फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sleeping: अच्छी सेहत का मंत्र है अच्छी नींद, जानिए क्या है जीरो ग्रैविटी स्लीप पोजिशन जिसकी बढ़ रही है मांग

Thu, 13 Aug 2026 08:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जीरो-ग्रैविटी स्लीप पोजीशन की शुरुआत नासा ने अपने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए की थी। अंतरिक्ष में शरीर एक खास मुद्रा में खुद को ढाल लेता है, जिसे न्यूट्रल बॉडी पॉश्चर कहा जाता है। यह पोजिशन खास तरह के बेड की मदद से हासिल की जाती है। इसमें सिर और पैर ऊपर उठे होते हैं और घुटने थोड़े मुड़े होते हैं।
विज्ञापन
1 of 4
नींद जरूरी है - फोटो : Amarujala.com/AI
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए जितना जरूरी अच्छा खान-पान है, उतना ही जरूरी है रोजाना रात में 7-9 घंटे की नींद लेना। नींद के दौरान दिमाग दिनभर मिली सूचनाओं को व्यवस्थित करता है, शरीर के कई ऊतक खुद को ठीक करते हैं, हार्मोनल प्रक्रियाएं चलती हैं। यानी नींद सिर्फ आराम नहीं है, ये शरीर को रिफ्रेश करने का जरूरी उपाय भी है।

नींद की कमी के कारण सिर्फ अगली सुबह शरीर सुस्त और थकान में ही नहीं रहता। लगातार नींद पूरी न होने से मूड, ध्यान लगाने में परेशानी के साथ, सीखने और निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है। 

क्या आपकी नींद रोजाना पूरी हो रही है? अच्छी नींद के लिए जीरो-ग्रैविटी स्लीप की मांग भी बढ़ रही है। आइए इसके बारे में जान लेते हैं।
विज्ञापन

2 of 4
ब्रेन के लिए फायदेमंद है अच्छी नींद - फोटो : Adobe Stock
अच्छी नींद दिमाग और याददाश्त के लिए क्यों जरूरी है?

अगर आप पढ़ी हुई चीजें याद रखने, काम पर ध्यान लगाने या तेजी से निर्णय लेने में परेशानी महसूस करते हैं, तो इसका एक कारण नींद की समस्याएं भी हो सकती हैं।
 
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स एंड स्ट्रोक के अनुसार नींद सीखने और स्मृति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 
  • दिनभर प्राप्त जानकारी को याददाश्त में व्यवस्थित करने की प्रक्रिया में नींद मदद करती है। 
  • नींद का असर सिर्फ याददाश्त तक सीमित नहीं है। पर्याप्त नींद मूड और भावनात्मक नियंत्रण के लिए भी महत्वपूर्ण है। नींद की कमी चिड़चिड़ापन और भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को बढ़ा सकती है।

आइए जान लेते हैं कि अच्छी नींद के लिए  जीरो-ग्रैविटी स्लीप क्या है?
विज्ञापन

3 of 4
नींद को कैसे सुधारें? - फोटो : Freepik.com
जीरो-ग्रैविटी स्लीप पोजिशन

नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए लोग कई तरीके आजमा रहे हैं। इन्हीं में से एक है जीरो- ग्रैविटी स्लीप पोजिशन

जीरो-ग्रैविटी स्लीप पोजिशन की शुरुआत नासा ने अपने अंतरिक्ष यात्रियों के लिए की थी। अंतरिक्ष में शरीर एक खास मुद्रा में खुद को ढाल लेता है, जिसे न्यूट्रल बॉडी पॉश्चर कहा जाता है। यह पोजिशन खास तरह के बेड की मदद से हासिल की जाती है। इसमें सिर और पैर ऊपर उठे होते हैं और घुटने थोड़े मुड़े होते हैं।

मेरसी स्पाइन सेंटर की स्पेशलिस्ट डॉ. मारा वुचिच के मुताबिक, यह पोजिशन पीठ दर्द पीड़ितों को राहत दिला सकती है। यह रीढ़ की हड्डी को सीधा रखने में मदद करती है। इस दौरान घुटने व हाथ थोड़े मुड़े होते हैं। यही पोजिशन अब दुनियाभर में नींद के लिए भी अपनाई जा रही है। 

क्या हैं इसके लाभ?

जीरो ग्रैविटी स्लीप पोजिशन में शरीर का वजन गद्दे पर बराबर बंटता है। इससे रीढ़ पर दबाव कम होता है।
 
  • खासकर सोने के दौरान जब पैर ऊपर होते हैं तो खून वापस दिल की ओर बहता है।
  • इससे पूरे शरीर का ब्लड सर्कुलेशन बेहतर हो सकता है। यह पोजिशन खासतौर पर पैरों की सूजन कम करने में भी मददगार है।

स्टैमफोर्ड हेल्थ की ऑक्युपेशनल थैरेपिस्ट केरी बैडी कहती हैं कि सिर ऊंचा होने से सांस की नली खुली रहती है, जिससे खर्राटे कम हो सकते हैं। हालांकि बार बार करवट लेने वालों के लिए यह पोजिशन सही नहीं है। पुरानी बीमारी से परेशान लोगों इसे अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
विज्ञापन

4 of 4
नींद की गुणवत्ता कैसे सुधारें? - फोटो : Freepik.com
नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए और क्या करें?

अच्छी नींद के लिए स्लीप हाइजीन की कुछ आदतों पर ध्यान देने की सलाह देते हैं।
 
  • रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने का अभ्यास बनाएं।
  • सोने का शांत और आरामदायक वातावरण बनाने तथा सोने से पहले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है।
  • कैफीन का असर कई घंटों तक शरीर में रह सकता है, इसलिए सोने से कुछ घंटे पहले कैफीन लेने वाले लोगों की नींद प्रभावित हो सकती है।
  • सोने से पहले भारी भोजन और शराब से भी बचना जरूरी है। ये चीजें भी नींद की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली हो सकती हैं।



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें