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Third-Hand Smoke: कहीं आप थर्ड-हैंड स्मोकिंग का शिकार तो नहीं? जानिए कैसे और कौन हो सकता है प्रभावित

Wed, 21 Feb 2024 03:42 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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थर्ड हैंड स्मोकिंग - फोटो : अमर उजाला
प्रभा किरण

स्मोकिंग और सेकंड-हैंड स्मोकिंग के नुकसान तो आप जानते ही होंगे, लेकिन क्या आप थर्ड-हैंड स्मोकिंग के बारे में जानते हैं? यह हमारे शरीर को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाती है, खासतौर से बच्चों और बुजुर्गों को। स्मोकिंग हर मायने में हमारे शरीर को कई तरीकों से नुकसान पहुंचाती है। फर्स्ट-हैंड स्मोकिंग यानी धूम्रपान करने वाला व्यक्ति और सेकंड-हैंड यानी सांस के माध्यम सिगरेट के धुएं को अंदर लेने वाला व्यक्ति। ये दोनों ही निकोटिन और अन्य जहरीले केमिकल्स को सांस के जरिए शरीर के अंदर ले लेते हैं, जो हृदय संबंधी समस्याओं, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर की वजह बन सकते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि थर्ड-हैंड स्मोकिंग भी उतनी ही ज्यादा नुकसानदायक है, जितनी कि ये दोनों। धूम्रपान बंद करने के बाद भी थर्ड-हैंड धुआं कई महीनों तक वातावरण में बना रह सकता है। ऐसे में आपको थर्ड-हैंड स्मोकिंग के बारे में जानना जरूरी है, ताकि आप यह समझ सकें कि अनजाने में कहीं आप भी तो थर्ड-हैंड स्मोकिंग का शिकार नहीं हो रही हैं?
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थर्ड हैंड स्मोकिंग - फोटो : Pixabay
क्या है थर्ड हैंड स्मोकिंग

थर्ड-हैंड स्मोकिंग के नुकसान को जानने से पहले इसके बारे में जान लेना जरूरी है। जब कोई स्मोकिंग करता है तो सिगरेट का धुआं उसके अंदर प्रवेश करता है। इसे फर्स्ट-हैंड स्मोकिंग कहा जाता है। अगर उस जगह कोई व्यक्ति भी मौजूद है तो सिगरेट का धुआं उसके अंदर भी प्रवेश करता है, जिसे सेकंड-हैंड स्मोकिंग कहा जाता है। लेकिन सिगरेट से निकलने वाला धुआं और अन्य हानिकारक केमिकल्स आस-पास की जगहों एवं चीजों पर चिपक जाते हैं। यही नहीं, धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के हाथों तथा कपड़ों आदि के माध्यम से भी हानिकारक तत्व दूसरे व्यक्तियों के संपर्क में आ सकते हैं और उन्हें भी नुकसान पहुंचा सकते हैं, जबकि वे धूम्रपान नहीं करते हैं। इसे ही थर्ड-हैंड स्मोकिंग कहा जाता है। यह कई माध्यमों से आपको प्रभावित कर सकता है। मसलन, प्रभावित चीजों और कपड़ों को छूने तथा ऐसे स्थानों पर सांस लेने से भी आप इसके संपर्क में आ सकती हैं। थर्ड-हैंड स्मोक अगर इनडोर वायु प्रदूषण के साथ मिल जाए तो यह अत्यधिक खतरनाक हो सकता है।
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थर्ड हैंड स्मोकिंग - फोटो : Pixabay
राख में हैं हानिकारक तत्व

थर्ड-हैंड स्मोकिंग के धुएं में मौजूद रसायनों में निकोटिन के साथ-साथ कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ, जैसे कि आर्सेनिक, टार, फॉर्मेल्डिहाइड, नेफ़थलीन और अन्य रसायन शामिल होते हैं, जो कई प्रकार से हानि पहुंचाते हैं।

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थर्ड हैंड स्मोकिंग - फोटो : pixabay
किन्हें ज्यादा खतरा

थर्ड-हैंड स्मोकिंग बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए परेशानियां खड़ी कर सकता है। छोटे बच्चों में अविकसित प्रतिरक्षा प्रणाली के कारण उन्हें इससे सबसे अधिक जोखिम होता है। इससे बच्चों में खांसी, सांस लेने में तकलीफ, फेफड़ों में अधिक संक्रमण होना (जैसे ब्रोंकाइटिस एवं निमोनिया) अस्थमा और कानों में इंफेक्शन होने की आशंका बनी रहती है। अगर नवजात शिशु इसके संपर्क में आता है तो उसे सांस संबंधी परेशानियां हो सकती हैं और वह बार-बार बीमार पड़ सकता है। महिलाओं और बुजुर्गों में थर्ड-हैंड स्मोकिंग से किडनी, मुंह तथा गले की बीमारियां और कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। साथ ही गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भ में पल रहे शिशुओं के लिए भी यह खतरनाक साबित हो सकता है।
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पशु से थर्ड हैंड स्मोकिंग - फोटो : Istock
पशु भी बनते हैं जरिया

