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सेहत की बात: बेहतर स्वास्थ्य के लिए इन तेलों का कीजिए सेवन, जानिए आपके लिए कौन सा ऑयल है हेल्दी?

Thu, 30 Dec 2021 05:05 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ टिप्स, अमर उजाला, नई दिल्ली
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खाने का तेल - फोटो : pixabay
पिछले कुछ वर्षों में हमारे खान-पान में तेजी से बदलाव आया है, इसके साथ ही स्वस्थ खाने के प्रति भी लोगों में जागरूकता बढ़ी है। लोगों ने भोजन में भी स्वस्थ खाद्य विकल्पों को अपनाना शुरू कर दिया है। भारतीयों के मामले में यह प्रचलित है कि वे तेल-घी का उपयोग अधिक करते हैं। पारम्परिक रूप से घी के अलावा हमारे यहां मूंगफली, सोयाबीन, सूरजमुखी, नारियल, सरसों आदि के तेल का प्रयोग भोजन पकाने के लिए किया जाता है। आजकल इसके अलावा भी कई विकल्प तेजी से भारतीय रसोई में जगह बना रहे हैं। 

यूं तो खाना पकाने का तरीका पूरी दुनिया में अलग-अलग है। कुछ लोग खाने में मक्खन का उपयोग करते हैं तो कुछ ऑलिव ऑयल का। यह लम्बे समय से चर्चा का विषय है कि आखिर कौन सा तेल सेहत के लिए बेस्ट है? इसे लेकर सबकी अलग राय भी है और सलाह भी। यही कारण है कि अब भारत में भी राइस ब्रान ऑयल, ऑलिव ऑयल, कैनोला ऑयल, तिल का तेल, अलसी का तेल आदि का प्रयोग खाना बनाने के लिए किया जाने लगा है। क्यों आखिर तेलों को लेकर इतनी चिंता जरूरी है? क्या वाकई तेल हमारी सेहत पर इतना असर डाल सकते हैं? आइए विस्तार से जानते हैं। 
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भोजन के लिए सही तेल का करें चयन - फोटो : Pixabay
तेल और सेहत का संबंध

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, घी तरह ही संतुलित मात्रा में तेल का उपयोग भी पोषण के लिए जरूरी है। अगर आप रोजाना कम मात्रा में तेल का उपयोग करते हैं, तो कोई भी तेल आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।  मुश्किल तब होती है जब भोजन में तेल का उपयोग बढ़ जाता है। सबसे खास बात जो ध्यान रखने वाली है वह यह कि हर कुकिंग ऑइल का एक स्मोकिंग पॉइंट होता है। वह तापमान जब ऑयल स्थिर नहीं रह पाते। स्मोकिंग पॉइंट पर आकर कोई भी तेल ऑक्सीडाइज होना शुरू हो जाता है जिससे फ्री रेडिकल्स निकलते है। ये फ्री रेडिकल्स शरीर के लिए हानिकारक माने जाते हैं।
 
विशेषज्ञों के मुताबिक स्मोकिंग पॉ पॉइंट के बाद तेल का इस्तेमाल सेहत के लिए घातक हो सकता है। इतना ही नहीं स्मोकिंग पॉइंट से गुजरने के बाद तेल एक्रोलिन नामक तत्व भी छोड़ते हैं जो फेफड़ों के लिए गम्भीर नुकसान पैदा कर सकता है। यही कारण है कि एक बार किसी तेल के उपयोग के बाद उसके दोबारा उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
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कौन से तेल हैं सेहत के लिए अच्छे? - फोटो : PTI
सही तेल का करें चयन
सेहत के लिहाज से कुछ बातों का ध्यान रखकर आप अपने लिए सही तेल का चुनाव कर सकते हैं। जैसे
  • रिफाइंड ऑयल का हम सभी उपयोग करते हैं, लेकिन यहां यह जरूर याद रखें कि इनकी प्रोसेसिंग के वक्त इनके ज्यादातर पोषक तत्व नष्ट हो चुके होते हैं। 
  • अनरिफाइंड ऑयल में पोषक तत्व तो ज्यादा हो सकते हैं लेकिन ये कम स्मोकिंग पॉइंट वाले होते हैं। इसलिए इनका इस्तेमाल सावधानी से करना होता है। 
  • यह भी देखें कि जो तेल आप खरीद रहे हैं वह बीजों और पौधों को निचोड़कर तैयार किया गया है या किसी रसायनिक पदार्थ का उपयोग करके निकाला गया है। 

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ऑलिव ऑयल का सेवन फायदेमंद - फोटो : Pixabay
कौन सा तेल है आपके लिए फायदेमंद
  • ऑलिव ऑयल विटामिन-ई से भरा होने के कारण एंटीऑक्सीडेंट गुण रखता है। मोनोसैचुरेटेड फैट्स की मात्रा अधिक होने के कारण यह एंटीकैंसर और एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से भी युक्त होता है। यह बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करके दिल की सेहत को बेहतर बनाने में भी मदद करता है। 
  • फ्लेक्ससीड ऑयल या अलसी का तेल भी बहुत से गुणों से भरा होता है। इसका सबसे बड़ा गुण है इसमें भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स का होना, जो कि आमतौर पर शाकाहारी भोजन से बहुत कम मात्रा में मिल पाता है। यह विशेषकर आर्थराइटिस के लक्षणों पर नियंत्रण में मदद कर सकता है। साथ ही इसमें विशेषकर ओमेगा-6 फैटी एसिड भी होता है जो दिल की सेहत के लिए बहुत लाभदायक होता है। 
  • राइस ब्रान ऑयल भी आजकल हेल्थ के प्रतिं सतर्क लोगों द्वारा अपनाया जा रहा एक विकल्प है। यह पॉली और मोनो अनसैचुरेटेड फैट्स से भरपूर होता है। इसलिए कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करने के साथ ही दिल के रोगों से बचाव और टाइप-2 डायबिटीज की आशंका को भी कम करता है।
     
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तेल का चयन ध्यान से करें - फोटो : Pixabay
ये तेल भी हैं फायदेमंद
  • तिल का तेल भी एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है। यह खासतौर पर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं जैसे कि पार्किंसन्स डिसीज के खिलाफ बचाव में भूमिका निभाता है। साथ ही ब्लड शुगर के प्रबंधन में भी इसे फायदेमंद माना जाता है। 
  • सनफ्लावर ऑयल का उपयोग वर्षों से किया जाता रहा है। इसमें सैचुरेटेड फैट्स की मात्रा कम होने के कारण यह कई तरह से लाभदायक होता है। इससे ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और मोटापे जैसी स्थितियों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है। 
  • इनके अलावा एवोकाडो ऑयल, सोयाबीन ऑयल, कैनोला ऑयल, आदि भी कई गुणों से भरे होते हैं और सेहत के लिहाज से इनका भी उपयोग किया जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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