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Heart Health Alert: क्या कहती है आपकी कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट? ये रीडिंग दिल की सेहत पर पड़ सकती है भारी

Sat, 13 Jun 2026 06:45 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

डॉक्टरों के अनुसार कुल कोलेस्ट्रॉल 240 mg/dL या उससे अधिक होने पर हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। वहीं LDL कोलेस्ट्रॉल 160 mg/dL से ऊपर पहुंचने पर धमनियों में प्लाक जमने की प्रक्रिया तेज हो सकती है। 
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
खान-पान की गड़बड़ी का वैसे से पूरे शरीर पर गंभीर असर होता है, पर हृदय स्वास्थ्य पर इसका नकारात्मक असर काफी ज्यादा देखा जा रहा है। जंक फूड्स, तली-भुनी चीजें ज्यादा खाने, नमक और चीनी की अधिकता हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाली मानी जाती है, जिसका दिल की सेहत पर सीधा असर पड़ता है।

हाई कोलेस्ट्रॉल मौजूदा समय की सबसे आम, लेकिन खतरनाक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुका है। चिंता की बात यह है कि ज्यादातर मामलों में तब तक पता ही नहीं चलता कि आपका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, जब तक कोई गंभीर समस्या जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक या ब्लॉकेज सामने नहीं आ जाती। 

कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार का होता है- बैड और गुड। गुड कोलेस्ट्रॉल हार्मोन बनाने, कोशिकाओं की मरम्मत और विटामिन डी के निर्माण में मदद करता है। लेकिन जब रक्त में बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है, तो यह धमनियों की दीवारों पर जमा होकर प्लाक बनाना शुरू कर देता है। इससे रक्त प्रवाह बाधित होता है और हृदय रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल रखना जरूरी - फोटो : adobe stock
कितना होना चाहिए कोलेस्ट्रॉल लेवल?

अब सवाल ये है कि कब हमें समझ लेना चाहिए कि कोलेस्ट्रॉल समस्याएं बढ़ाने वाला हो गया है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 30 की उम्र के बाद सभी लोगों को नियमित रूप से लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराते रहना चाहिए, इससे कोलेस्ट्रॉल की स्थिति का अंदाजा होता है। 
 
  • विशेषज्ञों के अनुसार टोटn कोलेस्ट्रॉल 200 mg/dL से कम होना चाहिए।
  • बैड कोलेस्ट्रॉल 100 mg/dL से कम होना चाहिए। 
  • गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर 60 mg/dL से अधिक होना चाहिए। 
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हृदय रोग, हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : adobe stock photos
कब बढ़ जाता है हार्ट अटैक का खतरा?

हृदय रोग विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल लेवल सामान्य से अधिक बना रहता है उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक की आशंका सामान्य लोगों की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है।
 
  • डॉक्टरों के अनुसार ब्लड टेस्ट में टोटल कोलेस्ट्रॉल 240 mg/dL या उससे अधिक होने पर हृदय रोगों का खतरा काफी बढ़ जाता है। 
  • बैड कोलेस्ट्रॉल अगर 160 mg/dL से ऊपर पहुंच जाए तो ये धमनियों में प्लाक जमने की प्रक्रिया को तेज कर देती है। 

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कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
कैसे जानें कोलेस्ट्रॉल हाई तो नहीं?

डॉक्टर कहते हैं, हाई कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक कई मामलों में कोई संकेत नहीं देता है, इसलिए टेस्ट जरूरी है। व्यक्ति पूरी तरह सामान्य महसूस कर सकता है, जबकि अंदर ही अंदर धमनियों में ब्लॉकेज बढ़ रही होती है। 

कई मामलों में पहली बार हार्ट अटैक, स्ट्रोक या एंजाइना होने पर ही कोलेस्ट्रॉल की समस्या का पता चलता है। यही कारण है कि 30 वर्ष की उम्र के बाद नियमित लिपिड प्रोफाइल जांच कराने की सलाह दी जाती है।
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हृदय रोगों का खतरा कैसे कम करें - फोटो : Freepik.com
कोलेस्ट्रॉल कम रखने के लिए क्या करें?

डॉक्टर कहते हैं, खान-पान में सुधार करके हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या को कम किया जा सकता है।  
 
  • ओट्स, जौ, दालें, फल-सब्जियां, अलसी के बीज, अखरोट और बादाम जैसे खाद्य पदार्थ कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में सहायक माने जाते हैं। 
  • इनमें घुलनशील फाइबर अधिक होता है, जो बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।
  • नियमित रूप से व्यायाम भी गुड कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने और बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद कर सकता है।
  • वॉकिंग, साइकिलिंग, तैराकी जैसे व्यायाम हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं। ये वजन, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल रखते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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