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Health Alert: ब्लड टेस्ट में बार-बार आ रहा है हाई ट्राइग्लिसराइड? हो जाएं सावधान, आपके ये तीन अंग खतरे में

Thu, 12 Feb 2026 08:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हाई ट्राइग्लिसराइड का असर सिर्फ दिल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पूरे शरीर को प्रभावित करता है। सबसे बड़ा खतरा हृदय रोग का होता है, क्योंकि यह एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के साथ मिलकर धमनियों को सख्त और संकरी बना देता है। इसके अलावा दो और अंगों की दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
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हाई ट्राइग्लिसराइड के क्या कारण हैं? - फोटो : Freepik.com
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम तो जरूरी है ही साथ ही जरूरी है नियमित रूप से हेल्थ चेकअप कराते रहना। खराब जीवनशैली, खानपान में गड़बड़ी और तनाव के कारण कई बीमारियां बिना लक्षण के शरीर में पनपती रहती हैं, जिनका समय रहते पता लगाना जरूरी हो जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर हम सभी नियमित हेल्थ चेकअप की आदत बना लेते हैं तो इससे कई गंभीर बीमारियों का समय रहते आसानी से पता लगाकर उनका इलाज किया जा सकता है। जिस तरह से दिल की बीमारियां सभी उम्र वालों में देखी जा रही हैं, ऐसे में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट एक जरूरी टेस्ट है।

नियमित हेल्थ चेकअप शरीर की अंदरूनी स्थिति का आईना होता है। इससे ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं शुरुआती स्टेज में पकड़ में आ जाती हैं। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट खून में मौजूद फैट के स्तर को मापता है, जिसमें टोटल कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड का पता चलता है। अगर ये अक्सर बढ़े रहते हैं तो इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम हो सकता है। 

क्या हर बार ब्लड टेस्ट में आपका ट्राइग्लिसराइड लेवल अक्सर हाई आता है? आइए जान लेते हैं इसके क्या नुकसान हो सकते हैं?
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ट्राइग्लिसराइड बढ़ने का क्या कारण है? - फोटो : Adobe Stock Images
पहले जान लीजिए ट्राइग्लिसराइड होता क्या है?

ट्राइग्लिसराइड एक तरह का फैट है, जो शरीर को ऊर्जा देने के लिए जरूरी माना जाता है। जब हम जरूरत से ज्यादा कैलोरी वाली चीजें खाते हैं तो इससे ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ने लग जाता है। शरीर में अतिरिक्त कैलोरी, अल्कोहल और शुगर ट्राइग्लिसराइड्स में बदल जाते हैं। ज्यादा तला-भुना और मीठा खाना, जरूरत से ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें भी ट्राइग्लिसराइड के स्तर को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

अगर खून में इसका स्तर 150 mg/dL से ऊपर चला जाए तो इसे हाई ट्राइग्लिसराइड माना जाता है।
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दिल की सेहत पर क्या असर होता है? - फोटो : adobe stock images
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, खून की जांच में अक्सर लोग सिर्फ कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान देते हैं, लेकिन ट्राइग्लिसराइड की अनदेखी भारी पड़ सकती है। जिन लोगों का ट्राइग्लिसराइड लेवल अक्सर 150 से ऊपर बना रहता है उन्हें अलर्ट हो जाना चाहिए।
 
  • ट्राइग्लिसराइड लेवल 200 के पार जाने पर दिल की धमनियों में चर्बी जमने लगती है।
  • कार्डियोलॉजिस्ट डॉ वी.के. रस्तोगी बताते हैं, लिपिड प्रोफाइल में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड दोनों बढ़े हों तो जटिलताएं और ज्यादा हो सकती हैं।
  • ट्राइग्लिसराइड बढ़ने से सबसे बड़ा खतरा हृदय रोग का होता है, क्योंकि यह बैड कोलेस्ट्रॉल के साथ मिलकर धमनियों को सख्त और संकरी बना देता है।
  • दिल की सेहत के साथ-साथ हाई ट्राइग्लिसराइड वाले लोगों के शरीर के कई अन्य अंगों पर भी असर पड़ सकता है।

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लिवर पर भी होता है असर - फोटो : Adobe Stock
दिल के साथ इन अंगों को भी खतरा

डॉ रस्तोगी कहते हैं, हाई ट्राइग्लिसराइड सिर्फ दिल की सेहत के लिए खतरा नहीं है। इसका असर लिवर और पैंक्रियाज पर भी पड़ता है। ट्राइग्लिसराइड ज्यादा होने से फैटी लीवर की समस्या पैदा होती है।
  • डायबिटीज के मरीजों में यह और तेजी से बढ़ता है। 500 से ऊपर जाने पर पैंक्रियाटाइटिस जैसी जानलेवा स्थिति बन सकती है।
  • खास बात यह है कि शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। यही वजह है कि मरीज तब डॉक्टर तक पहुंचता है, जब नुकसान हो चुका होता है। 
  • बहुत ज्यादा ट्राइग्लिसराइड होने पर पैंक्रियाटाइटिस जैसी गंभीर समस्या भी हो सकती है, जिसमें अग्न्याशय में सूजन आ जाती है। इसके अलावा फैटी लिवर की समस्या भी हाई ट्राइग्लिसराइड से जुड़ी हुई है।
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खान-पान में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
ट्राइग्लिसराइड को कैसे कंट्रोल किया जाए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते है, कुछ सावधानियां बरतकर हाई ट्राइग्लिसराइड को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
  • खान-पान में सुधार करना ट्राइग्लिसराइड को कंट्रोल करने के लिए सबसे जरूरी है। मक्खन, क्रीम, नॉनवेज, तला-भुना और मीठा इसका सबसे बड़ा दुश्मन है, इनका सेवन कम से कम करें।
  • शराब और ज्यादा चीनी खाना भी ट्राइग्लिसराइड को बढ़ाने वाली हो सकती है।
  • नियमित व्यायाम और वजन कंट्रोल करने से इसे काफी हद तक टाला जा सकता है। 
  • रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की जगह साबुत अनाज, फल, सब्जियां और फाइबर युक्त आहार लें। ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर मछली, अलसी और अखरोट ट्राइग्लिसराइड कम करने में मददगार माने जाते हैं। 
  • सप्ताह में कम से कम 150 मिनट व्यायाम करना कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड दोनों को कंट्रोल रखने में मददगार है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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