम हो सकती है और मोटापे का खतरा भी बढ़ सकता है।

हैरानी की बात यह है कि ज्यादातर लोगों को लगता है कि एक-दो घंटे कम सोने से कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता। लेकिन शरीर हर मिनट का हिसाब रखता है। जब उसे पर्याप्त आराम नहीं मिलता, तो वह अपने काम करने के तरीके को बदलना शुरू कर देता है। 

यही बदलाव धीरे-धीरे वजन बढ़ने, ऊर्जा घटने और मेटाबॉलिज्म बिगड़ने जैसी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
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नींद की कमी पड़ सकती है भारी - फोटो : Freepik.com
नींद की कमी का सेहत पर असर

अमेरिकी जर्नल एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित इस नए अध्ययन ने इसी सवाल का जवाब खोजने की कोशिश की कि आखिर रोजाना थोड़ी-सी नींद कम होने का शरीर पर क्या असर पड़ता है? इसमें विशेषज्ञों ने पाया कि  अगर कोई व्यक्ति रोजाना सिर्फ एक घंटे से कुछ अधिक समय की नींद कम लेता है, तो इसका असर उसकी सेहत पर अपेक्षा से कहीं ज्यादा पड़ सकता है।
  
  • अध्ययन में सामने आया है कि लगातार छह सप्ताह तक हर रात लगभग 80 मिनट कम सोने वाले लोगों का वजन बढ़ गया, उनकी शारीरिक सक्रियता घट गई। 
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली में संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम जितने जरूरी हैं, उतनी ही महत्वपूर्ण पर्याप्त नींद भी है। 
 
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मोटापे का खतरा - फोटो : Adobe Stock
अध्ययन में क्या पता चला?

कोलंबिया यूनिवर्सिटी वैगेलोस कॉलेज ऑफ फिजिशियंस एंड सर्जन्स के शोधकर्ताओं ने ये अध्ययन किया है। वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की कि यदि कोई व्यक्ति रोजाना थोड़ी-सी नींद कम लेता रहे, तो उसका शरीर किस तरह प्रतिक्रिया देता है। 
 
  • अध्ययन में 95 स्वस्थ वयस्कों को शामिल किया गया। 
  • प्रतिभागियों ने छह सप्ताह तक अपनी सामान्य दिनचर्या की तुलना में लगभग 90 मिनट देर से सोना शुरू किया, जिससे उनकी कुल नींद औसतन करीब 80 मिनट कम हो गई।
  • अध्ययन के नतीजों में पाया गया कि जिन लोगों की नींद लगातार कम हुई, उनका औसतन लगभग 450 ग्राम वजन बढ़ गया। 
  • यह बढ़ोतरी देखने में भले ही बहुत अधिक न लगे, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि यही स्थिति महीनों या वर्षों तक बनी रहे तो इसका प्रभाव काफी बड़ा हो सकता है। 
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डायबिटीज जैसी बीमारियों का जोखिम - फोटो : Freepik.com
क्रॉनिक बीमारियों का हो सकते हैं शिकार

नींद की कमी का असर केवल वजन तक सीमित नहीं रहा। प्रतिभागी पहले की तुलना में अधिक समय तक निष्क्रिय बैठे रहे और उनकी रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधियां भी कम हो गईं।
 
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि वजन नियंत्रित रखने के लिए केवल संतुलित आहार और नियमित व्यायाम पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। 
  • पर्याप्त और नियमित नींद भी स्वस्थ जीवनशैली का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा है। 
  • जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती, उनमें मोटापा और इसके कारण डायबिटीज, हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।


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स्रोत:
Prolonged Short Sleep and Its Effect on Body Weight and Composition: A Pooled Analysis of Randomized Trials


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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