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Monsoon Diet Tips: बारिश के मौसम में इन चीजों से बनाएं दूरी, वरना बिगड़ सकती है सेहत

Tue, 23 Jun 2026 05:34 PM IST
Shruti Gaur लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

What to Avoid Eating During the Monsoon: अगर आप चाहते हैं कि बारिश के मौसम में भी आपका स्वास्थ्य खराब न हो, तो कुछ चीजों के सेवन से दूरी बनाना बेहतर है। 
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बारिश के मौसम में इन चीजों से बनाएं दूरी - फोटो : AI
What to Avoid Eating During the Monsoon: मानसून के मौसम में दौरान वातावरण में नमी अधिक होने के कारण फूड पॉइजनिंग, पेट के संक्रमण, वायरल फीवर और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में सिर्फ साफ-सफाई का ध्यान रखना ही काफी नहीं होता, बल्कि खानपान में भी विशेष सावधानी बरतनी पड़ती है। कई ऐसी चीजें हैं जिन्हें लोग सामान्य दिनों की तरह मानसून में भी खाते रहते हैं, लेकिन यही आदत उन्हें बीमार बना सकती है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश के मौसम में कुछ खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित या पूरी तरह बंद कर देना चाहिए ताकि संक्रमण और पाचन संबंधी परेशानियों से बचा जा सके। अगर आप भी मानसून में खुद को फिट और स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो अपनी डाइट में कुछ जरूरी बदलाव करना बेहद महत्वपूर्ण है।
 
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बारिश के मौसम में इन चीजों से बनाएं दूरी - फोटो : AI
हरी पत्तेदार सब्जियों से रहें सावधान
 
  • मानसून में हरी पत्तेदार सब्जियों पर बैक्टीरिया, फंगस और छोटे कीड़े-मकोड़े आसानी से पनप सकते हैं। 
  • पालक, मेथी, सरसों, पत्ता गोभी और लेट्यूस जैसी सब्जियों की पत्तियों के बीच गंदगी और सूक्ष्म जीव छिपे रह सकते हैं। 
  • अगर इनका सेवन ठीक से साफ किए बिना किया जाए तो पेट दर्द, दस्त, उल्टी और फूड इंफेक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
  • इसलिए मानसून में इन सब्जियों को अच्छी तरह धोकर और पकाकर ही खाना चाहिए।

 
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बारिश के मौसम में इन चीजों से बनाएं दूरी - फोटो : AI
स्ट्रीट फूड से बनाएं दूरी
 
  • बारिश के मौसम में सड़क किनारे मिलने वाले खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य के लिए जोखिम बढ़ा सकते हैं।
  •  गोलगप्पे, चाट, समोसे, टिक्की और अन्य खुले खाद्य पदार्थ लंबे समय तक खुले वातावरण में रहते हैं, जहां उन पर धूल, गंदगी और बैक्टीरिया आसानी से जमा हो सकते हैं। 
  • इसके अलावा बारिश और नमी के कारण इन खाद्य पदार्थों में सूक्ष्म जीव तेजी से बढ़ते हैं। 
  • ऐसे भोजन का सेवन करने से फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड, पेट के संक्रमण और डायरिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
  • मानसून में घर का ताजा और स्वच्छ भोजन खाना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

 

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बारिश के मौसम में इन चीजों से बनाएं दूरी - फोटो : AI
कटे हुए फल खाने से बचें
 
  • बारिश के मौसम में बाजारों और ठेलों पर बिकने वाले कटे हुए फल जल्दी खराब हो सकते हैं। 
  • लंबे समय तक खुले में रखने से इन पर बैक्टीरिया और फंगस पनपने लगते हैं।
  •  कई बार ये फल देखने में ताजे लगते हैं, लेकिन इनमें हानिकारक सूक्ष्म जीव मौजूद हो सकते हैं जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  •  ऐसे फल खाने से पेट खराब होना, उल्टी, दस्त और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। 
  • विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि मानसून में हमेशा ताजे फल खरीदें और उन्हें घर पर धोकर काटकर ही खाएं।

 
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बारिश के मौसम में इन चीजों से बनाएं दूरी - फोटो : AI
सी-फूड का सेवन सीमित करें
 
  • मानसून समुद्री जीवों के प्रजनन का मौसम माना जाता है, इस दौरान मछली, झींगा और अन्य सी-फूड की गुणवत्ता कई बार प्रभावित हो सकती है।
  • अगर सी-फूड ताजा न हो या उसे सही तरीके से स्टोर न किया गया हो, तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से विकसित हो सकते हैं।
  •  इससे फूड इंफेक्शन, एलर्जी और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
  •  इसलिए इस मौसम में सी-फूड खरीदते समय उसकी ताजगी पर विशेष ध्यान देना चाहिए और अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए।


  
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बारिश के मौसम में इन चीजों से बनाएं दूरी - फोटो : AI
तले-भुने और ज्यादा मसालेदार भोजन से बचें
 
  • बारिश के मौसम में पाचन तंत्र सामान्य दिनों की तुलना में थोड़ा धीमा काम कर सकता है। 
  • ऐसे में ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और ऑयली भोजन खाने से पेट पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
  •  इससे गैस, एसिडिटी, अपच, पेट फूलना और पेट दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
  • इसके अलावा अधिक तेल वाले खाद्य पदार्थ शरीर में सुस्ती और भारीपन भी बढ़ा सकते हैं।
  •  मानसून में हल्का, ताजा और पोषण से भरपूर भोजन लेना बेहतर माना जाता है, जिससे पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है और संक्रमण का खतरा भी कम होता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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