थर्ड-हैंड स्मोकिंग आपको ही नहीं, बल्कि आपके पालतू पशु के लिए भी खतरनाक होती है। धूम्रपान के बाद खतरनाक तत्व सतह और हवा में फैल जाते हैं। जब आपका पालतू पशु उस वातावरण में जाता है तो इसके तत्व उसके पैरों और बालों से चिपक जाते हैं, जिससे वह थर्ड-हैंड स्मोकिंग का माध्यम बन जाता है। वह जहां-जहां जाएगा, ये तत्व भी वहां पर फैल जाएंगे। अगर वह आपके बच्चों के पास जाता या खेलता है तो बच्चे भी थर्ड-हैंड स्मोकिंग का शिकार बन सकता है। इसलिए घर को साफ करने के साथ ही अपने पशुओं को भी नहलाएं।
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Smoking in car - फोटो : pexel
बचाव भी जान लें
 
  • थर्ड-हैंड स्मोकिंग का शिकार आप कपड़ों या घर की अन्य चीजों के माध्यम से भी बनती हैं। इसलिए अगर आपका घर या आप खुद इसके संपर्क में आई हैं तो अपने सभी कपड़ों, कालीन, डोर मैट, चादरों और परदों को धोएं। फर्श, दीवारों, फर्नीचर और घर की अन्य जगहों को अच्छी तरह साफ करें।
  • यदि आपके घर में बच्चे हैं तो उनके खिलौनों को भी अच्छी तरह साफ करें, क्योंकि धुएं के अवशेष इन खिलौनों पर भी जमा हो सकते हैं और आपके बच्चे के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं। थर्ड-हैंड स्मोकिंग से बचने के लिए और उसके अवशेषों को दूसरों तक फैलने से रोकने के लिए धूम्रपान करने वाला व्यक्ति घर आते ही बालों को धोकर नहा ले और अपने कपड़े बदल दे। साथ ही उसके सभी सामानों को अच्छी तरह साफ करें।
  • बच्चों और बुजुर्गों के संपर्क से पहले यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। घर में किसी को सिगरेट पीने की लत है तो उसे घर में धूम्रपान न करने दें और ध्यान रखें कि वह राख को इधर-उधर न झाड़े, बल्कि वह ऐश-ट्रे का ही इस्तेमाल करे और फिर राख को कूड़ेदान में डाल दे।
  • बंद कमरे या गाड़ियों के अंदर धूम्रपान करने से आस-पास मौजूद लोगों को रोकें। सिगरेट पीने वाले व्यक्ति से उचित दूरी बनाएं और जब भी आप बाहर या भीड़ वाले इलाके में जाएं तो मुंह पर मास्क लगाकर रखें।
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थर्ड-हैंड स्मोकिंग और कैंसर - फोटो : istock
सावधान रहना जरूरी है

सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मीनू वालिया बताती हैं, थर्ड-हैंड स्मोकिंग का मतलब धूम्रपान के वे अवशेष हैं, जो सतहों पर और धूल में सिगरेट बुझाने के बाद बच जाते हैं। ये अवशेष धूम्रपान करने के बाद दिनों, सप्ताहों या महीनों तक बने रह सकते हैं। थर्ड-हैंड स्मोकिंग में एक संयुक्त मिश्रण होता है, जिसमें कुछ रासायनिक तो कुछ कैंसर पैदा करने वाले विषैले पदार्थ होते हैं। थर्ड-हैंड स्मोकिंग के स्वास्थ्य पर होने वाले प्रभाव के अध्ययन अभी कम ही किए गए हैं, लेकिन कुछ अध्ययनों ने इससे होने वाले खतरे की ओर संकेत दिए हैं।

अभी तक मनुष्यों में थर्ड-हैंड स्मोकिंग से होने वाले नुकसान की तो बात की गई है, लेकिन थर्ड-हैंड स्मोकिंग और कैंसर के बीच कोई सीधा संबंध स्थापित नहीं हो पाया है। हालांकि कुछ अध्ययनों ने इसके कैंसर पैदा करने वाले तत्वों से संबंधित चिंताओं को उठाया है।

2010 में अमेरिका के ‘म्यूटाजेनेसिस’ नामक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में सामने आया कि थर्ड-हैंड स्मोकिंग के संपर्क में आने से मानव कोशिकाओं में डीएनए को हानि पहुंचती है। अन्य अनुसंधानों ने दिखाया है कि थर्ड-हैंड धूम्रपान में पाए जाने वाले कुछ रासायनिक विषाणुओं के हवा में मौजूद प्रदूषकों के साथ मिलने से संभावित रूप से कैंसरजनक तत्वों का निर्माण होता हैं।

थर्ड-हैंड स्मोकिंग को कैंसर से संबंधित जोखिमों के साथ जोड़ने के लिए सबूत उतनी मात्रा में नहीं हैं, जितने कि फर्स्ट-हैंड और सेकंड-हैंड धूम्रपान के लिए हैं, लेकिन थर्ड-हैंड धूम्रपान से संबंधित अधिकतम संरक्षण के लिए सावधान रहना जरूरी है, विशेष रूप से नवजात शिशुओं, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और उम्रदराज व्यक्तियों के लिए।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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