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आयुर्वेद की सलाह: सावन के महीने में इन चीजों के सेवन से करें परहेज, बढ़ सकती हैं पाचन की समस्याएं

Sat, 16 Jul 2022 07:33 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मानसून में आहार का रखें ध्यान - फोटो : istock
बेहतर सेहत के लिए शुद्ध और पौष्टिक आहार के साथ उसकी तासीर और प्रवृत्ति पर भी विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। किस मौसम में क्या खाना चाहिए-क्या नहीं? इसका आयुर्वेद में विस्तृत अध्ययन मिलता है। हिंदी कैलेंडर के अनुसार इस समय सावन का महीना चल रहा है। यह महीना देश में मानसून का माना जाता है। आयुर्वेद विशेषज्ञों के मुताबिक इस मौसम में सभी लोगों को खान-पान को लेकर विशेष सावधानी और सतर्कता बरतते रहने की आवश्यकता होती है।

अन्य मौसम में प्राय: शरीर के लिए फायदेमंद मानी जाने वाली कुछ चीजों का सावन के महीने में सेवन करना कई तरह की समस्याओं का कारण बन सकता है।

सावन का महीना मानसून के समय वाला होता है, ऐसे में इस महीने में वातावरण की आर्द्रता के कारण कई तरह के बैक्टीरिया और वायरस के उपजने का जोखिम होता है। ऐसे में खान-पान को लेकर बरती गई किसी भी तरह की लापरवाही आपमें पाचन तंत्र की समस्याओं का कारण बन सकती है। आइए आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ प्रवीण सिन्हा से जानते हैं कि सावन के महीने में किन चीजों के सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतनी जरूरी  है?
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हरी पत्तेदार सब्जियों को लेकर सावधानी - फोटो : istock
पत्तेदार सब्जियों की मनाही

वैसे तो हरी और पत्तेदार सब्जियों को पोषण और स्वास्थ्य के लिहाज से काफी फायदेमंद माना जाता है फिर भी श्रावण मास के दौरान इनसे बचना चाहिए। इसका मुख्य कारण इन पत्तियों पर बैक्टीरिया या वायरस के उपजने का जोखिम होता है। बारिश के दौरान इनका सेवन पित्त रस के अतिरिक्त स्राव का कारण भी बन सकता है, जिसके कारण पेट में कई तरह की समस्याओं का खतरा रहता है।
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मानसून में दूध से बचाव - फोटो : istock
दूध को लेकर क्या है सलाह?

दूध को आमतौर पर स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है लेकिन सावन के महीने में इसका संयमित सेवन करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है मानसून के इस मौसम में दूध के कारण शरीर में पित्त रस बढ़ सकता है। दूध की जगह आप दही, लस्सी आदि का सेवन कर सकते हैं। इस मौसम में पाचन स्वास्थ्य को लेकर सावधानी बरतना बहुत आवश्यक माना जाता है।

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मांसाहार से पाचन का जोखिम - फोटो : Pixabay
मांसाहार से बचाव

धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों आधार पर सावन के महीने में मांसाहार जैसे चिकन, मांस और मछली आदि के सेवन से परहेज की सलाह दी जाती है। बारिश का मौसम कीटाणुओं के प्रजनन के लिए उपयुक्त होता है ऐसे में मांस आदि को लेकर बरती गई किसी भी प्रकार की अस्वच्छता इसे संक्रामक बना सकती है। अनहाइजेनिक रूप से इन चीजों के रखरखाव और सेवन के कारण फूड पॉइजनिंग का खतरा हो सकता है। 
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बैंगन खाने को लेकर सावधानियां - फोटो : Pixabay
बैंगन न खाएं

मानसून, विशेषकर सावन के इस मौसम में बैंगन की सब्जी भी न खाने की सलाह दी जाती है, इसका मुख्य कारण इसमें कीड़ों का होना माना जाता है। इस मौसम में बैंगन में कीड़े पड़ने का खतरा अधिक होता है जो इस सब्जी को दूषित कर देता है। ऐसे में इसके सेवन के कारण पाचन तंत्र की समस्याओं का जोखिम कई गुना तक बढ़ जाता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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