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Health Tips: कुत्ते के काटने के तुरंत बाद क्या करना चाहिए, कौन-सी लापरवाहियां बढ़ा देती हैं जान का खतरा?

Fri, 23 Jan 2026 09:35 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Rabies Prevention Tips: अक्सर कुछ लोग कुत्ते के काटने पर ऐसी गलतियां करते हैं, जो कई मामलों में जान के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं कि कुत्ते के काटने के बाद क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?
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कुत्ते का काटना - फोटो : Adobe Stock
कुत्ते का काटना एक ऐसी आपातकालीन स्थिति है जिसे हल्की सी भी लापरवाही जानलेवा बना सकती है। भारत में रेबीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और चौंकाने वाली बात यह है कि रेबीज संक्रमण होने के बाद इसका कोई पुख्ता इलाज नहीं है, इसलिए बचाव ही एकमात्र रास्ता है। 

जब कोई कुत्ता काटता है, तो उसके लार में मौजूद खतरनाक वायरस और बैक्टीरिया घाव के जरिए हमारे रक्तप्रवाह में प्रवेश कर जाते हैं। अक्सर लोग घबराहट में घाव पर पट्टी बांध देते हैं या घरेलू नुस्खे जैसे मिर्ची, तेल या हल्दी लगाने लगते हैं, जो संक्रमण को शरीर के अंदर और गहराई तक धकेल सकते हैं। 

इसलिए आइए इस लेख में जानते हैं कि कुत्ता काटने पर तुरंत क्या करना चाहिए। ध्यान रखें कुत्ते के दांत का एक छोटा सा निशान भी रेबीज का कारण बन सकता है, इसलिए तुरंत कदम उठाना और सही जानकारी होना बहुत जरूरी है।
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कुत्ते का काटना - फोटो : Adobe Stock
कुत्ते के काटने के तुरंत बाद घर पर क्या प्राथमिक उपचार करें?
काटने के तुरंत बाद सबसे जरूरी है घाव को बहते हुए पानी और साबुन से कम से कम 10-15 मिनट तक धुलें। साबुन में मौजूद तत्व वायरस की बाहरी परत को नष्ट करने में मदद करते हैं। घाव को रगड़ें नहीं और न ही उस पर पट्टी बांधें, क्योंकि घाव का खुला रहना और ऑक्सीजन के संपर्क में रहना वायरस के प्रसार को धीमा करता है। सफाई के बाद किसी एंटीसेप्टिक लोशन का उपयोग करें और तुरंत डॉक्टर के पास जाएं।

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कुत्ते का काटना - फोटो : Adobe Stock
कौन सी गलतियां संक्रमण और जान के खतरे को बढ़ा देती हैं?
कुत्ते के काटने के बाद की जाने वाली जानलेवा लापरवाहियों को आप इन मुख्य बिंदुओं के जरिए समझ सकते हैं-
 
  • गलत घरेलू उपचार: घाव पर लाल मिर्च, चूना, मिट्टी, तेल या हल्दी जैसा 'देशी इलाज' करना सबसे बड़ी गलती है। ये चीजें वायरस को खत्म करने के बजाय घाव में गंभीर संक्रमण पैदा कर सकती हैं।
  • पालतू कुत्ते को लेकर लापरवाही: अक्सर लोग सोचते हैं कि "पालतू कुत्ते ने काटा है तो वैक्सीन की जरूरत नहीं।" यह एक जानलेवा भूल है; कुत्ता पालतू हो या आवारा, डॉक्टर की सलाह और वैक्सीन अनिवार्य है।
  • टीकाकरण में देरी: काटने के तुरंत बाद टीका न लगवाना वायरस को शरीर में फैलने और तंत्रिका तंत्र तक पहुंचने का मौका देता है। विषेशज्ञों के मुताबिक कुत्ते के काटने के 24 घंटे के भीतर वैक्सीन लगवाना चाहिए।
  • अधूरा वैक्सीन कोर्स: कई लोग एक-दो इंजेक्शन लगवाकर कोर्स छोड़ देते हैं। कोर्स पूरा न करने से शरीर में वायरस के खिलाफ पूरी प्रतिरोधक क्षमता विकसित नहीं हो पाती।
  • घाव को ढकना या पट्टी बांधना: घाव को तुरंत पट्टी से बांधने या टांके लगवाने से वायरस अंदर ही दब जाता है। रेबीज का घाव खुला रखना और ऑक्सीजन के संपर्क में रहना जरूरी है।
  • लक्षणों का इंतजार करना: एक बार यदि रेबीज के लक्षण (जैसे पानी से डर लगना या व्यवहार में बदलाव) दिखने शुरू हो जाएं, तो मृत्यु की संभावना लगभग 100% हो जाती है, क्योंकि रेबीज का कोई इलाज नहीं है, केवल बचाव है।
 

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रेबीज का वैक्सीन - फोटो : Adobe Stock
डॉक्टर से मिलने पर कौन से टीके और इंजेक्शन अनिवार्य हैं?
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर घाव की गंभीरता (Category I, II, or III) के आधार पर 'एंटी-रेबीज वैक्सीन' (ARV) का कोर्स शुरू करते हैं। अगर घाव गहरा है, तो 'रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन' (RIG) का इंजेक्शन सीधे घाव के आसपास दिया जाता है ताकि वायरस को तुरंत बेअसर किया जा सके। इसके साथ ही टिटनेस का इंजेक्शन भी लगाया जाता है। डॉक्टर की सलाह के बिना वैक्सीन की कोई भी डोज न छोड़ें।

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रेबीज का वैक्सीन - फोटो : Adobe Stock
जागरूकता ही रेबीज से बचाव का एकमात्र मंत्र है
कुत्ते के काटने की घटना को कभी भी हल्के में न लें। यह खबर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सही समय पर की गई सफाई और टीकाकरण रेबीज को 100% रोक सकते हैं। अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के लिए प्राथमिक चिकित्सा के इन नियमों को याद रखें। आवारा कुत्तों से दूरी बनाए रखें और अपने पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण कराएं। आपकी सतर्कता ही आपको और समाज को इस घातक बीमारी से सुरक्षित रख सकती है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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